पित्त की पथरी से हैं परेशान, तो यहां जानिए क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी

अंबाला: बदलती जीवनशैली, खान-पान में अनियमितता और दिनचर्या में बदलाव के चलते लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं. दरअसल इन्हीं में से एक है पित्त की पथरी है क्योंकि पित्त की पथरी होने पर कई मरीजों को डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं ओर जिसके चलते मरीज और उनके परिजन अक्सर परेशान रहते हैं. हालांकि, अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में आयुर्वेदिक उपचार के बाद मरीजों में काफी सुधार आ रहा हैं. बता दें कि हाल ही में एक मरीज की 14.7 एमएम की पथरी इलाज और खान-पान में बदलाव के बाद जांच में 6.5 एमएम की पाई गई है.
महिलाओं के साथ पुरुषों में भी सामने आ रहे मामले
वही अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने लोकल 18 को बताया कि आजकल पित्त की पथरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. उनके अनुसार, महिलाओं में करीब 40 वर्ष की उम्र के आसपास यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, हालांकि, अब पुरुषों में भी पित्त की पथरी के मामले सामने आ रहे हैं. वहीं डॉ. वर्मा बताते हैं कि बदलती जीवनशैली और खान-पान की अनियमितता इसके पीछे एक कारण हो सकती है.
उन्होंने यह भी बताया कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा को पित्त की पथरी से जुड़े प्रमुख कारकों में माना जाता है. डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि आयुर्वेदिक ओपीडी में पित्त की पथरी को लेकर कई मरीज पहुंचते हैं, इनमें कुछ ऐसे मरीज भी होते हैं, जिन्हें पहले दूसरे अस्पतालों में ऑपरेशन की सलाह दी गई होती है. उन्होंने कहा कि इलाज के साथ खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना भी जरूरी है.
इन चीजों से परहेज की दी जाती है सलाह
उन्होंने बताया कि मरीजों को मैदा, रिफाइंड खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी, बेसन और खटाई जैसी चीजों से परहेज की सलाह दी जाती है और मरीज को आयुर्वेदिक उपाय करना चाहिए, जिसमें मुलेठी, पत्थरचट्टा, वरुण की छाल और नींबू पानी जैसी चीजों का उपयोग किया जा सकता हैं. लेकिन किसी भी औषधि का सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
14.7 एमएम की पथरी घटकर 6.5 एमएम होने का दावा
वही डॉ. वर्मा ने बताया कि कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव का मरीज वर्ष 2024 से आयुर्वेदिक उपचार ले रहा था. उसके पित्ताशय में कई छोटी-बड़ी पथरियां थीं और सबसे बड़ी पथरी करीब 14.7 एमएम की थी. मरीज को दर्द, खट्टी डकार और मुंह में पानी आने जैसी परेशानियां रहती थीं. डॉक्टर के अनुसार, करीब तीन महीने तक उपचार और खान-पान में बदलाव के बाद मरीज को काफी राहत मिली और उसने इलाज बंद कर दिया. बाद में दोबारा दर्द होने पर वह अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लेकर अस्पताल पहुंचा ओर अब नई जांच में बड़ी पथरी का आकार 14.7 एमएम से घटकर 6.5 एमएम पाया गया.
मरीज बोला- कई अस्पतालों में ऑपरेशन की मिली थी सलाह
मरीज अनिल गुप्ता ने बताया कि उन्हें कई पथरियां थीं और वह काफी परेशान रहते थे. इस दौरान उनका परिवार उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में लेकर गया, जहां ऑपरेशन की सलाह दी गई. यहां तक कि उन्होंने पीजीआई में भी इलाज करवाया था ओर फिर बाद में उन्हें अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में आयुर्वेदिक उपचार की जानकारी मिली. उन्होंने बताया कि महज 5 रुपये के कार्ड से इलाज शुरू हुआ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार खान-पान में बदलाव किया गया. अब उन्हें काफी राहत मिली है और जांच में 14.7 एमएम की पथरी 6.5 एमएम ही रह गई हैं.



