जालौर के अरविंद का कमाल! 1 मिनट में बांधते हैं 5 साफे, पीढ़ियों की परंपरा को बढ़ा रहे आगे

Last Updated:April 23, 2026, 08:04 IST
Arvind Sen Safa Artist: जालौर में एक परिवार तीन पीढ़ियों से पारंपरिक साफा बांधने की कला को जीवित रखे हुए है. अरविंद सेन इस कला में माहिर हैं और महज 20 सेकंड में एक साफा बांध लेते हैं. शादी सीजन में उनकी काफी मांग रहती है. उन्होंने यह हुनर अपने दादा से सीखा और अब इसे आगे बढ़ा रहे हैं. अलग-अलग स्टाइल के साफे बांधकर वे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं.
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जालौर. राजस्थान में जैसे ही शादी का सीजन नजदीक आता है, वैसे ही रंग-बिरंगे साफों की रौनक हर तरफ दिखाई देने लगती है. मारवाड़ की आन-बान-शान माना जाने वाला साफा सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि सम्मान, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है. शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों में साफा पहनना आज भी खास महत्व रखता है. जालोर जिले में एक ऐसा परिवार है, जो पिछले तीन पीढ़ियों से इस परंपरागत कला को जीवित रखे हुए है.
यह परिवार न केवल साफा बांधने का काम करता है, बल्कि इस कला के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ा रहा है. इस परिवार के अरविंद सेन साफा बांधने की कला में माहिर माने जाते हैं. उनकी खासियत यह है कि वे महज 20 सेकंड में एक साफा बांध लेते हैं. यही कारण है कि शादी सीजन में उनकी डिमांड काफी बढ़ जाती है और दूर-दूर से लोग उन्हें अपने कार्यक्रमों में बुलाते हैं. एक मिनट में वे 4 से 5 साफे बड़ी ही खूबसूरती और सटीकता के साथ बांध लेते हैं.
अरविंद ने दादा से सीखी थी कला
अरविंद सेन बताते हैं कि उन्होंने यह कला अपने दादा स्व. जेठाराम सेन से सीखी थी. बचपन से ही वे अपने दादाजी के साथ शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों में जाया करते थे, जहां उन्होंने इस हुनर को नजदीक से देखा और धीरे-धीरे सीखा. उनके पिता और चाचा भी आज इस काम से जुड़े हुए हैं, जिससे यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है.अपनी इस अनोखी कला के लिए अरविंद सेन को जालोर महोत्सव में तीन से चार बार सम्मानित भी किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि करीब 15 साल हो गए इस काम को करते हुए. शादी-विवाह में अलग-अलग तरह के साफे बांधते हैं, लोगों को ये बहुत पसंद आता है. हमें खुशी होती है कि हम अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
मूर्तियों पर भी साफा बांधते हैं अरविंद
आज अरविंद सेन जोधपुरी, जैसलमेरी समेत कई तरह के साफे बड़ी ही खूबसूरती से बांधते हैं. समय के साथ साफों के डिज़ाइन और स्टाइल में भी बदलाव आया है, जिससे युवाओं के बीच इसका क्रेज और बढ़ गया है. खास बात यह है कि अरविंद सेन सिर्फ लोगों के सिर पर ही नहीं, बल्कि जालोर के कई मंदिरों की मूर्तियों पर भी साफा बांधने का काम करते हैं. उनका यह हुनर न केवल उनकी आजीविका का जरिया है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध परंपरा और संस्कृति को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
April 23, 2026, 08:04 IST



