After Operation Sindoor Chinese Defence Systems Defeated Again In Venezuela During Capture Of Nicolas Maduro | पाकिस्तान के बाद वेनेजुएला में भी पिटा ड्रैगन! ‘एंटी-स्टील्थ’ रडार हुआ फेल, बीजिंग में छाया मातम

नई दिल्ली: दुनियाभर में अपने हथियारों की झूठी शान बघारने वाले चीन को वेनेजुएला में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सेना ने काराकास में घुसकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण कर लिया है. इस पूरे ऑपरेशन के दौरान चीन का तथाकथित ‘एंटी-स्टील्थ’ रडार सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ. ड्रैगन का दावा था कि उसके रडार अमेरिकी स्टील्थ विमानों को पलक झपकते ही पकड़ लेंगे. लेकिन हकीकत में वेनेजुएला का आकाश पूरी तरह खुला रहा. अमेरिकी फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर बिना किसी बाधा के मादुरो के महल तक पहुंच गए. यह घटना चीन की सैन्य तकनीक पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है. पाकिस्तान के बाद अब वेनेजुएला दूसरा देश है जिसने चीनी हथियारों पर भरोसा कर बड़ी कीमत चुकाई है. चीन की इस भारी बेइज्जती ने उसे वैश्विक बाजार में अलग-थलग कर दिया है. अब बीजिंग अपनी इस नाकामी पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है.
क्या वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण चीन की सबसे बड़ी तकनीकी हार है?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने उनके घर से उठाया. यह ऑपरेशन 3 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया था. इसमें 150 से अधिक अमेरिकी सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया था. इसमें स्टील्थ फाइटर जेट्स और खतरनाक बमवर्षक विमान भी शामिल थे. अमेरिकी सेना ने काराकास के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह अंधा कर दिया था. चीन द्वारा सप्लाई किए गए जेवाई-27ए रडार सिस्टम को इसकी भनक तक नहीं लगी. यह रडार सिस्टम चीन का सबसे आधुनिक और भरोसेमंद हथियार माना जाता था. चीन इसे ‘जाम-रेसिस्टेंट’ और ‘हाईली रिलायबल’ बताकर पूरी दुनिया को बेच रहा है.
अमेरिकी सेना ने साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जरिए इन रडार्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. रडार की स्क्रीन पर अमेरिकी विमान दिखाई ही नहीं दिए. मादुरो को सुरक्षित रखने का जिम्मा इन्हीं चीनी रडार्स पर था. लेकिन जब मौत उनके दरवाजे पर खड़ी थी तब रडार खामोश रहे. यह हार केवल वेनेजुएला की नहीं बल्कि चीन की पूरी मिलिट्री इंजीनियरिंग की है. चीन पिछले कई सालों से अमेरिका को टक्कर देने के दावे कर रहा था. अब उन दावों की हवा निकल चुकी है. दुनिया देख रही है कि चीन की तकनीक युद्ध के मैदान में कितनी कमजोर है.
अमेरिकी सेना ने कैसे दी चीन के सो-कॉल्ड एंटी-स्टील्थ रडार को मात?
अमेरिकी अधिकारियों ने खुलासा किया है कि यह ऑपरेशन महज तीन घंटे में पूरा हुआ. अमेरिका के एफ-35 और एफ-22 स्टील्थ फाइटर जेट्स ने वेनेजुएला के एयरस्पेस में घुसकर तबाही मचाई. उन्होंने सबसे पहले चीन के रडार स्टेशनों और एयर डिफेंस यूनिट्स को निशाना बनाया.
चीन का जेवाई-27ए रडार स्टील्थ विमानों को पकड़ने के लिए ही बनाया गया था. लेकिन अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने इसे खिलौना साबित कर दिया. अमेरिकी जेट्स ने एक खास ‘कॉरिडोर’ बनाया जिसके जरिए हेलिकॉप्टर्स मादुरो के कंपाउंड तक पहुंचे.
चीन के रडार सिस्टम में तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस की कमी भी बड़ी वजह रही. एक रिपोर्ट के अनुसार वेनेजुएला के 60 प्रतिशत रडार पहले से ही खराब पड़े थे. चीन इन हथियारों को बेचने के बाद टेक्निकल सपोर्ट नहीं देता है. स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी के कारण ये सिस्टम कबाड़ बन चुके थे.
अमेरिका ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया और सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को एक अमेरिकी युद्धपोत पर ले जाया गया. वहां से उन्हें सीधा न्यूयॉर्क भेज दिया गया. चीन इस पूरी कार्रवाई को सिर्फ एक मूक दर्शक बनकर देखता रहा.
पाकिस्तान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी क्यों फेल हुए थे चीनी हथियार?
