बकरी पालन से कमा सकते हैं लाखों मुनाफा, बस इन बातों का रखें ध्यान, समय और पैसे दोनों की होगी बचत

Last Updated:January 06, 2026, 10:40 IST
Goat Rearing Tips: गोट फार्मिंग पशुपालकों के लिए मुनाफे का बेहतरीन जरिया है. सही पोषण और देखभाल से बकरियों और बकरों से दूध और मांस दोनों का लाभ लिया जा सकता है. बकरी के बच्चों को जन्म के पहले चार-पांच दिनों तक खीस पिलाना जरूरी है और दूध पीने पर ध्यान दें. वयस्क पशुओं को अच्छे गुण वाले हरे और सूखे चारे के साथ खनिज तत्व देना चाहिए. गर्भवती और दूध देने वाली बकरियों को अतिरिक्त पौष्टिकता और दाने का मिश्रण दें. समय पर टीकाकरण और रोगों की रोकथाम से उत्पादन बढ़ता है और मुनाफा सुरक्षित रहता है.
पशुपालकों के लिए गोट फार्मिंग फायदे का सौदा है. आसान रखरखाव में पशुपालक बकरे और बकरियों को पाल सकते हैं और दूध और मुनाफा दोनों प्राप्त कर सकते हैं. अगर पशुपालक सुनियोजित तरीके से गोट फार्मिंग करे तो वे ओर भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. बकरे और बकरियों के बच्चों को पालते समय अगर पशुपालक कुछ बातों का ध्यान रखते हैं, तो बड़े होने पर उम्मीद से भी अधिक मुनाफा देंगे. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि पशुपालक गोट फार्मिंग तो करते हैं, लेकिन सही तरीके से कैसे किया जाता है यह उनको नहीं पता होता है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि बकरी के बच्चों के पैदा होने के चार-पांच दिनों तक उन्हें खीस पिलाएं. उन्हें मां से अलग करने के बाद दिन में दो-तीन बार थनों से थोड़ा-थोड़ा दूध पिलाते रहें. दूध पीने से मना करने पर बोतल से भी दूध पिला सकते हैं. बच्चों को स्टार्टर आहार, अच्छे गुणों वाला द्विदल सूखा चारा और खनिज पदार्थ भी खिलाएं. इसके अलावा हरे चारे में जई, मटर, बरसीम, लोबिया खिला सकते हैं.

वयस्क बकरे-बकरियां कड़े और रेशेदार चारे को भली-भाति खा सकती हैं. लेकिन, मांस और दूध के लिए पाली जाने वाली बकरियों को अच्छे गुणों वाला चारा देना जरूरी होता है. उन्होंने बताया कि गाभिन बकरियों को आहार खिलाते समय मां के शरीर में पल रहे बच्चे का भी ध्यान रखें. गर्भकाल के आखिरी समय में बकरियों को अतिरिक्त पौष्टिक तत्त्वों की आवश्यकता होती है, ताकि मां के शरीर में कमजोरी न आए. उन्हें अच्छे गुणों वाला दलीय हरा चारा और लगभग 500 ग्राम दाना प्रतिदिन खिलाएं.
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पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि दूध देने वाली बकरियों को खिलाते समय उनके शरीर का भार, दूध की मात्रा, उसमें चिकनाई का प्रतिशत, मौसम की दशा, हरे चारे की मात्रा और गुणवत्ता और खाद्य पदार्थों का ध्यान में रखें. दलहनी हरा चारा जैसे रिजका, बरसीम बहुत ही अच्छा होता है. हरा चारा न मिलने पर सूखे चारे को खिलाना बकरे और बकरियों के लिए अच्छा रहता है.

उन्होंने बताया कि बकरियों को 150 ग्राम दाने का मिश्रण उनकी सेहत और पोषण के लिए और 3 से 4 सौ ग्राम दाना प्रति लीटर दूध के हिसाब से प्रतिदिन खिलाएं. सर्दी में शरीर को गर्म रखने में चर्बी खर्च हो जाती है, इसलिए इस मौसम में बकरियों को दाने की अतिरिक्त मात्रा दें. इसके अलावा समय समय टीकाकरण करवाना भी बहुत जरूरी है. गोट फार्मिंग के दौरान बकरा और बकरियां में खुरपका, मुंहपका और फड़किया रोग का प्रकोप अधिक रहता है. अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो इसमें उनकी मौत तक हो सकती है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि गोट फार्मिंग के दौरान अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए बकरे और बकरियों को अच्छा पोषण देना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में एक किलो दाना मिश्रण बनाने के लिए दला हुआ चना-155 ग्राम, दली हुई मक्का-375 ग्राम, मूंगफली की खल-250 ग्राम, गेहूं का चोकर-150 ग्राम, खनिज मिश्रण-20 ग्राम, नमक-50 ग्राम इस मिश्रण को 150 ग्राम प्रतिदिन जीवन निर्वाह के लिए और 3 से 4 सौ ग्राम प्रति लीटर दूध उत्पादन पर दें.
First Published :
January 06, 2026, 10:40 IST
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बकरी पालन से कमा सकते हैं लाखों मुनाफा, बस इन बातों का हमेशा रखें ख्याल



