भरतपुर की अनमोल विरासत! जब माचा चारपाई पर सजती थी महफिल, गांव में दिखती थी एकता और भाईचारे की मिसाल

Last Updated:May 06, 2026, 12:00 IST
Bharatpur Hindi News: भरतपुर की माचा चारपाई पर बैठकर होने वाली महफिलें कभी गांव की सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थीं. इन महफिलों में लोग इकट्ठा होकर अपने सुख-दुख साझा करते थे और आपसी भाईचारे को मजबूत करते थे. यह परंपरा न केवल संवाद का माध्यम थी, बल्कि एकता और सामुदायिक जीवन की मिसाल भी थी. समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, जिससे गांव की सांस्कृतिक पहचान भी कमजोर हो रही है. आज जरूरत है कि ऐसी विरासत को संजोया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसे समझ सकें.
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भरतपुर: भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ घर ऐसे हैं.जहां सदियों पुरानी परंपराएं जीवित है. इन्हीं परंपराओं में से एक है. मैचा एक विशाल और मजबूत चारपाई जो कभी गांवों में भाईचारे एकता और सामूहिक जीवन का प्रतीक मानी जाती थी. मैचा सामान्य चारपाई से कई गुना बड़ी होती है. इसकी बनावट इतनी मजबूत और चौड़ी होती थी कि एक साथ 6 से 7 लोग आराम से बैठ या सो सकते थे पुराने समय में जब गांवों में आधुनिक फर्नीचर का चलन नहीं था. तब मैचा ही सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करता था.
गांव के लोग इसी पर बैठकर आपसी बातचीत मेल मिलाप और कई महत्वपूर्ण सामाजिक फैसले किया करते थे. मैचा केवल एक चारपाई नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति की पहचान थी परिवार और पड़ोसी एक साथ बैठकर घंटों तक चर्चा करते रिश्तों को मजबूत बनाते और गांव के छोटे-बड़े मुद्दों का समाधान निकालते थे. इसकी यही विशेषता इसे आम चारपाई से अलग और खास बनाती थी, हालांकि बदलते समय और आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते प्रचलन के कारण अब यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है.
बहुत कम घरों में ही बचाआज के दौर में लोग सोफा बेड और अन्य आधुनिक सुविधाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. जिससे मैचा का उपयोग सीमित हो गया है. स्थानीय निवासी शैलेंद्र ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पहले भरतपुर के लगभग हर घर में मैचा देखने को मिल जाता था लेकिन अब यह बहुत कम घरों में ही बचा है, उन्होंने कहा पहले यह मजबूती और भाईचारे का प्रतीक हुआ करता था एक ही मैचा पर 6 से 7 लोग आराम से बैठ जाते थे.
ग्रामीण इलाकों में देखने के लिए मिल जातीलेकिन अब नए फर्नीचर के आने से इसकी संख्या काफी घट गई है. आज भी भरतपुर के कुछ चुनिंदा ग्रामीण घरों में मैचा देखने को मिल जाती है. जो पुराने समय की यादों और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं. यह न केवल ग्रामीण जीवन की सादगी को दर्शाती है, बल्कि उस दौर की झलक भी दिखाती है.जब सामूहिकता और आपसी जुड़ाव को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था. आज भी यह मैचा चारपाई भरतपुर के कुछ ग्रामीण इलाकों में देखने के लिए मिल जाती है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Bharatpur,Rajasthan



