Rajasthan

अलवर मेवात शिक्षा एवं संस्था बन रहा बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण का मार्गदर्शक!

अलवर. जिले के मेवात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को लेकर जहां सामाजिक बंदिशें और रूढ़िवादी सोच लंबे समय से बड़ी चुनौती रही हैं, वहीं अलवर मेवात शिक्षा एवं संस्था पिछले दो दशकों से बदलाव की मजबूत नींव रख रही है. संस्था गरीब और ड्रॉपआउट बच्चियों को निःशुल्क शिक्षा देकर न सिर्फ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ रही है, बल्कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी अहम भूमिका निभा रही है.

संस्था के सचिव नूर मोहम्मद ने बताया कि वर्ष 2005 में अलवर जिले की पंचायत समिति किशनगढ़ बास के मेवात क्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर से शिक्षा के क्षेत्र में काम की शुरुआत की गई. उस समय हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, गांव में प्राथमिक स्कूल तो था, लेकिन सामाजिक दबाव और रूढ़िवादी सोच के कारण कोई भी ग्रामीण अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेजता था. बालिकाएं या तो घरेलू कामों में लगी रहती थीं या पशु चराने जैसे कार्यों में समय बिताती थी.

नूर मोहम्मद ने बताया कि इसी दौरान शबनम नाम की एक बालिका संस्था के संपर्क में आई. उस समय उसकी उम्र करीब 9 वर्ष थी और वह बकरियां चराती थी. संस्था ने उसे ब्रिज कोर्स से जोड़ा और पांचवीं कक्षा पास करवाई. इसके बाद उसे सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया गया, जहां उसने आठवीं और दसवीं की पढ़ाई पूरी की. जब शबनम को आगे की पढ़ाई के लिए अलवर ले जाने की बात आई तो उसके पिता ने समाज के डर से मना कर दिया.

उनका कहना था कि लोग क्या कहेंगे कि लड़की को कहां लेकर जा रहे हैं. काफी समझाइश और विश्वास दिलाने के बाद शबनम का अलवर के पॉलीटेक्निक कॉलेज में प्रवेश करवाया गया. शबनम ने तमाम सामाजिक दबावों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर सरकारी नौकरी हासिल की. आज वह मेवात क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है.

संस्था के प्रयासों का दायरा सीमित नहीं है

नूर मोहम्मद ने बताया कि बीते चार से पांच वर्षों में संस्था ने 325 ड्रॉपआउट बालिकाओं को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है, जबकि 375 बालिकाओं को कॉलेज तक पहुंचाया गया है. संस्था किशोर बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है. ड्रॉपआउट बच्चियों को ओपन बोर्ड के माध्यम से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई करवाई जाती है और इसके बाद उन्हें कॉलेज में प्रवेश दिलाया जाता है. इसके अलावा, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली वे बालिकाएं जो 9वीं और 10वीं कक्षा में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में कमजोर होती हैं, उन्हें तीन महीने का विशेष ट्यूटोरियल सपोर्ट दिया जाता है. इस पहल का उद्देश्य बच्चियों को दसवीं कक्षा में फेल होने से बचाना है. संस्था का मानना है कि दसवीं में फेल होने पर बच्चियों के स्कूल छोड़ने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे बाल विवाह की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में संस्था स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था कर तीन महीने में 100 प्रतिशत परिणाम देने का प्रयास करती है.

शिक्षा ही बाल विवाह रोकने का सबसे सशक्त माध्यम है

नूर मोहम्मद ने कहा कि जब लड़कियां पढ़ती हैं तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और बाल विवाह अपने आप रुकने लगता है. संस्था का प्रयास है कि बच्चियां कम से कम 12वीं तक शिक्षा हासिल करें और इस स्तर तक उनके सोचने-समझने की क्षमता को विकसित किया जाए कि वे आगे पढ़ने के लिए खुद इच्छुक हों. संस्था की डिप्टी डायरेक्टर आशा नारंग ने बताया कि 25 गांवों में 50 से अधिक लड़कियां पहली बार अपना खुद का रोजगार शुरू कर चुकी हैं.

इसके साथ ही मेवात क्षेत्र में बालिकाओं की पढ़ाई को लेकर ‘मेवात शिक्षा पंचायत’ संगठन का गठन किया गया है, जो शिक्षा विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. वहीं संस्था के मैनेजिंग डायरेक्टर शाहरुख नूर ने कहा कि यदि बालिका शिक्षा को सभी का सहयोग मिले और इस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए, तो मेवात क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है. उन्होंने बताया कि बालिकाओं को संस्था से जोड़ने में ग्रामीण हारून का विशेष योगदान रहा है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj