Health

Lantana Camara: रंग-बिरंगे फूलों वाला लैंटाना सिर्फ सजावटी पौधा नहीं, आयुर्वेद में हैं इसके कई औषधीय गुण

Last Updated:June 29, 2026, 19:29 IST

Lantana ke fayde: सड़क किनारे या जंगलों में उगने वाले रंग-बिरंगे फूलों वाले जिस लैंटाना (Lantana camara) पौधे को आप अक्सर एक साधारण झाड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वह असल में औषधीय गुणों का एक अनूठा पिटारा है. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इसके सीमित लेकिन बेहद प्रभावी इस्तेमाल की बात सामने आई है. हालांकि, इसकी सुंदरता जितनी आकर्षक है, इसके अनजाने इस्तेमाल का खतरा उतना ही बड़ा है. आइए लोकल 18 की इस खास रिपोर्ट में जानते हैं कि यह पौधा किस तरह सेहत के लिए फायदेमंद है और इसके साथ कौन सी सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं.

लैंटाना (Lantana camara) एक ऐसा पौधा है, जिसे लोग अक्सर सड़क किनारे, खेतों की मेड़ों, जंगलों और बगीचों में देखते हैं. इसके छोटे-छोटे रंग-बिरंगे फूल इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं. यही वजह है कि कई लोग इसे सजावटी पौधे के रूप में भी लगाते हैं. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पौधा सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ औषधीय गुणों के कारण भी जाना जाता है.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने बताया कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लैंटाना के कुछ हिस्सों का सीमित उपयोग किया जाता रहा है. हालांकि, जमुना प्रसाद यादव का कहना है कि इसका प्रयोग हमेशा सावधानी और योग्य वैद्य या चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए, क्योंकि इसके कुछ भाग जहरीले भी हो सकते हैं.

लैंटाना की पत्तियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें जीवाणुरोधी (एंटीबैक्टीरियल) गुण होते हैं. यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पत्तियों का लेप छोटी-मोटी चोट, खरोंच और घाव पर लगाने की परंपरा रही है. माना जाता है कि इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. हालांकि, किसी भी गहरे घाव या गंभीर चोट में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

Add as Preferred Source on Google

लैंटाना की पत्तियों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में हल्की सूजन कम करने के लिए किया जाता रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी ताजी पत्तियों का लेप प्रभावित स्थान पर लगाने की परंपरा है. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व सूजन और दर्द से राहत देने में मदद कर सकते हैं. किसी भी गंभीर सूजन या दर्द की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है.

कुछ क्षेत्रों में लैंटाना की पत्तियों का उपयोग खुजली, फोड़े-फुंसी और कीड़े-मकौड़ों के काटने पर किया जाता है. लोगों का मानना है कि इससे त्वचा को राहत मिल सकती है. लेकिन, यदि त्वचा पर एलर्जी या जलन बढ़ जाए तो तुरंत इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

लैंटाना की तेज गंध कई प्रकार के कीड़ों को दूर रखने में सहायक मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में इसकी पत्तियों का उपयोग प्राकृतिक रूप से कीटों को दूर रखने के लिए भी किया जाता है. हालांकि, यह रासायनिक कीटनाशकों का विकल्प नहीं है.

जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि लैंटाना के कुछ औषधीय उपयोग बताए जाते हैं, लेकिन इसके फल और कुछ अन्य भाग जहरीले माने जाते हैं. विशेष रूप से बच्चों और पालतू जानवरों को इससे दूर रखना चाहिए. इसके फल खाने से उल्टी, पेट दर्द, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इसे कभी भी बिना जानकारी के खाने की गलती नहीं करनी चाहिए.

आयुर्वेद विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग बिना सही जानकारी और चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए. लैंटाना का उपयोग भी केवल प्रशिक्षित वैद्य या विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना उचित है. स्वयं उपचार करने से लाभ की जगह नुकसान भी हो सकता है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj