घर के गोबर से तैयार हो रही खाना बनाने की गैस, सिलेंडर पर खर्च का झंझट हुआ कम; देसी जुगाड़ ने खींचा सबका ध्यान

Last Updated:September 22, 2026, 11:04 IST
Gobar Gas Plant: गोबर को अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन सही तकनीक से यही गोबर ऊर्जा का बड़ा स्रोत बन सकता है. बायोगैस प्लांट में गोबर का इस्तेमाल कर गैस तैयार की जाती है, जिसका उपयोग खाना पकाने में किया जा सकता है. इससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है. खास बात यह है कि इस प्रक्रिया से निकलने वाली जैविक खाद का इस्तेमाल खेती में भी किया जा सकता है.
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बाड़मेर. जिस गोबर को कभी बेकार समझा जाता था वही अब ग्रामीण परिवारों के लिए ईंधन का विकल्प बन गया है. गांवों में बायोगैस संयंत्र लगाकर गाय के गोबर से गैस तैयार की जा रही है जिसका इस्तेमाल खाना पकाने में किया जा रहा है. इससे पारंपरिक चूल्हे से निकलने वाले धुएं से होने वाली परेशानी खत्म हो गई है और रसोई के लिए एलपीजी पर निर्भरता भी घट गई है.
कभी जिस चूल्हे के धुएं के बीच ग्रामीण महिलाएं घंटों खाना पकाने को मजबूर थीं अब उसी परेशानी से उन्हें देसी जुगाड़ ने राहत दे दी है. गाय के गोबर को बेकार समझने के बजाय उससे बायोगैस तैयार की जा रही है और इसी गैस पर घर का खाना पक रहा है. खास बात यह है कि इससे न गैस सिलेंडर खरीदने की चिंता है और न ही चूल्हे के धुएं से आंखों में जलन की परेशानी.
बाड़मेर में इन इलाकों में लगे बायोगैस संयंत्रकई परिवार गोबर से बायोगैस तैयार कर इसका इस्तेमाल खाना पकाने में कर रहे हैं. इस देसी तकनीक से जहां रसोई के लिए ईंधन का एक वैकल्पिक साधन मिल रहा है वहीं चूल्हे के धुएं से भी राहत मिल गई है. बाड़मेर जिले के कितनोरिया, धनाऊ, सेड़वा, बाड़मेर, जानपालिया,बाखासर, चौहटन, आलमसर, धोरीमन्ना सहित दर्जनों कस्बों में गाय के गोबर से बायोगैस तैयार करने का संयंत्र लगाए गए है.
टैंक में गोबर और पानी का मिश्रणबायोगैस संयंत्र में गोबर को पानी के साथ मिलाकर एक बंद प्लास्टिक के टैंक में डाला जाता है. ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीव इस मिश्रण को विघटित करते हैं जिससे मुख्य रूप से मीथेन वाली बायोगैस बनती है. गैस को पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचाया जाता है और फिर इसका इस्तेमाल खाना पकाने के लिए किया जाता है.
चूल्हे के धुएं से मिली निजात, अब बायोगैस से बना रही भोजनजानपालिया की संगीता लोकल18 से बातचीत करते हुए बताती है कि पहले जहां लकड़ियों पर धुंए से ऑंखो में जलन व परेशानी होती थी उसके बाद एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों से घर की आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ता था लेकिन अब गाय-भैंस के गोबर से बायोगैस प्लांट लगाया गया है जिससे कम खर्च में सबके के लिए खाना बन जाता है. वे बताते है कि इससे आग लगने या सिलेंडर फटने जैसी घटनाएँ भी नही होती है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Barmer,Rajasthan
First Published :
September 22, 2026, 11:04 IST



