9 साल का सूखा खत्म…डरबन में मैट रेनशॉ की ऐतिहासिक सेंचुरी, साबित हो सकती है करियर का टर्निंग पॉइंट

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर कई पारियां ऐसी खेली जाती हैं जो सिर्फ स्कोरबोर्ड पर रन नहीं जोड़तीं, बल्कि खिलाड़ी के संघर्ष, उसके जज्बे और कभी हार न मानने वाले जुनून की कहानी कहती हैं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन के मैदान पर मैट रेनशॉ ने कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है. ऑस्ट्रेलिया की टीम जब संकट के भंवर में फंसी हुई थी, तब रेनशॉ ने अपने करियर की सबसे यादगार और बेहतरीन पारियों में से एक खेलकर यह साबित कर दिया कि क्लास कभी खत्म नहीं होती, बस वापसी के लिए सही मंच की जरूरत होती है.
मैट रेनशॉ (Matt Renshaw) की स्टोरी भी किसी परीकथा से कम नहीं है. रेनशॉ लंबे समय तक ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम से बाहर चल रहे थे. साल 2017 के बाद उनके बल्ले से कोई टेस्ट शतक नहीं निकला था और लगातार तीन साल तक टेस्ट टीम का हिस्सा न बन पाना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को झकझोर सकता है. लेकिन कहते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है. जब ऑस्ट्रेलिया की टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन में उतरी, तो परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं.
शुरुआती झटकों से संकट में फंसी ऑस्ट्रेलियाई टीममैच की शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. स्कोरबोर्ड पर महज 84 रन टंगे थे और टीम के चार मुख्य बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे. निक मैडिनसन बिना खाता खोले पवेलियन लौटे, ट्रेविस हेड 9 रन बनाकर आउट हुए, मार्नस लाबुशेन ने 37 रन का योगदान दिया और अनुभवी स्टीव स्मिथ 25 रन बनाकर चलते बने. ऑस्ट्रेलिया की आधी टीम 124 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट चुकी थी और ऐसा लग रहा था कि मेहमान टीम पहली पारी में सस्ते में सिमट जाएगी.
मैट रेनशॉ की 190 रनों की मैराथन पारीऐसे मुश्किल वक्त में मैट रेनशॉ दीवार बनकर क्रीज पर डट गए. एक छोर से विकेट गिरने का सिलसिला जारी था, लेकिन रेनशॉ ने दक्षिण अफ्रीका के घातक गेंदबाजी आक्रमण के आगे अपने डिफेंस का लोहा मनवाया. उन्होंने एक छोर को पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया. इस पारी की सबसे बड़ी खासियत उनका संयम और मानसिक दृढ़ता थी. रेनशॉ ने 397 गेंदों का सामना करते हुए 190 रनों की मैराथन पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 21 शानदार चौके और 1 छक्का निकला. उनका स्ट्राइक रेट भले ही 47.86 का रहा हो, लेकिन उस पिच पर यह पारी किसी दोहरे शतक से कम नहीं थी.
निचले क्रम का साथ और ऑस्ट्रेलिया का विशाल स्कोररेनशॉ को दूसरे छोर से बल्लेबाजों का साथ तो नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपनी जिद से स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचा दिया. एलेक्स कैरी ने 14 रन बनाए, ब्यू वेबस्टर ने 4 रन जोड़े, जबकि कप्तान पैट कमिंस ने 98 गेंदों पर 43 रनों की बहुमूल्य पारी खेलकर रेनशॉ का अच्छा साथ निभाया. मिचेल स्टार्क ने 6 रन बनाए, वहीं नाथन लियोन ने 92 गेंदों का सामना करते हुए 27 रन जोड़े और जोश हेजलवुड 5 रन बनाकर नाबाद रहे. इन छोटी-छोटी साझेदारियों के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 137.2 ओवरों में 390 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया.
दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की कड़ी परीक्षादक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने पूरी ताकत झोंक दी थी. मार्को जानसेन ने घातक गेंदबाजी करते हुए 31 ओवरों में 68 रन देकर 3 विकेट चटकाए. वियान मुल्डर ने सबसे ज्यादा 4 विकेट हासिल किए और 27 ओवरों में 68 रन खर्च किए. तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे ने भी 28 ओवरों में 88 रन देकर 2 सफलताएं अपने नाम कीं. स्पिनर साइमन हार्मर ने 28.2 ओवरों में 68 रन खर्च करके 1 विकेट लिया, जबकि केशव महाराज और एडेन मार्कम को कोई सफलता हाथ नहीं लगी. साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की इस चौकड़ी ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा ली, लेकिन मैट रेनशॉ ने इन सभी गेंदबाजों का डटकर मुकाबला किया.
करियर का टर्निंग पॉइंट और यादगार वापसीयह 190 रनों की पारी मैट रेनशॉ के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है. तीन साल का वनवास और वर्षों का सूखा खत्म करते हुए उन्होंने जिस अंदाज में वापसी की है, वह क्रिकेट इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है. जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उन्होंने घर से दूर साउथ अफ्रीका की मुश्किल पिचों पर अपनी तकनीक और मानसिक क्षमता का जो प्रदर्शन किया, उसे क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल पाएंगे. यह पारी सिर्फ रनों का अंबार नहीं थी, बल्कि यह हार ना मानने की जिद और खुद पर अटूट विश्वास की एक जीती-जागती मिसाल थी.



