15 साल का दर्द खत्म! दिल्ली-कोलकाता में नहीं मिला आराम, पटना में रोबोटिक सर्जरी ने बदली सुमन की जिंदगी

पटना: 15 साल तक कूल्हे के दर्द ने ऐसा बेहाल किया कि चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया. दिल्ली से लेकर कोलकाता तक कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन राहत नहीं मिली. फिर पटना में रोबोटिक सर्जरी हुई और महज 12 घंटे बाद ही अपने पैरों पर खड़े हो गए. इतना ही नहीं, ऑपरेशन के दो दिनों के अंदर ही सीढ़ियों पर भी चढ़ने लगे. दर्दसहित पटना आये धनबाद के सुमन कुमार मिश्रा अब दर्द रहित हो गए हैं.
15 साल तक दर्द झेलने के बाद मिली नई उम्मीद
सुमन कुमार मिश्रा ने लोकल 18 से खास बात करते हुए बताया कि उनके कूल्हे में लंबे समय से दर्द था. उन्होंने कई अस्पतालों में डॉक्टरों से परामर्श लिया. कोलकाता, दिल्ली और बोकारो समेत कई जगहों पर इलाज कराया. जांच के बाद हर जगह से उन्हें कूल्हा प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी गई. इसके बाद उन्होंनेपटना के AIOR सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में डॉ. आशीष सिंह से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और फिर उनसे मिलने पहुंचे. सुमन ने बताया कि 6 तारीख को उनका ऑपरेशन हुआ. सर्जरी के बाद अब वह चल पा रहे हैं और सीढ़ियां भी चढ़ रहे हैं.
रोबोटिक तकनीक से किया गया कूल्हे का प्रत्यारोपण
AIOR सुपर स्पेशियलिटी यूनिट के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि सुमन उनसे वीडियो कंसल्टेशन के माध्यम से जुड़े थे. मरीज की रिपोर्ट और वीडियो देखने के बाद उन्हें आगे की प्रक्रिया समझाई गई. अस्पताल पहुंचने पर भी सर्जरी से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी गई.
उन्होंने बताया कि मरीज का कूल्हा प्रत्यारोपण रोबोटिक तकनीक की मदद से किया गया. इसमें ड्यूल मोबिलिटी कप के साथ इंप्लांट लगाया गया है. जहां ऑपरेशन के लगभग 12 घंटे के भीतर मरीज को खड़ा किया गया. वहीं, सर्जरी के दूसरे दिन वह बिना सहारे चलने और सीढ़ियां चढ़ने लगे. उन्होंने आगे बताया कि रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट में सटीकता, कम दर्द और तेजी से रिकवरी जैसे फायदे मिलते हैं.
कम उम्र में भी खराब हो सकता है कूल्हा
डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि कम उम्र के लोगों में भी कूल्हे की समस्या गंभीर रूप ले सकती है. सुमन के मामले में उन्होंने एवैस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) की समस्या का जिक्र किया. इस स्थिति में कूल्हे की हड्डी के बॉल वाले हिस्से तक पर्याप्त रक्त आपूर्ति नहीं पहुंचने से हड्डी के टिश्यू क्षतिग्रस्त होने लगते हैं. इस बीमारी के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं. इनमें लंबे समय तक या अनुचित तरीके से स्टेरॉयड का इस्तेमाल, अत्यधिक शराब का सेवन, सिकल सेल रोग और चोट शामिल हैं. हालांकि, सुमन ना तो शराब पीते थे और ना ही स्टेरॉयड का सेवन करते थे. इसके बावजूद भी यह समस्या हुई. कई मामलों में बीमारी का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता है.
इंप्लांट के बाद सावधानियां भी हैं जरूरी
डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि मरीज के लिए आधुनिक तकनीक और इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया है. जो वर्ल्ड क्लास है. इंप्लांट की संभावित अवधि भी 35 वर्ष है. उन्होंने यह भी कहा कि कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सावधानियां बरतनी चाहिए. खासकर जमीन पर बैठने और पालथी मारकर बैठने से बचना चाहिए.
इस रोबोट से हुआ सर्जरी
सुमन की सर्जरी स्ट्राइकर मैको टेक्नोलॉजी से हुआ है. यह दुनिया का फर्स्ट और अबतक का बेस्ट सिटी बेस्ड रोबोट है. यह स्मार्ट रोबोटिक तकनीक के नाम से जाना जाता है. इसमें कॉम्प्लेक्स केस को भी बहुत ही आसानी से सफल बना दिया जाता है. उनका दावा है कि यह तकनीक अमेरिका और विकसित देशों के कई सेंटर में इस्तेमाल हो रही है. हिप का रिप्लेसेंट अबतक सिर्फ इसी रोबोट की मदद से किया जाता है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुल्हा का रिप्लेसमेंट सिर्फ मैको स्ट्राइकर रोबोट से ही संभव है. अभी दूसरा ऐसा कोई रोबोट नहीं विकसित हुआ है. जो यह काम कर सके. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 6 सालों में उन्होंने करीब 3500 से ज्यादा रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को सफल बनाया है और अभी भी यह सिलसिला जारी है.



