Rajasthan

KhatuShyam Ji: बाबा श्याम को चढ़ता है 25 लाख रुपए किलो वाला इत्र, जानिए क्यों खास है ‘रूह गुलाब’

Last Updated:October 06, 2026, 11:19 IST

KhatuShyam Ji: खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम का श्रृंगार बेहद खास तरीके से किया जाता है, यहां फूलों और इत्र से बाबा श्याम को सजाया जाता है. खास बात यह है कि रोजाना शुद्ध रूह गुलाब इत्र चढ़ाया जाता है, जिसकी कीमत 20 से 25 लाख रुपए किलो तक बताई जाती है.

सीकर. जिले में स्थित खाटूश्याम जी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, यहां बाबा श्याम को भगवान श्री श्याम के स्वरूप में पूजा जाता है. खाटूश्याम जी मंदिर में सबसे खास बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार माना जाता है. इस मंदिर में एक दिन में पांच बार आरती होती है और दो बार अलग अलग तरीके का श्रृंगार किया जाता है. बाबा श्याम के श्रृंगार में अन्य देवालयों की तरह कपड़ों या आभूषणों का उपयोग भी होता है बल्कि विशेष रूप से फूलों का उपयोग होता है. श्री श्याम मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष महंत मोहनदास महाराज ने बताया कि बाबा श्याम 56 भोग का नहीं बल्कि खुशबू का भूखा है, इसलिए बाबा श्याम का केवल देश विदेश से मंगवाए गए अलग अलग किस्म के खुशबूदार फूलों का उपयोग किया जाता है.

इसके अलावा बाबा श्याम को रिझाने में इत्र की भी उपयोग किया जाता है, यहीं कारण है कि बाबा श्याम के मंदिर में भक्त गुलाब के फूल और इत्र की सीसी भी लेकर जाते हैं. श्री श्याम मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष महंत मोहनदास महाराज ने बताया कि बाबा श्याम को रोजाना इत्र चढ़ाया जाता है. मुख्य रूप से मंदिर के पुजारियों द्वारा शुद्ध गुलाब के फूलों से बने रूह गुलाब इत्र का लगाया जाता है. यह इत्र दुनिया का सबसे शुद्ध और महंगा इत्र होता है, इसकी सुगंध बाबा श्याम तक ही नहीं मंदिर के गर्भगृह के बाहर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों तक भी पहुंचती है.

25 लाख रुपए किलो तक होती है रूह गुलाब की कीमत

बाबा श्याम के श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाला रूह गुलाब इत्र अपनी खास खुशबू और दुर्लभता के लिए जाना जाता है. यह ताजे गुलाब की पंखुड़ियों से पारंपरिक भाप आसवन विधि से तैयार किया जाता है, इसे 100 प्रतिशत शुद्ध और प्राकृतिक बताया जाता है. इसकी कीमत सुनकर भी लोग हैरान रह जाते हैं. करीब 250 ग्राम रूह गुलाब इत्र की एक छोटी सी सीसी की कीमत लगभग 5 लाख रुपए बताई जाती है. वहीं इसकी कीमत 20 से 25 लाख रुपए प्रति किलो तक है, यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ इत्रों में शामिल किया जाता है.

आलू सिंह महाराज के समय से चली आ रही परम्परा

बाबा श्याम श्रृंगार और इत्र लगाने की परम्परा संत सिरोमणी आलू सिंह महाराज के समय चली आ रही है. मोहनदास महाराज ने बताया कि आलू सिंह महाराज ने ही बाबा श्याम के फूलों से श्रृंगार की परम्परा को शुरुवात की थी. उस समय से अब तक खाटूश्याम जी मंदिर प्रांगण में स्थित श्याम बगीची में फूलों की खेती होती आ रही है. उन्होंने बताया कि संत सिरोमणी आलू सिंह महाराज ने जब बाबा श्याम को कई नहीं जनता था तक घर घर जाकर उनके चमत्कारों का गुणगान किया और भक्तों को खाटूश्याम जी मंदिर आने के लिए प्रेरित किया.

केसर, चंदन और फूलों से बाबा श्याम का श्रृंगार

उन्होंने बताया कि इस आलू सिंह महाराज ने अपना पूरा जीवन बाबा श्याम की सेवा में समर्पित कर दिया था. वे रोजाना दो टाइम केशर, चंदन, फूल और इत्र से बाबा श्याम का श्रृंगार किया करते थे. यही परंपरा आज सैकड़ों सालों से चली आ रही है. आज भी श्याम बगीचे में उगाए गए फूल को बाबा श्याम के चरणों में अर्पित किया जाता है. पुराने समय से बाबा श्याम को विशेष रूप से खीर और चूर में का भोग लगता आ रहा है.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

और पढ़ेंLocation :

Sikar,Rajasthan

First Published :

October 06, 2026, 11:19 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj