पहले कैसे-कैसे होते थे रेलवे के ब्रिज, ऐसी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो , जो आपने पहले शायद ही कभी देखी हो

Last Updated:January 02, 2026, 11:22 IST
नई दिल्ली. आज देश में चिनाब लेकर अंजी और पंबन ब्रिज बन चुके हैं, जो अपने आप में अनूठे है और आधुनिक तकनीक की वजह से विश्व स्तर पर पहचान बना चुके हैं. पर देश में पहले भी ऐसे ब्रिज बने थे, जो उस दौर में खास थे, इनमें कुछ अब भी हैं और कुछ बंद हो चुके हैं. इन ब्रिज के ऊपर से ट्रेन गुजरने का अलग ही अहसास होता है. ऐसी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो जो, पहले आपने नहीं देखी होगी.
डफरिंग ब्रिज जिसे अब मालवीय ब्रिज के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी पर बना एक ऐतिहासिक डबल-डेकर रेलवे पुल है, जो 1887 में बनकर तैयार हुआ था. इस ब्रिज को डफरिग ब्रिज इसलिए कहा जाता था क्योंकि क्योंकि इसका उद्घाटन वायसराय अर्ल ऑफ डफरिन ने 16 दिसंबर 1887 को किया था. इसका निर्माण औध और रोहिलखंड रेलवे (ओ एंड आआर) के इंजीनियरों ने किया था. ब्रिज के मुख्य इंजीनियरफ्रेडरिक थामस थे.<br />.

यह अपनी खासियत की वजह से भारतीय उपमहाद्वीप का पहला ब्रिज था. इसके इस्ट्रक्चर की खासियत यह है कि सात बड़े बड़े स्पैन में बना है. प्रत्येक 333 फिट लंबा है. इसके 18 छोटे छोटे स्पैन बने है. जिसमें 9 स्पैन 110 फिट के हैं. यह डबल डेकर ब्रिज है, जिसमें नीचे सड़क और ऊपर ट्रेन गुजरती हैं. सड़क ग्रांड ट्रंक रोड यानी जीटी रोड है. 1926 में ली गई फोटो पुराने समय की इस ब्रिज की तस्वीर है, जब यह पूरी तरह चालू था और ब्रिटिश काल का महत्वपूर्ण हिस्सा था. 1948 में स्वतंत्र भारत में इसका नाम बदलकर मालवीय ब्रिज कर दिया गया, महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् पंडित मदन मोहन मालवीय के सम्मान में. आज भी यह वाराणसी जंक्शन और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) को जोड़ता है.

रामगंगा ब्रिज यूपी के मुराबाबाद में पड़ता है, जो रामगंगा नदी पर बना है. इसे शार्ट में रामगंगा ब्रिज के नाम से जाना जाता है, जो मुरादाबाद जंक्शन और बरेली को जोड़ने वाली रेल लाइन बनता है. यह ब्रिज साल 1872-73 में बना था . यह उत्त्तर रेलवे के अंतर्गत आता है. पास में ही रामगंगा ब्रिज एनआर नाम का छोटा रेलवे स्टेशन है, जो बरेली-मुरादाबाद लूप पर स्थित है. पुराना ब्रिज होने की वजह से यहां ट्रेनें धीमी स्पीड से गुजरती हैं
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भोर घाट रेलवे ऐतिहासिक ब्रिजों में से एक की है, जो भोर घाट सेक्शन पर स्थित एक आर्च पर बना है. महाराष्ट्र में पश्चिमी के भोर घाट क्षेत्र में पड़ता है, जो मुंबई-पुणे रेल लाइन पर सेंट्रल रेलवे के करीब खोपोली-करजत-लोनावला-खंडाला के बीच पड़ता है. इस सेक्शन में ट्रेन 1863 में चलनी शुरू हुई. इस सेक्शन में कई टनल और गहरी घाटियां पड़ती हैं यह ब्रिज स्टील आर्च डिजाइन का है, इसमें स्टीम ट्रेन ब्रिज को पार कर रही है.

यह भोर घाट ब्रिज आर्च ब्रिज है जो चिनाब ब्रिज की याद दिलाता है. पर दोनों में काफी फर्क है. चिनाब ब्रिज विश्व का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज है. जो एफिल टावर से भी काफी ऊंचा है. इस ब्रिज से ट्रेन की स्पीड धीमी होती थी, पर चिनाब ब्रिज से धीमी करने की जरूरत नहीं है.

यमुना ब्रिज दिल्ली<br />यह पुराना यमुना ब्रिज है करीब 150 साल पुराने इस लोहे के पुल का निर्माण अंग्रेजों ने साल 1867 में कराया था. उस समय इसकी लाइफ 80 साल तय की गई थी, जो 1947 में ही पूरी हो गई थी. इसके बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण दशकों से इसी पुल से ट्रेनों का ऑपरेशन होता रहा. यह ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा बनवाया गया था.

<br />ब्रिज की कुल लंबाई 804 मीटर (2,640 फीट) है, जिसमें 12 मुख्य स्पैन (प्रत्येक 202.5 फीट) और 2 छोटे एंड स्पैन (42 फीट) हैं. ऊपर दो रेलवे लाइनें (ओल्ड दिल्ली से शाहदारा तक) और नीचे सड़क है जिसें ट्रैफिक चलता है. किसी जमाने में यह ब्रिज कोलकाता-दिल्ली को जोड़ने वाली पहली रेल लाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा था. यह पुल पुराीन दिल्ली को पूर्वी हिस्से (शाहदरा) से जोड़ता है.

उस दौर में बने सभी ब्रिज आधुनिक तकनीक वाले थे, पर नई तकनीक के आने के बाद ये पुराने होते गए. इस वजह से इनमें कई ब्रिज बंद हो चुके हैुं.
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January 02, 2026, 11:22 IST
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पहले कैसे होते थे रेलवे के ब्रिज, ऐसी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो,जो आपने नहीं देखी


