Su-30 MKI, जैगुआर और हॉक को मिलने वाला महाविनाशक बम, पलक झपकते दुश्मन के एयरफील्ड कर देंगे तबाह

भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता अब और मजबूत होने वाली है. रक्षा मंत्रालय ने इंडियन एयरफोर्स के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वीपन्स यानी SAT-SAAW की खरीद के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 810.79 करोड़ रुपये का करार किया है. यह समझौता बुधवार को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह सौदा Buy Indian-IDDM श्रेणी के तहत किया गया है. इसका मतलब है कि हथियार प्रणाली के डिजाइन, विकास और निर्माण में भारतीय क्षमता को प्राथमिकता दी गई है. यह करार रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
क्या है SAT-SAAW?
SAT-SAAW एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है. आसान भाषा में समझें तो इसे लड़ाकू विमान से काफी दूरी से जमीन पर मौजूद महत्वपूर्ण लक्ष्य को सटीक तरीके से निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.
इस हथियार की खासियत इसकी लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज है. यानी इसे दागने वाले विमान को लक्ष्य के बिल्कुल करीब जाकर हमला करने की जरूरत नहीं पड़ती. विमान अपेक्षाकृत दूरी से हथियार को लॉन्च कर सकता है और SAT-SAAW अपने लक्ष्य की ओर ग्लाइड करते हुए हमला करता है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसका इस्तेमाल दुश्मन के एयरफील्ड को निष्क्रिय करने के लिए किया जा सकता है. ऐसे लक्ष्य किसी भी हवाई अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि एयरफील्ड पर हमला होने से वहां तैनात विमानों और हवाई अभियानों की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
जैगुआर, हॉक और Su-30 MKI में होगा फिट
SAT-SAAW को भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किए जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इनमें जैगुआर, हॉक और Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट्स विमान शामिल हैं.
इसका मतलब है कि अलग-अलग प्रकार के विमानों के साथ इस हथियार प्रणाली को जोड़कर अभियान की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सकता है. खास तौर पर लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता वायुसेना को ऐसे मिशनों में अतिरिक्त विकल्प देती है, जहां लक्ष्य के करीब जाना जोखिम बढ़ा सकता है.
SAT-SAAW की एक बड़ी खासियत इसका स्वदेशी डिजाइन और विकास है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश में ही डिजाइन और विकसित किया है. इस हथियार प्रणाली में करीब 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी. इसके अलावा इसमें कई महत्वपूर्ण उप-प्रणालियां भी भारत में विकसित की गई हैं.
एयरफोर्स को कब से मिलेंगे ये घातक बम?
810.79 करोड़ रुपये के इस करार के तहत 160 SAT-SAAW की डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान निर्धारित की गई है. यानी आने वाले वर्षों में इन हथियारों को चरणबद्ध तरीके से भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा.
इन हथियारों के शामिल होने से वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता में इजाफा होने की उम्मीद है. खास तौर पर एयरफील्ड जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए यह क्षमता अहम हो सकती है.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम
यह करार सिर्फ एक हथियार खरीदने का सौदा नहीं है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी डिजाइन, विकास और उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति का भी हिस्सा है. Buy Indian-IDDM श्रेणी में हुए इस सौदे में भारतीय उद्योग और घरेलू तकनीक को प्राथमिकता दी गई है.
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि SAT-SAAW की इंडक्शन से भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी. खास बात यह है कि हथियार प्रणाली के कई अहम हिस्से देश में ही विकसित किए गए हैं, जिससे भविष्य में इसके रखरखाव और उत्पादन क्षमता को भी घरेलू स्तर पर मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
दुश्मन के एयरफील्ड को पलभर में कर देगा तबाह
किसी भी हवाई युद्ध में एयरफील्ड बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाने होते हैं. इन्हीं जगहों से लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं, वापस लौटते हैं और कई जरूरी हवाई अभियान संचालित होते हैं. ऐसे में लंबी दूरी से एयरफील्ड को निशाना बनाने वाली सटीक हथियार प्रणाली वायुसेना के लिए उपयोगी क्षमता प्रदान करती है.
SAT-SAAW की स्टैंड-ऑफ क्षमता का मतलब है कि इसे इस्तेमाल करने वाला विमान लक्ष्य के बेहद नजदीक पहुंचे बिना हमला कर सकता है. इससे अभियान की योजना बनाते समय दूरी और जोखिम दोनों को ध्यान में रखते हुए विकल्प मिलते हैं.



