कड़वी है…पर तगड़ी है! भारत से लेकर श्रीलंका, नेपाल तक इस औषधि का बोलबाला, कई बीमारियों में रामबाण – Madhya Pradesh News

Last Updated:December 31, 2025, 17:27 IST
Chirata Benefits: चिरायता एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि है, जो पित्त दोष को संतुलित करती है. यह पीलिया, लिवर रोग, लंबे बुखार और डायबिटीज में लाभकारी है. काढ़ा या पाउडर के रूप में इसका सीमित सेवन शरीर को डिटॉक्स कर बिना साइड इफेक्ट फायदा पहुंचाता है. जानें और…
Chirata Benefits: विंध्य क्षेत्र में प्राचीन काल से ही जड़ी बूटियों और पेड़-पौधों के माध्यम से बीमारियों से राहत पाने की परंपरा रही है. यहां के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में आज भी कई ऐसी औषधियां मिलती हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जा रहा है. इन्हीं औषधियों में चिरायता का विशेष स्थान है. चिरायता एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जो मुख्य रूप से भारत, नेपाल और श्रीलंका में पाई जाती है. विंध्य क्षेत्र में भी इसकी उपस्थिति देखी जाती है. स्वाद में बेहद कड़वा होने के बावजूद इसके औषधीय गुण इसे अत्यंत लाभकारी बनाते हैं.
सीधी शहर में स्थित चित्रकूट आई केयर के संचालक डॉ. राहुल जायसवाल ने लोकल 18 को बताया, चिरायता एक बेहद खास औषधि है. इसके बारे में आम लोग कम ही जानते हैं. हालांकि, ग्रामीण इलाकों में आज भी घर की बुजुर्ग महिलाएं इसकी पहचान और उपयोग से परिचित हैं. आयुर्वेद में चिरायता को पित्त दोष को संतुलित करने वाली श्रेष्ठ औषधियों में शामिल किया गया है. डॉ. जायसवाल के अनुसार, पीलिया के मरीजों के लिए चिरायता किसी वरदान से कम नहीं है. यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है. लंबे समय से चल रहे बुखार में भी लाभ पहुंचाता है. इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों के लिए भी चिरायता को उपयोगी बताया गया है. चिरायता की जड़ से लेकर पत्ते तक हर हिस्सा औषधि के रूप में काम करता है.
इसे भुई नीम भी कहते हैं…स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा ने बताया, चिरायता को कई स्थानों पर कालमेघ भी कहा जाता है. इसके तीखे और नीम जैसे गुणों के कारण आदिवासी क्षेत्र में इसे भुई नीम के नाम से भी जाना जाता है. चिरायता का सबसे बेहतर सेवन काढ़े के रूप में माना जाता है. इसके लिए दो गिलास पानी में चिरायता उबालकर तब तक पकाया जाता है, जब तक पानी आधा न रह जाए. इसके बाद छानकर सेवन किया जाता है.
ऐसे भी आ रहा चिरायताआगे बताया, आजकल चिरायता पाउडर, टैबलेट और कैप्सूल के रूप में भी बाजार में उपलब्ध है. पाउडर का रोजाना लगभग 2 ग्राम सेवन शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद में कहा गया कि जो कड़वा होता है, वही शरीर के लिए हितकारी होता है. ऐसे में चिरायता जैसी कड़वी लेकिन गुणों से भरपूर औषधि कई गंभीर बीमारियों से बचाव में बिना साइड इफेक्ट के सहायक साबित हो सकती है.
About the AuthorRishi mishra
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
Location :
Sidhi,Madhya Pradesh
First Published :
December 31, 2025, 17:27 IST
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भारत, श्रीलंका, नेपाल में इस औषधि का बोलबाला, कई बीमारियों में रामबाण!
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