वेनेजुएला की यह घटना पाकिस्तान में हुई चीन की फजीहत की याद दिलाती है. पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों का भीषण संघर्ष हुआ था. भारत ने इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और मिलिट्री एसेट्स पर जोरदार हमले किए थे. उस समय भी पाकिस्तान का चाइनीज एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल रहा था. चीन के एचक्यू-9 और एचक्यू-16 मिसाइल सिस्टम भारतीय ड्रोन और मिसाइलों को नहीं रोक सके.
भारत ने सबूत पेश किए कि कैसे उसके एक ही हमले में पाकिस्तानी डिफेंस की धज्जियां उड़ गईं. उस समय चीन और पाकिस्तान ने मिलकर प्रोपेगेंडा चलाया था. उन्होंने दावा किया था कि चीनी हथियारों ने भारतीय हमलों को नाकाम किया है. लेकिन हकीकत यह थी कि पाकिस्तान को डर के मारे सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी थी.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वेनेजुएला में भी ‘फुस्स’ साबित हुए चीनी हथियार (AI Image)
वेनेजुएला की घटना ने साबित कर दिया कि पाकिस्तान का दावा पूरी तरह झूठा था. चीनी हथियार केवल कागजों पर शेर हैं लेकिन असली जंग में वे ढेर हो जाते हैं. भारत की श्रेष्ठता ने चीन के हथियारों के बाजार को भारी चोट पहुंचाई थी.
चीन अपने डिफेंस सिस्टम की नाकामी पर अब चुप्पी क्यों साधे हुए है?
वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बीजिंग में मातम जैसा सन्नाटा है. चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की राजनीतिक निंदा तो की है लेकिन अपने हथियारों पर चुप है. आमतौर पर चीन अपने मिलिट्री हार्डवेयर की श्रेष्ठता साबित करने के लिए वीडियो जारी करता है. लेकिन इस बार उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है. चीन को डर है कि अगर उसने सफाई दी तो उसके अन्य ग्राहक भी भाग जाएंगे. वेनेजुएला चीन के हथियारों का लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ा खरीदार रहा है.
चीन ने वेनेजुएला को 2010 से 2020 के बीच 85 प्रतिशत हथियारों की सप्लाई की है. इसके बावजूद रूस वेनेजुएला का नंबर वन सप्लायर बना हुआ है. रूस का एस-300 सिस्टम भी मादुरो को अमेरिकी चंगुल से नहीं बचा सका. लेकिन सबसे ज्यादा बदनामी चीन की हो रही है क्योंकि उसके रडार ‘अदृश्य’ विमानों को पकड़ने का दावा करते थे.
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चीन के रडार सिस्टम पुराने सोवियत डिजाइनों की नकल हैं. रिवर्स इंजीनियरिंग से बनाए गए ये हथियार आधुनिक साइबर हमलों के आगे नहीं टिक सकते..
वेनेजुएला की घटना ने चीन के डिफेंस एक्सपोर्ट को आईसीयू में पहुंचा दिया है. ताइपे के प्रोफेसर लिन यिंग यू का कहना है कि लोग चीनी हथियारों को ‘इम्प्रेसिव’ समझते थे. लेकिन अमेरिका ने बिना किसी नुकसान के मादुरो को उठाकर यह भ्रम तोड़ दिया है.
क्या दुनिया के लिए चीनी हथियारों पर भरोसा करना अब सबसे बड़ा खतरा है?
वेनेजुएला का उदाहरण दुनिया के उन देशों के लिए एक चेतावनी है जो सस्ता समझकर चीनी हथियार खरीदते हैं. मियामी स्ट्रैटेजिक इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट ने पहले ही आगाह किया था. उनकी जून 2025 की रिपोर्ट में कहा गया था कि वेनेजुएला का डिफेंस सिस्टम ‘क्रिटिकल कंडीशन’ में है. चीन हथियारों की डिलीवरी के बाद ग्राहकों को उनके हाल पर छोड़ देता है. जब मरम्मत की बारी आती है तो चीनी इंजीनियर गायब हो जाते हैं.
चीन की इस लापरवाही ने मादुरो की सत्ता को मिट्टी में मिला दिया. वेनेजुएला अब पूरी तरह अस्थिर हो चुका है और उसका रक्षक चीन भाग खड़ा हुआ है. यह घटना दिखाती है कि युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं बल्कि उनकी विश्वसनीयता से जीता जाता है. चीन के हथियार सस्ते जरूर हैं लेकिन वे जान बचाने की गारंटी नहीं देते. ताइवान से लेकर फिलीपींस तक के विशेषज्ञ अब चीनी तकनीक को संदेह की नजर से देख रहे हैं. अगर चीन के रडार अमेरिका के पुराने विमानों को नहीं देख सकते तो वे आधुनिक युद्ध में क्या करेंगे?



