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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में अपराध की गुत्थियां सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक ऐसी तकनीक का सहारा लिया है, जिसकी चर्चा चारों तरफ होने लगी है. दिल्ली पुलिस ने पहली बार एक मर्डर केस में सबसे आधुनिक और अनूठी तकनीक का सहारा लिया है. तिमारपुर इलाके में पिछले साल अक्टूबर में हुई 32 वर्षीय यूपीएससी (UPSC) अभ्यर्थी रामकेश मीणा की हत्या के मामले में पुलिस ने सोमवार को तीस हजारी कोर्ट में 813 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की. दिल्ली पुलिस ने इस केस में गेट एनालिसिस (Gait Analysis) से कातिल के खिलाफ सबूत जुटाकर अदालत में पेश किया है. गेट एनालिसिस में व्यक्ति के चलने के तरीके का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है और फिर उसको मिलाया जाता है. दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह पहला मामला है जहां किसी अपराधी को सजा दिलाने के लिए उसकी ‘चाल’ को मुख्य सबूत के तौर पर अदालत में पेश किया गया है.

ब्लाइंड मर्डर का केस पुलिस की जांच में हमेशा के लिए चुनौती से भरा होता है. ऐसे हत्याकांड में हत्या का कोई सीधा सुराग, गवाह या मकसद तुरंत पता नहीं चलता. इससे पुलिस के सामने हत्यारे को ढूंढना बहुत मुश्किल हो जाता है. पुलिस इसे सुलझाने के लिए गहन जांच, परिस्थितिजन्य सबूत और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स खासकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जरूरत पड़ती है. ब्लाइंड मर्डर मामलों में हत्यारे अक्सर अपनी पहचान या मकसद छुपाने में सफल हो जाते हैं. यूपीएससी छात्र के साथ भी ऐसा ही हुआ जब उसके गर्लफ्रेंड की चालाकी ने दिल्ली पुलिस को शुरुआती जांच में चकमा दे दिया.

वारदात के पीछे की खौफनाक कहानी

कहानी है रामकेश मीणा नाम के एक छात्र की जो आईएएस बनने की इच्छा में दिल्ली आया और तिमारपुर में किराए के मकान में रहने लगा. तिमारपुर में ही उसकी दोस्ती सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा अमृता चौहान से हुई. दोनों साथ रहने लगे. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद अमृता की दोस्ती एक दूसरे छात्र से हो गई. एक दिन लिव-इन पार्टनर अमृता चौहान ने अपने पूर्व प्रेमी सुमित कश्यप और एक साथी संदीप कुमार के साथ मिलकर रामकेश मीणा की हत्या कर दी. हत्या की वजह बेहद चौंकाने वाली थी. अमृता इस बात से नाराज थी कि रामकेश उसके अंतरंग वीडियो (Intimate Videos) डिलीट नहीं कर रहा था. जब उसने यह बात सुमित को बताई तो दोनों ने मिलकर रामकेश को रास्ते से हटाने का मन बना लिया.

हत्या को ‘हादसा’ बनाने की कोशिश

5 अक्टूबर 2025 की रात को इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया. आरोपियों ने पहले रामकेश को बुरी तरह पीटा और फिर मोबाइल फोन की चार्जिंग केबल से उसका गला घोंट दिया. हत्या को एक हादसे का रूप देने के लिए आरोपियों ने रामकेश के शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी, ताकि दुनिया को लगे कि घर में शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से आग लगी और रामकेश की मौत हो गई. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने आरोपियों की पूरी योजना पर पानी फेर दिया. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जब रामकेश को आग लगाई गई, तब वह जीवित था या बेहोश था, क्योंकि उसके फेफड़ों में धुएं के अवशेष मिले थे.

गेट एनालिसिस बना दिल्ली पुलिस का मास्टरस्ट्रोक

इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान करना थी, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में उनके चेहरे साफ नहीं दिख रहे थे. तब दिल्ली पुलिस ने गेट एनालिसिस तकनीक अपनाने का फैसला किया. इसके लिए गुजरात से फोरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया गया. विशेषज्ञों ने अपराध स्थल के आसपास लगे पांच अलग-अलग सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया.

क्या होता है गेट एनालिसिस?

गेट एनालिसिस के दौरान व्यक्ति के पैरों और हाथों की हरकत, कदम की लंबाई और पूरे चलने के चक्र या स्टाइल का बारीकी से अध्ययन किया जाता है. पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों का एक री-क्रिएटेड वीडियो बनाया और उसे विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए अपराध के समय के सीसीटीवी फुटेज से मिलाया. दोनों वीडियो की चाल एक जैसी पाई गई, जिससे यह साबित हो गया कि सीसीटीवी में दिखने वाले संदिग्ध वही आरोपी हैं जिन्हें पुलिस ने पकड़ा है.

तकनीकी सबूतों की कतार

पुलिस ने केवल चाल पर ही भरोसा नहीं किया, बल्कि तकनीकी सबूतों का अंबार खड़ा कर दिया. चार्जशीट के अनुसार, अमृता इंस्टाग्राम के जरिए अपने साथियों के साथ रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन कर रही थी. उसने उन्हें मैसेज कर बताया था कि रामकेश घर पर अकेला है. इसके अलावा कमरे में लगे जले हुए एयर कंडीशनर की जांच नामी कंपनियों के तकनीकी विशेषज्ञों से कराई गई. विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि एसी के कंप्रेसर में कोई लीकेज या खराबी नहीं थी, जिससे यह साबित हो गया कि आग शॉर्ट सर्किट या एसी ब्लास्ट से नहीं लगी थी, बल्कि जानबूझकर लगाई गई थी.

जांबाज टीम और 55 गवाह

इस पेचीदा केस को सुलझाने का श्रेय तिमारपुर थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर पंकज तोमर के नेतृत्व वाली टीम को जाता है, जिसमें सब-इंस्पेक्टर दीपक, मोहित और हेड कांस्टेबल राम रूप शामिल थे. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में 55 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. जांच में यह भी पता चला कि हत्या पूरी तरह से पूर्व-नियोजित (Pre-planned) थी, क्योंकि आरोपियों ने वारदात के बाद छिपने के लिए दक्षिण दिल्ली के छतरपुर में पहले से ही एक घर किराए पर ले रखा था.

दिल्ली पुलिस को पूरा भरोसा है कि गेट एनालिसिस जैसे पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर वे इस मामले में आरोपियों को उम्रकैद या फांसी की सजा दिलाने में सफल रहेंगे. यह केस भारतीय न्यायिक प्रणाली में फॉरेंसिक साइंस के बढ़ते महत्व का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है. इस तकनीक के सहारे साल 2021 में मुंबई पुलिस ने साकीनाका रेप-मर्डर केस में आरोपी को फांसी की सजा दिलवाने कामयाब हुई थी. इस तकरीक के सहारे साल 2017 में बेंगलुरू के गौरी लंकेश हत्या में आरोपी को सजा मिली थी. 2024 के रामेश्वरम कैफे कांड में भी गेट एनालिसिस तकनीक काफी कागरगर साबित हुआ था.

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