सोमनाथ मंदिर का दरवाजा: वो सिख शासक जिसने मुस्लिमों के जबड़े से खींचकर लाया भारत का गौरव, अभी कहां है? | Somnath Temple door Sikh ruler Maharaja Ranjit Singh who snatched India pride from Muslim Mahmud of Ghazni

Last Updated:January 11, 2026, 12:58 IST
Somnath Temple: दुनियाभर में शायद ही ऐसा कोई धर्मस्थल हो जिसे सिर्फ लूटने के लिए बार-बार हमले का सामना करना पड़ा हो, जितना सोमनाथ मंदिर पर किया गया. मुस्लिम आक्रांताओं ने कई बार इस मंदिर का विध्वंस किया. यहां तक कि इसके दरवाजे को भी उखाड़ ले भागे. मंदिर को बचाने में बड़ी तादाद में हिन्दुओं ने बलिदान दिया. सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है.
Somnath Temple: सोमनाथ मंदिर पर मुस्लिम हमलावरों ने कई बार हमले कर उसे लूटा-खसोटा और विध्वंस किया. (फोटो: PTI)
Somnath Temple: सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है, बल्कि बार-बार हुए आक्रमणों और पुनर्निर्माण के कारण यह भारतीय इतिहास का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है. सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता और संस्कृति का केंद्र होने के साथ ही करोड़ों हिन्दुओं के आस्था का स्थल भी है. इसी ऐतिहासिक क्रम में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह का नाम भी सोमनाथ मंदिर से जुड़े एक खास प्रसंग में सामने आता है, जिसे लेकर आज तक बहस जारी है.
इतिहासकारों और विभिन्न स्रोतों में यह दावा किया जाता है कि 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान मुस्लिम आक्रमणकारी महमूद गजनवी और उसके बाद अन्य मुस्लिम शासकों ने सोमनाथ मंदिर को कई बार ध्वस्त किया. इसी दौरान मंदिर के भव्य द्वारों को लूटकर अफगानिस्तान ले जाया गया. कहा जाता है कि ये द्वार चंदन की लकड़ी से बने थे और उन पर चांदी व हाथी दांत की नक्काशी की गई थी. करीब 700 साल बाद 19वीं शताब्दी की शुरुआत में जब पंजाब में सिख साम्राज्य की स्थापना हुई, तब महाराजा रणजीत सिंह एक शक्तिशाली और प्रभावशाली शासक के रूप में उभरे. कई ऐतिहासिक दावों के अनुसार, महाराजा रणजीत सिंह ने अफगानिस्तान से इन ऐतिहासिक द्वारों को वापस भारत मंगवाया. यह कदम उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की भावना से उठाया बताया जाता है.
कहां है सोमनाथ मंदिर का दरवाजा?
हालांकि, उस समय तक सोमनाथ मंदिर की स्थिति बेहद खराब थी. इतिहासकारों के अनुसार, 11वीं शताब्दी से लेकर 18वीं शताब्दी के बीच महमूद गजनवी, मोहम्मद गौरी, अलाउद्दीन खिलजी और अन्य शासकों द्वारा मंदिर को कई बार नष्ट किया जा चुका था. मुगल बादशाह औरंगजेब ने तो इसे छिन्न-भिन्न ही कर दिया था. बताया जाता है कि जब महाराजा रणजीत सिंह के समय ये द्वार भारत लौटे, तब सोमनाथ मंदिर पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका था. ऐसे में इन द्वारों को वापस सोमनाथ मंदिर में स्थापित करना संभव नहीं था. इसी कारण यह माना जाता है कि महाराजा रणजीत सिंह ने इन ऐतिहासिक द्वारों को अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब (जिसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है) के प्रवेश द्वार ‘दर्शन देओढ़ी’ में स्थापित करवा दिया. यह स्थापना लगभग 1800 ईस्वी के आसपास मानी जाती है. आज भी स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद इन द्वारों को लेकर यह विश्वास किया जाता है कि वे सोमनाथ मंदिर से जुड़े हुए हैं. बता दें कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम लियाकत अली खान को लिखी चिट्ठी में भी इस दरवाजे का उल्लेख किया था.
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
सोमनाथ मंदिर के द्वारों की असली उत्पत्ति और उनकी यात्रा को लेकर आज भी ऐतिहासिक बहस जारी है. कुछ लोग इसे महाराजा रणजीत सिंह की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे बाद के समय में गढ़ी गई कथा मानते हैं. कुल मिलाकर यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि महाराजा रणजीत सिंह भारतीय इतिहास में एक ऐसे शासक थे, जिन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक संरक्षण को महत्व दिया. सोमनाथ मंदिर के द्वारों से जुड़ा प्रसंग चाहे पूर्ण रूप से प्रमाणित हो या नहीं, लेकिन यह कहानी भारत के लंबे और जटिल ऐतिहासिक संघर्ष, आस्था और पुनर्निर्माण की भावना को जरूर दर्शाती है.
About the AuthorManish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 11, 2026, 12:58 IST
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सोमनाथ मंदिर का दरवाजा: महाराजा रणजीत सिंह से क्या है कनेक्शन, अभी कहां है?


