सब्जी नहीं संजीवनी है सहजन, एनीमिया से हड्डियों तक में फायदेमंद, वात कफ का काल, आयरन फोलेट कैल्शियम का खजाना

Last Updated:October 04, 2026, 16:45 IST
Moringa Benefits: मुनगा यानी सहजन की फली और इसकी पत्तियां आमतौर पर सब्जी के रूप में खाई जाती हैं लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की गवर्नमेंट आयुर्वेद डिस्पेंसरी जॉनी लाइन की आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर डॉ आस्था मिश्रा ने मुनगे के आयुर्वेदिक गुणों और शरीर के लिए इसके उपयोग के बारे में जानकारी दी.
उन्होंने लोकल 18 को बताया कि मुनगा विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है. इसमें आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी के साथ कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, मुनगे का रस कटु-तिक्त और वीर्य उष्ण माना जाता है. इसके अलावा इसे वात और कफ से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है. पाचन, सूजन, दर्द और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में भी मुनगे का इस्तेमाल किया जाता है.
डॉ. आस्था मिश्रा के मुताबिक, मुनगा विटामिन और मिनरल्स का समृद्ध स्रोत है. इसमें आयरन, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन सी के साथ कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे डाइट में शामिल करना पोषण की दृष्टि से फायदेमंद माना जाता है.मुनगे में आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. डॉ मिश्रा के अनुसार, आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया जैसी स्थिति में मुनगा आहार का हिस्सा हो सकता है.
हालांकि एनीमिया का इलाज केवल मुनगे के सेवन पर निर्भर नहीं करता और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच और उपचार जरूरी है.मुनगा में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. डॉ आस्था मिश्रा ने बताया कि आयुर्वेद में मुनगे का उपयोग हड्डियों से जुड़ी समस्याओं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों में भी किया जाता है.
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आयुर्वेद के अनुसार, मुनगा को शूलहर और शोथहर गुणों वाला बताया गया है. शूल का अर्थ दर्द और शोथ का अर्थ सूजन होता है. शरीर में दर्द या जोड़ों से जुड़ी समस्या में आयुर्वेदिक दृष्टि से मुनगा का उपयोग किया जा सकता है.
डॉ आस्था मिश्रा ने आगे बताया कि मुनगा में दीपन-पाचन गुण माने जाते हैं, यानी यह पाचन क्रिया को बेहतर करने में उपयोगी माना जाता है. जिन लोगों को पाचन से जुड़ी परेशानी रहती है, उनके आहार में मुनगा को शामिल किया जा सकता है. आयुर्वेद में मजबूत पाचन को शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.
आयुर्वेदिक दृष्टि से मुनगा की प्रकृति वात और कफ को संतुलित करने वाली मानी जाती है. इसके अलावा इसके रस को कटु-तिक्त और वीर्य को उष्ण बताया गया है. डॉ मिश्रा के अनुसार, वात और कफ से संबंधित कई समस्याओं में आयुर्वेदिक सलाह के अनुसार मुनगा का प्रयोग किया जा सकता है. डॉ मिश्रा ने मुनगा को एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाला भी बताया है. एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में भूमिका निभाते हैं. इसी वजह से मुनगा पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में कुपोषण और एनीमिया की समस्या को कम करने के उद्देश्य से ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान शुरू किया है. इसके तहत मुनगा यानी सहजन के पौधे बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे हैं और लोगों को मुफ्त में पौधे वितरित किए जा रहे हैं. प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से करीब 7.88 लाख परिवारों को इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य है.
महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के साथ हर आंगनबाड़ी क्षेत्र में मुनगा के पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है. वहीं रायपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाने का महाअभियान चलाया गया. पौधों के रोपण और संरक्षण की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है.
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October 04, 2026, 16:45 IST



