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आपकी पसंद से लेकर रिश्तों तक पर नजर रख सकता है Meta का Muse AI, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मेटा का Muse AI असिस्टेंट सिर्फ सवालों के जवाब देने या रोजमर्रा के काम आसान बनाने तक सीमित नहीं है. यह यूजर्स की चैट, ईमेल और Instagram से जुड़ी जानकारी के आधार पर उनकी पसंद, आदतों और सामाजिक रिश्तों की विस्तृत प्रोफाइल भी तैयार कर सकता है. टाइम की एक रिपोर्ट में Muse के इंटरनल निर्देशों का विश्लेषण किया गया है, जिससे AI की प्राइवेसी और पर्सनल डेटा को लेकर नए सवाल उठे हैं.

Muse को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह किराने का सामान खरीदने और सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने जैसे कामों में मदद कर सके. लेकिन इसके लिए यह यूजर के बारे में लगातार जानकारी इकट्ठा और उसका विश्लेषण भी कर सकता है.

हर घंटे अपडेट होती है यूजर की प्रोफाइल

TIME की रिपोर्ट के मुताबिक, Muse अपने यूजर की प्रोफाइल को हर घंटे अपडेट करता है. इसके लिए यह चैट, मैसेज और उन ईमेल से जानकारी ले सकता है, जिन तक इसे पहुंच मिली है. यह सिस्टम सिर्फ यूजर की पसंद और रुचियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे लोगों के साथ उसके रिश्तों को भी समझने की कोशिश करता है.

इस प्रोफाइल में यह जानकारी शामिल हो सकती है कि यूजर किसी व्यक्ति से कैसे मिला, दोनों की पसंद क्या है, उनके बीच पहले कभी मतभेद हुए हैं या उनके रिश्ते में तनाव अथवा आपसी सहयोग कैसा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, Muse यूजर के उन लक्ष्यों का भी अनुमान लगा सकता है, जिन्हें उसने सीधे तौर पर नहीं बताया. यह सिस्टम यह भी समझने की कोशिश करता है कि किस तरह के मैसेज या रिमाइंडर यूजर पर ज्यादा असर डाल सकते हैं. उदाहरण के लिए, इसके इंटरनल निर्देशों में रात 10 बजे के बाद छोटे मैसेज भेजने जैसे सुझाव का जिक्र है. इसके अलावा, AI दिनभर की बातचीत का रात में भी विश्लेषण करता है.

इसका एक और पहलू यह है कि बातचीत में जिन लोगों का जिक्र होता है, उनकी जानकारी भी प्रोफाइलिंग का हिस्सा बन सकती है, भले ही उन्होंने खुद Muse का इस्तेमाल न किया हो.

मेटा ने क्या सफाई दी?

मेटा ने TIME की रिपोर्ट में सामने आई जानकारी को खारिज नहीं किया. कंपनी का कहना है कि Muse उन जानकारियों को याद रखता है, जिन्हें यूजर खुद शेयर करते हैं, ताकि वह आगे ज्यादा उपयोगी जवाब और मदद दे सके.

रिपोर्ट के मुताबिक, Muse को अब तक 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और रिलीज के बाद यह अमेरिका के App Store पर नंबर-1 स्थान तक पहुंचा. मेटा हर Muse असिस्टेंट को अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में एक अलग वर्चुअल मशीन पर चलाता है. यूजर्स अपनी Muse फाइलों की कॉपी एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं.

कंपनी का दावा है कि यूजर का यह डेटा उसके विज्ञापन सिस्टम या दूसरे Muse एजेंट्स के साथ शेयर नहीं किया जाता. हालांकि, प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए AI के अनुभवों से मिली कुछ जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें यह समझना भी शामिल है कि किस तरह के रिमाइंडर ज्यादा प्रभावी होते हैं. मेटा के अनुसार, ऐसी जानकारी इस्तेमाल करने से पहले पहचान बताने वाले विवरण हटा दिए जाते हैं.

Muse से जानकारी डिलीट करने पर क्या होगा?

मेटा का कहना है कि यूजर्स Muse को किसी खास जानकारी को भूलने के लिए कह सकते हैं. लेकिन TIME की जांच में सामने आया कि किसी जानकारी को भूलने के लिए कहने से उससे जुड़ा मूल मैसेज जरूरी नहीं कि डिलीट हो जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, Muse के इंटरनल निर्देशों में यूजर को इस अंतर के बारे में प्रमुखता से न बताने की बात भी शामिल है.

मेटा ने इस साल के आखिर में ऐसे एन्क्रिप्शन की सुविधा लाने की योजना बताई है, जिससे कंपनी भी Muse के डेटा को एक्सेस नहीं कर सकेगी. फिलहाल यह सुरक्षा उपलब्ध नहीं है. यूजर्स अभी Muse के फाइल ब्राउजर के जरिए अपनी फाइलें और सेशन लॉग देख सकते हैं.

इस रिपोर्ट के बाद AI असिस्टेंट की सुविधा और प्राइवेसी के बीच संतुलन पर बहस तेज हो सकती है. AI जितना ज्यादा पर्सनल संदर्भ याद रखेगा, उतनी ही जरूरी यह स्पष्टता होगी कि कौन-सी जानकारी सेव होती है, कितने समय तक रहती है और उसे पूरी तरह डिलीट कैसे किया जा सकता है.

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