मेटा को नसीहत : कंपनी ऐसी व्यवस्था करे कि हटाया जा सके आपत्तिजनक कंटेंट, भारतीय भाषा समझने वालों की संख्या बढ़ाएं

Last Updated:August 07, 2026, 23:12 IST
Action on Meta : सरकार ने आपत्तिजनक कंटेंट के मामले में मेटा से दो टूक कहा है कि ऐसे कंटेंट को सिर्फ एआई के जरिये हटाने की व्यवस्था न करें, बल्कि इसमें मानवीय हस्तक्षेप करने की भी व्यवस्था की जाए.मेटा के नियमों की सरकार समीक्षा कर रही है.
नई दिल्ली. आपत्तिजनक और हानिकारक कंटेंट की मॉडरेशन को लेकर केंद्र सरकार ने Meta से कंटेंट हटाने की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) बढ़ाने को कहा है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने साफ कहा है कि केवल AI आधारित मॉडरेशन पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भ (Indian languages and Context) को समझने वाले अधिक लोगों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि कंटेंट मॉडरेशन अधिक प्रभावी और सटीक हो सके.
बैठक के दौरान Meta ने सरकार को अपने मौजूदा कंटेंट मॉडरेशन मैकेनिज्म और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया की जानकारी दी. सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव दिए. सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर सरकार और Meta के अधिकारियों के बीच अगले सप्ताह एक और बैठक होने की संभावना है, जिसमें कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा होगी.
कंपनी के काम की होगी समीक्षामेटा अधिकारियों के साथ सरकार की बातचीत के बाद मामले से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी की इन मामलों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी. बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि बताए जाने के बावजूद एआई-जनित हानिकारक सामग्री दोबारा सामने आ जाती है और तेजी से फैलती है. सरकार ने यह भी पूछा कि आईटी नियमों के बावजूद बिना लेबल वाले एआई से तैयार वीडियो मंच पर क्यों बने रहते हैं. सरकार ने ‘कंटेंट मॉडरेशन’ में अधिक मानवीय निगरानी, भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया.
अगले हफ्ते फिर होगी बातचीतसूत्रों ने कहा कि अगले सप्ताह इन मुद्दों पर एक और बैठक होने की संभावना है. इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो दिनों की बैठक में मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल काप्लान की अगुवाई वाली टीम से कंटेंट एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर सवाल किए थे. मेटा ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों को अपने सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि डीपफेक, सीएसएएम और बॉट्स खातों से निपटने के लिए उसके पास समाधान हैं और उन्हें लागू करने की योजना तैयार है. कंपनी ने पहले ‘गंभीर मुद्दों’ को स्वीकार करते हुए लगातार सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया था.
क्या सोशल मीडिया पर लगेगा सेंसरसरकार ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य सेंसरशिप नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना है. साथ ही, कंपनी पर लगातार दबाव बनाए रखा जाएगा कि वह ठोस और निरंतर सुधार करे. मेटा के साथ सरकार की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद बुलाई गई थी. हालांकि, मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट को एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती मानते हुए बहाल कर दिया था और माफी मांगी थी.
About the Authorप्रियंका काण्डपालवरिष्ठ संवाददाता
आज तक से टीवी पत्रकारिता शुरू करने वाली प्रियंका कांडपाल को अब तक तकरीबन 11 साल का अनुभव है. तकरीबन चार साल आज तक में रिपोर्टिंग के साथ एंकरिंग भी कर चुकी हैं. उसके बाद इंडिया टीवी में पांच साल तक काम किया. 201…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 07, 2026, 18:03 IST



