Superbug in Delhi Air Pollution Winter | दिल्ली की जहरीली हवा में सुपरबग का खतरा

Last Updated:January 02, 2026, 09:57 IST
Superbug in Delhi Winter Pollution: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू दिल्ली की एक रिसर्च में खौफनाक खुलासा हुआ है. रिसर्च में दावा किया गया है कि दिल्ली की सर्दी वाली हवा में ऐसे सुपरबग्स पाए गए हैं जो किसी भी एंटीबायोटिक दवा से नहीं मरते. यह अपने आप में खतरनाक है. इससे लोगों में लाइइलाज बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. आइए जानते हैं कि इस रिसर्च में क्या कहा गया है.
दिल्ली की हवा में स्टैफिलोकोकाई बैक्टीरिया. (सांकेतित तस्वीर)
Superbug in Delhi Winter Pollution: दिल्ली की जहरीली हवा वैसे ही जहरीली है लेकिन अब इसमें ऐसे सुपरबग तैर रहे हैं जो दवा को ठेंगा दिखाकर कई बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है. यह दावा जेएनयू के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज़ के शोधकर्ताओं ने किया है. इस रिसर्च में कहा गया है कि ये सुपरबग एक तरह का बैक्टीरिया है. खतरनाक इसलिए है क्योंकि ये बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर कर देते हैं. यानी इस पर दवा का असर नहीं होता. दरअसल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज़ के शोधकर्ताओं ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों से हवा के नमूने एकत्र किए और पाया कि इनडोर और आउटडोर दोनों वातावरण में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकाई बैक्टीरिया का स्तर काफी अधिक है. इस बैक्टीरिया का मेडिकल नाम methicillin-resistant staphylococci यानी MRS है.
सर्दी में इस सुपरबग का खतरा ज्यादा
इस शोध में पाया गया कि सर्दियों के महीनों में इस बैक्टीरिया की संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है. इससे यह भी समझ में आया है कि सर्दी में जब सांस की बीमारियां होती हैं तो क्यों इसे ठीक होने में परेशानी होती है. जेएनयू में स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज़ की लेखिका माधुरी सिंह कहती हैं कि 100 आइसोलेट्स यानी बैक्टीरिया के मिश्रित समूह से अलग की गई एकल शुद्ध नस्लों का जब परीक्षण किया गया तो इसमें से 73 प्रतिशत सुपरबग एंटीबायोटिक दवा के प्रति रेजिस्ट थे. इतना ही नहीं 36 प्रतिशत बैक्टीरिया कई तरह की दवाओं को बेअसर कर देते थे. ये बैक्टीरिया बाहर और घर के अंदर की हवाओं में भी घुसे हुए हैं. अध्ययन में कहा गया है कि सर्दियों के मौसम में यह बैक्टीरिया अपनी वृद्धि को चरम पर लेकर जाती है जबकि बरसात के मौसम में इसकी सख्या कम हो जाती है. यह अध्ययन नेचर जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
हेल्थ पर खतरनाक असर
अध्ययन में कहा गया है कि स्टेफायलोकोकस बैक्टीरिया के 8 प्रजातियों का विश्लेषण किया गया इनमें से 2 इंसान और जानवरों में सबसे ज्यादा हमला करता है. शोधकर्तांओं ने बताया कि इस अध्ययन ने साबित किया है कि शहरी वातावरण में कितने खतरनाक किस्म के बैक्टीरिया रच बस गए हैं जो दवाओं को भी बेसअर कर रहे हैं. यह आने वाले समय में स्वास्थ्य के हिसाब से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में इसे रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. गौरतलब है कि दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है. यहां की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से 7 से 10 गुना ज्यादा खराब है. इस खराब हवा के कारण सबसे ज्यादा सांस संबंधी बीमारियां होती है जिसका प्रभाव तुरंत देखने को मिलता है. लेकिन कई ऐसी बीमारियां हैं जिसका पता तत्काल नहीं लगता है लेकिन धीरे-धीरे शरीर को यह खोखला करने लगता है. यहां तक कि एयर पॉल्यूशन के कारण कैंसर तक हो सकता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर 42 लाख लोगों को समय से पहले जान गंवानी पड़ती है.
हमें क्या करना चाहिए
वायु प्रदूषण से संभावित सेहत के खतरे को देखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास जरूरी है. इससे बचने के लिए हमें प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. लेकिन अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं. सबसे पहले तो जरूरी बात यह है कि इस प्रदूषण में बाहर बेहद सावधानी से निकलें. बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें. जितना जरूरी हो उतना ही बाहर निकलें. बहुत सुबह और रात में वॉक करने बाहर न निकलें. स्किन पर मॉइश्चर या नारियल तेल लगाकर बाहर निकलें. घर के अंदर इंडोर प्लांट लगाएं जिससे ऑक्सीजन साफ मिले. बैक्टीरिया के हमले से बचने के लिए साइट्रस फ्रूट्स और हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करें. इनपुट-आईएएनएस
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First Published :
January 02, 2026, 09:57 IST
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