Jaipur News: 53 हजार की भर्ती के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का विरोध,डिग्री इंजीनियरिंग की नौकरी मिली रसोई में

Last Updated:September 07, 2026, 15:54 IST
Jaipur News: राजस्थान में 53 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के बाद अब पोस्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. जयपुर में समाज कल्याण विभाग के करीब 900 चयनित कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि उनसे कार्यालयी काम के बजाय रसोईया और चौकीदार की ड्यूटी करवाई जा रही है. कर्मचारियों का कहना है कि भर्ती के समय ऐसे काम का उल्लेख नहीं था. इनमें बीटेक, एमएससी, पीएचडी और बीएड जैसी उच्च डिग्री वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं.
जयपुर. राजस्थान में हाल ही में हुई करीब 53 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के बाद चयनित कर्मचारियों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. सोमवार को जयपुर में समाज कल्याण विभाग में चतुर्थ श्रेणी पद पर चयनित कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया. कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग की ओर से उन्हें उनकी पोस्टिंग के बाद कार्यालयी कार्य के बजाय रसोईया और चौकीदार का काम सौंपा जा रहा है.
समाज कल्याण विभाग की ओर से करीब 900 चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पोस्टिंग दी गई है. कर्मचारियों का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों में लगाया गया है, जहां उनसे सैकड़ों छात्रों के लिए खाना बनाने और चौकीदारी जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि भर्ती के दौरान उन्हें इस तरह के कार्यों की जानकारी नहीं दी गई थी.
उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों ने कहा- उम्मीद नहीं थी ऐसे काम की
विरोध कर रहे कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो उच्च शिक्षित हैं. इनमें बीटेक डिग्रीधारी इंजीनियर, एमएससी और पीएचडी धारक भी शामिल हैं. कुछ अभ्यर्थियों ने बीएड करने के बाद सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर चतुर्थ श्रेणी की नौकरी स्वीकार की. कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने किसी भी काम को छोटा नहीं समझा, लेकिन भर्ती जिस पद के लिए हुई थी, उससे अलग जिम्मेदारी दिए जाने पर आपत्ति है. कर्मचारियों का तर्क है कि नियमानुसार रसोईया और चौकीदार के पद अलग होते हैं और रसोईया पद के लिए खाना बनाने के अनुभव का प्रमाण पत्र भी मांगा जाता है. ऐसे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से नियमित रूप से रसोईया का काम करवाना उचित नहीं है. कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका पदनाम ‘सहायक कर्मचारी’ किया जाए और अन्य कर्मचारियों की तरह आठ घंटे की ड्यूटी निर्धारित की जाए, साथ ही उन्हें कार्यालयों में सहायक प्रकृति का काम दिया जाए.
उप निदेशक बोले- पदनाम में शामिल था काम, कर्मचारियों ने जताई आपत्ति
मामले में समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक अमित शर्मा से जब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से रसोईया का काम करवाए जाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह कार्य भर्ती के पदनाम में शामिल था. हालांकि, शर्मा के सामने ही कर्मचारियों ने इस बयान पर आपत्ति जताई. कर्मचारियों ने कहा कि अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं और भर्ती के समय उन्हें इस तरह के कार्य की जानकारी नहीं दी गई थी. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 07, 2026, 15:47 IST



