Divyang Seva Sansthan: खुद दिव्यांग, लेकिन दूसरों के लिए बने ताकत, झालाराम ने सैकड़ों जिंदगियों को दिखाई नई राह

Last Updated:September 27, 2026, 21:30 IST
Divyang Seva Sansthan: खुद दिव्यांग होने के बावजूद पाली के झालाराम देवासी जोयला ने अपनी लाचारी को ताकत बनाया और दिव्यांग सेवा संस्थान के जरिए सैकड़ों निशक्तजनों की जिंदगी बदल रहे हैं. संस्थान में रहने, खाने और इलाज के साथ दिव्यांगों को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है. ‘सक्षम केबिन’ और ‘जय भवानी किराणा’ जैसी पहल से कई दिव्यांग सम्मान के साथ अपना जीवन चला रहे हैं.
पाली. दर्द वही समझ सकता है, जिसने खुद उस दर्द को सहा हो, जब कोई इंसान खुद शारीरिक लाचारी और सामाजिक उपेक्षा के दौर से गुजरता है, तो दूसरों की बेबसी सीधे उसके दिल को छूती है. संघर्ष की इसी भट्टी में तपकर निकली एक मिसाल हैं पाली के झालाराम देवासी जोयला. खुद दिव्यांग होने के बावजूद झालाराम ने अपनी लाचारी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे हजारों दिव्यांगों और बेसहारा लोगों की ताकत बना दिया. आज वे अपनी कर्मभूमि पाली में ‘दिव्यांग सेवा संस्थान’ के जरिए निशक्तजनों की न सिर्फ देखरेख कर रहे हैं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं.
पाली के चिमनपुरा स्थित ‘दिव्यांग सेवा संस्थान’ आज उन तमाम लोगों के लिए सहारा बना हुआ है, जो कभी खुद को समाज पर बोझ महसूस करते थे. झालाराम जानते थे कि केवल सांत्वना देने से जीवन आसान नहीं होता, दिव्यांगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना सबसे ज्यादा जरूरी है. इसी सोच के साथ उन्होंने संस्थान की नींव रखी. आज इस संस्थान के माध्यम से सैकड़ों निशक्तजनों को नि:शुल्क रहने, खाने और इलाज की सुविधाएं तो मिलती ही हैं, साथ ही उनके कौशल के अनुसार उन्हें काम भी सिखाया जाता है.
‘सक्षम केबिन’ और ‘जय भवानी किराणा’ से मिला रोजगार का संबलसंस्थान ने दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सक्षम केबिन’ जैसी अनूठी पहल शुरू की है. इसके तहत निशक्तजनों को छोटे-छोटे व्यापार शुरू करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं. इसी कड़ी में संस्थान की ओर से ‘जय भवानी किराणा एंड सब्जी भंडार’ जैसे रोजगार मॉडल स्थापित किए गए हैं, जिन्हें खुद दिव्यांगजन ही संभालते हैं. इस पहल ने न केवल उनकी आजीविका की चिंता दूर की है, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी जगाया है कि वे अपने परिवार का पेट खुद पाल सकते हैं.
संस्थान से जुड़कर अपनी जिंदगी बदलने वाले एक दिव्यांग ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए भावुक मन से कहा— “आज मुझे खुद पर गर्व महसूस होता है कि मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं और किसी पर बोझ नहीं हूं. मुझे रोजगार मिला, इसकी सबसे बड़ी खुशी है. यह संस्थान हर गरीब और दिव्यांग का सच्चा सहारा बना है. झालाराम जी अपने से भी ज्यादा निर्धन लोगों को संभाल रहे हैं, वे हमारे लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं. वे हम जैसे भटकते लोगों को सही रास्ते पर लाने का काम कर रहे हैं.”
सरकार से सहयोग की गुहारजमीन से जुड़कर हजारों बेसहारा जिंदगियों में उजाला भरने वाले इस संस्थान की व्यवस्थाएं और जिम्मेदारियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं. संस्थान से जुड़े दिव्यांगों और पाली के प्रबुद्ध नागरिकों ने राज्य सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि ‘दिव्यांग सेवा संस्थान’ को सरकारी योजनाओं के तहत ज्यादा से ज्यादा वित्तीय और ढांचागत योगदान दिया जाए. अगर सरकार का सहयोग मिले, तो झालाराम देवासी की यह मुहिम आने वाले समय में और भी हजारों निशक्तजनों के जीवन को संवार सकती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
September 27, 2026, 21:30 IST



