8 साल के बच्चों की जुबान पर गीता के श्लोक, गोयली में दिखा संस्कार का अनोखा रंग

Last Updated:October 05, 2026, 07:18 IST
Sirohi Children Gita Recitation: जिस उम्र में बच्चों की जुबान पर मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया का असर बढ़ रहा है, उसी उम्र में सिरोही के गोयली गांव में बच्चे गीता के श्लोक कंठस्थ कर उनका पाठ करते नजर आए. बीएपीएस के बाल गीता पारायण में 8 से 15 वर्ष के बच्चों ने कृष्ण-अर्जुन की झांकी के जरिए कर्मयोग, सकारात्मक सोच और जीवन में मुश्किलों का सामना करने का संदेश दिया. आयोजकों के मुताबिक यह पहल नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से के साथ आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश है. सिरोही के गोयली गांव में बच्चे गीता के श्लोक कंठस्थ कर उनका पाठ करते नजर आए
सिरोही. आज के मोबाइल और ऑनलाइन गेम के दौर में जहां बच्चों का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है, वहीं सिरोही के गोयली गांव से सामने आई तस्वीर अलग ही कहानी बयां कर रही है. यहां 8 से 15 साल के बच्चे मोबाइल गेम और सोशल मीडिया से दूर श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों का पाठ कर रहे हैं. स्वामीनारायण की बीएपीएस संस्था की ओर से गोयली गांव में दो दिवसीय बाल गीता पारायण का आयोजन किया जा रहा है.
खास बात यह है कि इस आयोजन में गीता का पाठ और उसके संदेश बच्चों की जुबान से सुनने को मिल रहे हैं. कार्यक्रम में बच्चे न केवल गीता के श्लोकों का पारायण कर रहे हैं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद को झांकियों के जरिए भी प्रस्तुत कर रहे हैं. कोई बच्चा श्रीकृष्ण की भूमिका निभा रहा है तो कोई अर्जुन बना है. कुछ बच्चे रथ चलाते और शंख बजाते नजर आते हैं. इन प्रस्तुतियों के जरिए बच्चों को गीता के संदेश और कर्मयोग की सीख से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
झांकियों में दिखाया कुरुक्षेत्र का प्रसंग
गोयली में आयोजित बाल गीता पारायण के दौरान बच्चों ने गीता के अलग-अलग प्रसंगों को झांकियों के रूप में प्रस्तुत किया. मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद को जीवंत किया गया. बच्चों की प्रस्तुति देखकर ऐसा माहौल बना, मानो महाभारत का कुरुक्षेत्र गोयली में ही साकार हो गया हो. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन भी बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंचे. आयोजकों के मुताबिक इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्यों से जोड़ना है. बच्चों को गीता के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि मुश्किल परिस्थितियों में निराश होने के बजाय सकारात्मक सोच के साथ आगे कैसे बढ़ा जाए. असफलता मिलने पर टूटने के बजाय कर्म पर ध्यान देने और आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश भी दिया जा रहा है.
मोबाइल के दौर में गीता की ओर बढ़े बच्चे
कार्यक्रम का सबसे खास पहलू बच्चों का गीता के श्लोकों का सहजता से पाठ करना है. करीब 8 से 15 साल की उम्र के बच्चे संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण करते दिखाई दे रहे हैं. एक 10 वर्षीय बच्चे ने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते…’ श्लोक का पाठ किया. बच्चों की इस तैयारी और आत्मविश्वास ने ग्रामीणों का ध्यान खींचा. बीएपीएस से जुड़े हीरालाल ने बताया कि आयोजन के पीछे बच्चों को जड़ और अपनी संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य है. संस्था की ओर से बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ संस्कार देने पर भी जोर दिया जा रहा है.
बच्चों को संस्कार से जोड़ने की पहल
आयोजकों का कहना है कि बच्चों के जीवन में संस्कार और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए छोटी उम्र से ही उन्हें भारतीय ग्रंथों और उनके संदेशों से जोड़ना जरूरी है. गीता के माध्यम से बच्चों को कर्म, आत्मविश्वास, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की सीख दी जा रही है. गोयली में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की सोच और जीवनशैली को सकारात्मक दिशा देने की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है. मोबाइल और गेमिंग के बढ़ते चलन के बीच बच्चों का गीता के श्लोकों का पाठ करना ग्रामीणों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. आयोजन ने यह संदेश दिया है कि बच्चों को सही दिशा और माहौल मिले तो वे तकनीक और मनोरंजन के साथ अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से भी मजबूती से जुड़ सकते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 05, 2026, 07:18 IST



