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सऊदी क्राउन प्र‍िंस की तरह क्‍या न‍िकलोस मादुरो अमेर‍िका के चंगुल से बच पाएंगे?

Last Updated:January 08, 2026, 21:51 IST

वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो ने अमेरिकी कोर्ट में खुद को बचाने के लिए वही दांव चला है, जिसने सऊदी क्राउन प्रिंस को जमाल खशोगी हत्याकांड में बचाया था. मादुरो ने खुद को राष्ट्राध्यक्ष बताते हुए मुकदमे से छूट की मांग की है. लेकिन अमेरिका के लिए यह मामला पेचीदा है. क्या वह उस नेता को छूट देगा जिसे वह राष्ट्रपति मानता ही नहीं? जानिए मादुरो की दलील और नोरिगा के केस का पेंच.सऊदी क्राउन प्र‍िंस की तरह क्‍या मादुरो अमेर‍िका के चंगुल से बच पाएंगेन‍िकोलस मादुरो सऊदी क्राउन प्र‍िंस की तरह छूट देने की मांग कर रहे हैं.

वाशिंगटन/कराकस. अमेरिका की गिरफ्त में आए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपत‍ि निकोलस मादुरो क्या कानून के उस दांव का इस्तेमाल कर रिहा हो पाएंगे, जिसने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को बचाया था? जमाल खशोगी हत्याकांड की फाइलें एक बार फिर चर्चा में हैं, क्योंकि मादुरो ने अमेरिकी कोर्ट में खुद को राष्ट्राध्यक्ष बताते हुए मुकदमे से छूट की मांग की है. सोमवार को अमेरिकी अदालत में अपनी पहली पेशी के दौरान मादुरो ने जज के सामने वही दलील रखी, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत किसी भी देश के मौजूदा प्रमुख को दूसरे देश की अदालतों से सुरक्षा देती है.

खशोगी हत्याकांड और इम्युनिटी का कवच
मादुरो की दलील को समझने के लिए 2022 का वह मामला याद करना जरूरी है, जब अमेरिका ने सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ केस खारिज कर दिया था. तब अमेरिकी सरकार ने तर्क दिया था कि मोहम्‍मद बिन सलमान एक देश के हेड ऑफ स्‍टेट हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उन्हें इम्युनिटी यानी कानूनी छूट प्राप्त है. अब मादुरो भी इसी रास्ते पर चल पड़े हैं. उन्होंने कोर्ट में कहा, मैं एक संप्रभु राज्य का प्रमुख हूं और मुझे वे सभी विशेषाधिकार मिलने का अधिकार है जो इस पद के साथ आती हैं. उन्होंने काराकस से न‍िकाले जाने को अपहरण करार दिया है.

ट्रंप प्रशासन के सामने क्या है पेंच?

हालांकि, मादुरो और सऊदी क्राउन प्रिंस के मामले में एक बड़ा बुनियादी फर्क है. अमेरिका ने मोहम्‍मद बिन सलमान को सऊदी अरब का वैध शासक माना था, लेकिन मादुरो के साथ ऐसा नहीं है. जो बाइडेन प्रशासन से लेकर ट्रंप प्रशासन तक, अमेरिका का यह स्टैंड रहा है कि मादुरो ने अवैध रूप से सत्ता पर कब्जा किया था. 2024 में अमेरिका ने विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज को चुनाव का असली विजेता घोषित किया था और मादुरो पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था.

अमेरिका की अपनी गलती बन सकती है मादुरो की ढाल?

लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने अनजाने में मादुरो का पक्ष मजबूत कर दिया है. मादुरो के पकड़े जाने के बाद, अमेरिका वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ संपर्क में है और उन्हें अंतरिम नेता के रूप में देख रहा है. ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के सूत्रों का कहना है कि मादुरो कोर्ट में यह तर्क देंगे कि अगर अमेरिका उनकी ही उपराष्ट्रपति को मान्यता दे रहा है, तो इससे उनकी (मादुरो की) वैधता और इम्युनिटी भी सुरक्षित रहती है. यह एक जटिल कानूनी पेंच है जो अभियोजन पक्ष को परेशान कर सकता है.

नोरिगा का उदाहरण: जब अमेरिका ने खारिज की थी दलील

मादुरो के दावों को खारिज करने के लिए अमेरिकी प्रशासन पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिगा के केस का हवाला देने की तैयारी में है. 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के आदेश पर अमेरिकी सेना ने पनामा पर आक्रमण किया था और नोरिगा को पकड़कर अमेरिका ले आई थी. नोरिगा ने भी ‘हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी’ का दावा किया था. तब अमेरिकी कोर्ट ने उनकी दलील यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि अमेरिका ने कभी उन्हें पनामा का वैध नेता माना ही नहीं था. अब अमेरिका मादुरो के मामले में भी यही तर्क अपनाएगा कि वह सालों से मादुरो को राष्ट्रपति नहीं मानता. लेकिन डेल्सी रोड्रिगेज के साथ अमेरिकी बातचीत ने इस केस को ‘नोरिगा’ और मोहम्‍मद बिन सलमान के उदाहरणों के बीच उलझा दिया है.

About the AuthorGyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi..com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

First Published :

January 08, 2026, 21:39 IST

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