वैभव सूर्यवंशी से पहले भी आया था धाकड़ बिहारी बल्लेबाज, ऑस्ट्रेलिया का बजा दिया था बैंड, रिकॉर्ड तोड़ रन चेज का हीरो

नई दिल्ली. बिहार उन राज्यो में से है जहां से कभी नेता, अभिनेता और आईएस अधिकारी निकलते थे और आज के दौर में यहां क्रिकेटर्स की भरमार है. वैभव सूर्यवंशी अब बिहार की पहचान बन चुका है मुकेश कुमार आकाशदीप जैसे गेंदबाज भारत के लिए खेल रहे है. पर आपको जानकर हैरानी होगी कि 23 साल पहले एक बिहारी बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया की बखिया उधेड़ दी थी फर्क बस इतना था कि वो तब इंडिया के लिए नहीं इंडीज के लिए खेला था.
2003 में ऐसा ही एक मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था. सामने थी दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में शुमार ऑस्ट्रेलिया और लक्ष्य था ऐसा, जिसे देखकर बड़े-बड़े बल्लेबाजों के भी पसीने छूट जाएं. ऑस्ट्रेलिया ने 418 रन का विशाल लक्ष्य खड़ा किया था. जवाब में वेस्टइंडीज ने ऐसा पलटवार किया कि क्रिकेट की दुनिया हैरान रह गई. इस ऐतिहासिक रन चेज के नायक बने रामनरेश सरवन, जिनकी बल्लेबाजी ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के होश उड़ा दिए. खास बात यह थी कि वेस्टइंडीज की जर्सी में खेलने वाला यह धुरंधर मूल रूप से भारतीय जड़ों से जुड़ा था. उनके पूर्वज बिहार से थे. यानी एक तरह से कहें तो उस दिन एक ‘बिहारी’ ने ऑस्ट्रेलिया पर भारी पड़कर इतिहास रच दिया था.
ऑस्ट्रेलिया ने 417 रन का दिया टारगेट
मुकाबला 9 मार्च 2003 को जोहान्सबर्ग में खेला गया था. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी बल्लेबाजी करते हुए 104 ओवर में 417 रन बनाए. एडम गिलक्रिस्ट ने तूफानी शतक जमाया, जबकि कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी शानदार पारी खेली. ऑस्ट्रेलिया के स्कोर ने मुकाबले को लगभग एकतरफा बना दिया था. वेस्टइंडीज के सामने लक्ष्य था 418 रन. उस दौर में वनडे क्रिकेट में 400 के पार का स्कोर और उसका पीछा करना लगभग असंभव जैसा माना जाता था. लेकिन वेस्टइंडीज ने हार मानने के बजाय इतिहास बदलने का फैसला किया.
बिहारी बाबू सरवन ने बजाया बैंड
वेस्टइंडीज की पारी में क्रिस गेल और रामनरेश सरवन ने शानदार बल्लेबाजी की. सरवन ने बेहद संयम और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया. उन्होंने 47 गेंदों पर 69 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली. उनकी इस पारी ने वेस्टइंडीज को उस रन चेज में मजबूत आधार दिया. हालांकि इस मुकाबले की असली कहानी वेस्टइंडीज के मध्यक्रम और निचले क्रम की जबरदस्त बल्लेबाजी थी. कार्ल हूपर, शिवनारायण चंद्रपॉल और अन्य बल्लेबाजों ने रन गति को बनाए रखा. अंत में विकेटकीपर-बल्लेबाज रिडली जैकब्स ने 49 गेंदों में नाबाद 49 रन बनाकर टीम को ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंचाया.
मैकग्रा से हुई तू-तू,मैं-मैं
उस समय ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा का जादू वर्ल्ड क्रिकेट पर सिर चढ़कर बोल रहा था और उनकी स्लेजिंग की आदत से हर कोई वाकिफ था. सरवन जब बल्लेबाजी के लिए आए तो मैकग्रा ने उनके परिवार और पूर्वजो के लिए अपशब्द कहे जिससे सरवन का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. फिर क्या था सरवन ने अपने शॉट्स का पिटारा खोला और मैकग्रा समेत सभी कंगारू गेंदबाजों की जमकर खबर ली. 139 गेंदों पर 17 चौकों की मदद से सरवन ने 105 रन बनाए और चंद्रपॉल के साथ मैचविनिंग साझेदारी की.
क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत में शामिल
वेस्टइंडीज ने 49.4 ओवर में 418 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हरा दिया. यह उस समय वनडे क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज था. ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ इस तरह 400 से ज्यादा रन का पीछा करना क्रिकेट की दुनिया के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था. इस जीत ने यह भी साबित किया कि क्रिकेट में लक्ष्य कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर विश्वास और बल्लेबाजी का जज्बा हो तो असंभव दिखने वाला पहाड़ भी पार किया जा सकता है.
बिहार से थे सरवन के पूर्वज
रामनरेश सरवन का जन्म गुयाना में हुआ था और उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला. उनके परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी थीं और उनके पूर्वजों के बिहार से होने का उल्लेख भी मिलता है. यही वजह है कि भारत, खासकर बिहार से जुड़े क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सरवन की यह पारी और भी खास बन जाती है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2003 की वह जीत सिर्फ 418 रन के सफल पीछा करने की कहानी नहीं थी. यह उस दौर की वेस्टइंडीज टीम के साहस, आक्रामक क्रिकेट और कभी हार न मानने वाले रवैये की मिसाल थी. और इस कहानी में रामनरेश सरवन का नाम हमेशा याद किया जाएगा.



