राजस्थान की रेत में उग रहा चंदन, अलवर के रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी ने दिखाई खेती की नई राह

Last Updated:September 30, 2026, 14:17 IST
राजस्थान के अलवर जिले में एक किसान ने अपनी दूरगामी सोच से पारंपरिक खेती की तस्वीर बदल दी है. दक्षिण भारत के जंगलों में पनपने वाला बहुमूल्य चंदन अब अलवर के खेतों में लहलहा रहा है. रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी रामकृष्ण मीणा के इस सफल प्रयोग ने इलाके के हजारों किसानों के लिए नई राह खोल दी है. उन्होंने महीनों तक चंदन की खेती, उसकी देखभाल और तकनीकों पर रिसर्च की. उन्होंने पारंपरिक गेहूं-सरसों की खेती से हटकर कुछ ऐसा करने की सोची जो आने वाली पीढ़ियों की किस्मत बदल दे.प्रतीकात्मक फोटो.
अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी ने अपनी दूरगामी सोच से पारंपरिक खेती की तस्वीर बदल दी है. कर्मचारी रामकृष्ण मीणा के इस सफल प्रयोग ने इलाके के हजारों किसानों के लिए नई राह खोल दी है. लक्ष्मणगढ़ तहसील के मलावाली गांव के किसान रामकृष्ण मीणा ने करीब 300 चंदन के पौधे लगाए हैं. अब उनके खेत में चंदन के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं. इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से किसान पहुंच रहे हैं.
रामकृष्ण ने चंदन की खेती सीधे शुरू नहीं की. उन्होंने सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच दिल्ली की लैब में कराई. इसके बाद उसी मिट्टी को बेंगलुरु भेजा गया. वहां उस मिट्टी के अनुसार चंदन के पौधे तैयार किए गए. जब पौधे करीब 4 से 5 फीट ऊंचे हो गए तो उन्हें राजस्थान लाकर खेत में लगाया गया. अब पौधे अच्छी तरह बढ़ रहे हैं.
रिटायरमेंट से पहले बना लिया था प्लान
रामकृष्ण ने बताया कि उन्होंने 2023 में सरकारी नौकरी से रिटायर होने से पहले ही चंदन की खेती की तैयारी शुरू कर दी थी. उनका मकसद पारंपरिक खेती से अलग कोई नई संभावना तलाशना था. चंदन की खेती के बारे में जानकारी जुटाने के लिए रामकृष्ण ने यूट्यूब वीडियो देखे और गूगल पर रिसर्च की. पौधों की देखभाल और खेती की तकनीक समझने के बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश से पौधे मंगवाए. अपने खेत में प्रयोग शुरू किया.
रामकृष्ण का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि नई चीजें सीखने के लिए भी किया जा सकता है. उन्होंने इसी माध्यम से चंदन की खेती से जुड़ी जानकारी हासिल की.
अब दूसरे किसानों को भी दे रहे जानकारी
रामकृष्ण के खेत में चंदन की अच्छी ग्रोथ देखकर आसपास के किसानों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. वह दूसरे किसानों को पौधे लगाने और उनकी देखभाल से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं. उनके मुताबिक, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और मालाखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों किसान चंदन के पौधे लगा रहे हैं. आसपास के इलाके में 10 हजार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं.
एक खेत से शुरू हुई नई उम्मीद
आज रामकृष्ण का खेत आसपास के किसानों के लिए चंदन की खेती सीखने और समझने की जगह बन गया है. दूर-दराज के गांवों से किसान यहां पहुंचकर पौधों को देखते हैं और खेती का तरीका समझते हैं. रामकृष्ण का प्रयोग यह दिखाता है कि खेती में बदलाव की शुरुआत एक छोटे से प्रयोग से भी हो सकती है. पारंपरिक खेती के साथ नई संभावनाएं तलाशने की उनकी कोशिश अब दूसरे किसानों को भी कुछ अलग करने के लिए प्रेरित कर रही है.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
Sajan Kumar is a journalist with professional experience in digital news, web journalism, SEO content, copy editing and social media storytelling. He has been working in journalism since 2020 and has worked wit…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
September 30, 2026, 14:17 IST



