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दक्षिण कोरिया में अमेरिकी कमांडर ने सोल की रणनीतिक भूमिका बताई

Last Updated:December 29, 2025, 14:54 IST

South Korea News: दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना के कमांडर ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में किसी भी खतरे पर तुरंत प्रतिक्रिया न देना अमेरिका की रणनीति का हिस्सा है. नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के तहत अमेरिका सीधे हस्तक्षेप के बजाय सोल और टोक्यो को मजबूत कर रहा है. फर्स्ट आइलैंड चेन के जरिए चीन के प्रभाव को संतुलित करने पर जोर है.कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका का बदला खेल, अब सीधे जवाब नहीं, समझेंउत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच का बॉर्डर. (Credit-Reuters File)

दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना के कमांडर ने सोमवार को सोल की रणनीतिक भूमिका को लेकर अहम बात रखी. उन्होंने साफ किया कि कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका किसी भी संभावित खतरे पर तुरंत सैन्य प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता. यूएस फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका चाहता है कि किसी भी टकराव की स्थिति में पहले रणनीतिक संतुलन बनाए रखा जाए और हर कदम सहयोगी देशों के साथ मिलकर उठाया जाए. अमेरिका और दक्षिण कोरिया के गठजोड़ पर आयोजित एक फोरम में ब्रूनसन ने कहा कि यह फैसला अमेरिका की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी से जुड़ा है. इसके तहत अमेरिका सीधे हस्तक्षेप की बजाय अपने सहयोगी देशों को मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन चाहता है कि सोल और टोक्यो खुद इतनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता हासिल करें कि वे क्षेत्रीय खतरों का सामना कर सकें. ब्रूनसन ने खास तौर पर ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ का जिक्र किया. यह प्रशांत महासागर में फैली एक अहम रणनीतिक श्रृंखला मानी जाती है, जिसमें जापान, ताइवान और फिलीपींस जैसे इलाके शामिल हैं. अमेरिका की रणनीति है कि इस चेन को मजबूत बनाकर चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को संतुलित किया जाए. दक्षिण कोरिया और जापान को इस सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा माना जा रहा है. कमांडर ने नॉर्थ कोरिया के बारे में कुछ नहीं कहा.

क्या बोले कमांडर?

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने संबोधन में ब्रूनसन ने कहा, ‘हाल ही में यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी दस्तावेज को जारी किया गया, जो न सिर्फ इस इलाके की बल्कि खुद कोरिया की भी अहमियत से रूबरू कराता है. यह इस बात पर भी जोर देता है कि इंडो-पैसिफिक को स्थिर और उम्मीद के मुताबिक बनाए रखने में एक जैसी सोच वाले साझेदार कितनी अहम भूमिका निभाते हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘और उस मामले में, कोरिया सिर्फ प्रायद्वीप पर खतरों का जवाब नहीं दे रहा है. कोरिया बड़े रीजनल डायनामिक्स के चौराहे पर है जो पूरे नॉर्थईस्ट एशिया में शक्ति संतुलन को आकार देता है.’

उत्तर कोरिया-रूस के सहयोग पर क्या बोले?

रूस के साथ नॉर्थ कोरिया के मिलिट्री सहयोग के बारे में (खासकर यूक्रेन के खिलाफ मास्को के युद्ध में मदद के लिए नॉर्थ कोरिया के अपने सैनिकों को भेजने के बाद), ब्रूनसन ने कहा कि प्योंगयांग ने एक ‘लंबे समय का स्ट्रेटेजिक फैसला’ लिया है. ब्रूनसन ने कहा कि नॉर्थ कोरिया की ‘रूस के साथ गहरी होती सैन्य साझेदारी, जैसे उन्नत टेक्नोलॉजी के लिए हथियारों का लेन-देन,’ ने नॉर्थ के मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को ‘खतरनाक तरीकों से’ आगे बढ़ाया है. उन्होंने आगे कहा, ‘और आप दूसरी ओर एक ऐसी सरकार देखते हैं जिसने एक लंबे समय का स्ट्रेटेजिक फैसला लिया है, न कोई अस्थाई मोलभाव का खेल खेला है.’

22 दिसंबर को, साउथ कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने कहा कि वह नॉर्थ कोरिया और दूसरे संबंधित देशों के साथ बातचीत करके कोरियन पेनिनसुला में शांति स्थापित करने के लिए काम करेंगे, और प्योंगयांग के साथ फिर से जुड़ने की सरकार की कोशिशों को दोहराया था. चो ने साउथ कोरिया-यूएस पार्लियामेंटेरियन यूनियन द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा था कि प्रायद्वीप पर सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने के लिए ‘क्या किया जाना चाहिए, इस पर गहराई से सोचने’ का समय आ गया है.

First Published :

December 29, 2025, 14:54 IST

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