Rajasthan

Ajab Gajab: मारवाड़ का अनोखा ब्याह! यहां बछड़ा बना दूल्हा, ऊंट पर निकली बारात, 800 लोगों का हुआ जीमण

Last Updated:July 05, 2026, 13:52 IST

Pali Unique Wedding: पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन उपखंड के बारसा गांव में सनातन परंपरा, पशु प्रेम और प्रकृति संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिला. यहां पूरे विधि-विधान के साथ एक बछड़े और बछड़ी का विवाह कराया गया. दूल्हा बना बछड़ा ऊंट पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचा, जबकि बैंड-बाजे, बिंदौली और मंत्रोच्चार के बीच सभी वैवाहिक रस्में निभाई गईं. आयोजन के दौरान पीपल और बरगद के पौधों का भी विवाह कराया गया. इसके बाद 800 से अधिक लोगों के लिए पारंपरिक राजस्थानी महाभोज का आयोजन हुआ. यह अनूठी शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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पाली. सनातन धर्म की बात करें तो अब तक आपने हिंदू रिती-रिवाज के साथ विवाह की परपंरा सुनी होगी जो केवल इंसानों के लिए निभाई जाती है. मगर आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि राजस्थान के पाली जिले से एक बेहद अनोखी और आस्था से जुड़ी शादी सामने आई है. जिले के मारवाड़ जंक्शन उपखंड के बारसा गांव में सनातन परंपरा और जीव-प्रकृति प्रेम का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां पूरे विधि-विधान और रीति-रिवाजों के साथ एक बछड़े की बछड़ी से शादी करवाई गई. इस अनोखे विवाह को देखने और इसमें शामिल होने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. इस पूरे विवाह समारोह में यह खास रहा कि जो बारात निकली थी, उसमें दूल्हा बना बछड़ा घोडे पर नही बल्कि ऊंट पर सवार होकर अपनी दुल्हन बछडी को लेने के लिए पहुंचा.

इस अनूठे विवाह की रस्में बिल्कुल इंसानी शादियों की तरह ही निभाई गई. शादी की शुरुआत 26 जून को लग्न लिखने के साथ हुई थी. इसके बाद मुख्य आयोजन के दिन सुबह बारसा गांव में गाजे-बाजे और बैंडबाजे के साथ भव्य बिंदौली (बारात) निकाली गई. इस शादी का मुख्य आकर्षण दूल्हा बना बछड़ा रहा, जिसे बड़े ही आदर और चाव के साथ ऊंट पर बिठाया गया था. बछड़ा-बछड़ी को लेकर श्रद्धालु ऊंट पर सवार हुए, वहीं दूसरी ओर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीपल और बरगद के पौधों को सजाकर श्रद्धालु बैठे. यह अनोखी बारात जगमोहन मंदिर से रवाना होकर नाचते-गाते हुए हनुमान मंदिर पहुंची. रास्ते भर ग्रामीण भजनों और बैंडबाजे की धुन पर जमकर थिरके.

शुभ मुहूर्त में हुए फेरे और प्रकृति का विवाह

हनुमान मंदिर पहुंचने के बाद पंडितों के सानिध्य में मंत्रोच्चार के बीच शुभ मुहूर्त में बछड़े का बछड़ी के साथ विवाह संपन्न करवाया गया. इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि जीव कल्याण के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया. बछड़े-बछड़ी के विवाह के साथ ही पीपल के पौधे की शादी बरगद के पौधे के साथ पूरे विधि-विधान से करवाई गई. ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से गांव में खुशहाली आती है और मवेशियों व प्रकृति की रक्षा होती है.

800 से अधिक लोगों के लिए महाभोज

इस ऐतिहासिक और अनूठी शादी को यादगार बनाने के लिए बारसा गांव के श्रीराम वाटिका में एक विशाल प्रीतिभोज (जीमण) का आयोजन भी किया गया था. इस मांगलिक उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित भोज में गांव और आस-पास के इलाकों से 800 से अधिक लोग प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे.

मेन्यू में था पारंपरिक राजस्थानी स्वाद

मेहमानों के लिए शुद्ध देसी और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन परोसे गए, जिनमें मुख्य रूप से लापसी, कढ़ी (खड्‌डी), पूड़ी, चिप्स और मोठ शामिल थे. गांव के बड़े-बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर किसी ने इस विवाह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. यह आयोजन न केवल कौतूहल का विषय रहा, बल्कि इसने पशु प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल भी पेश की. पूरे क्षेत्र में इस अनोखी शादी की चर्चाएं जोरों पर हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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