जवाहर कला केंद्र में छाया सहारनपुर का फर्नीचर, लकड़ी की नक्काशी कारीगरी बनी आकर्षण का केंद्र

Last Updated:October 12, 2026, 14:00 IST
Jawahar Kala Kendra Jaipur: जयपुर के जवाहर कला केंद्र में स्वदेशी आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर चल रहा हैं जहां उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कारीगर अपने बेहतरीन और फेमस सहारनपुर फर्नीचर को लेकर पहुंचे हैं, जिनकी फेस्टिवल सीजन ही नहीं बल्कि जयपुर में पूरे सालभर डिमांड रहती हैं.
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जयपुर: जयपुर अपनी हैंडलूम, हैंडमेड और हस्तकला के प्रोडक्ट्स के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. इसलिए यहां हर शहर की हस्तकला को लोग खूब पसंद करते हैं. ख़ासतौर दिपावली के फेस्टिवल सीजन से पहले जयपुर में हैंडिक्राफ्ट, शिल्पकला और फर्नीचर की खूब डिमांड रहती हैं इसलिए दिपावली के फेस्टिवल सीजन से पहले जयपुर में भारत के अलग-अलग शहरों से कारीगर अपने खास प्रोडक्ट्स को लेकर यहां पहुंचते हैं ऐसे जयपुर के जवाहर कला केंद्र में स्वदेशी आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर चल रहा हैं जहां उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कारीगर अपने बेहतरीन और फेमस सहारनपुर फर्नीचर को लेकर पहुंचे हैं जिनकी फेस्टिवल सीजन ही नहीं बल्कि जयपुर में पूरे सालभर डिमांड रहती हैं.
लोकल-18 ने सहारनपुर से आए फर्नीचर कारीगरों से सहारनपुर फर्नीचर की सुंदरता, मैकिंग और क़ीमत को लेकर बात की तो कारीगर राहुल कुमार बताते हैं कि सहारनपुर के फर्नीचर की सबसे खास बात होती हैं छोटे से लेकर बड़े फर्नीचर को पूरी तरह हाथों से तैयार किया जाता हैं. इसलिए सहारनपुर फर्नीचर सबसे सुंदर और मजबूत फर्नीचर के मामले में पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं. सहारनपुर फर्नीचर में होम डेकोर, किचन, गार्डेनिंग, आउटडोर और इनडोर के रूप में उपयोग होने वाले सभी प्रकार के फर्नीचर तैयार होते हैं जिनकी फेस्टिवल सीजन में सबसे ज्यादा डिमांड रहती हैं.
शीशम, चंदन की महंगी लकड़ी से तैयार होता हैं सहारनपुर फर्नीचरलोकल-18 से बात करते हुए सहारनपुर फर्नीचर के कारीगर बताते हैं आम फर्नीचर जो बाजारों में मिलते हैं वह अलग-अलग लकड़ियों से तैयार होते हैं और कुछ फर्नीचर तो लकड़ी के बुरादे से तैयार होते हैं लेकिन सहारनपुर फर्नीचर की सबसे खास बात यह होती हैं कि फर्नीचर में छोटे से लेकर बड़े फर्नीचरों पर शीशम, चंदन और सागौन जैसी अलग-अलग पेड़ों की मजबूत और महंगी लकड़ी से फर्नीचर तैयार किया जाता हैं. जिसमें हर फर्नीचर में पर बेहद बारिकी से काम किया जाता हैं. फर्नीचर में सुंदरता के साथ साथ मजबूती होती हैं. फर्नीचर तैयार करने से पहले फर्नीचर के लिए लड़की को तैयार करने में ही 2-3 साल का समय लगता हैं क्योंकि गीली लकड़ियों को सुखाया जाता हैं जिसके बाद लकड़ी पर कटिंग से लेकर नक्काशी, पॉलिशिंग का बिल्कुल बारिकी से काम होता हैं और जाकर फिर फर्नीचर तैयार होता हैं. साथ ही सहारनपुर फर्नीचर तैयार करने के लिए लकड़ियों की कीमत ही लाखों में होती हैं इसलिए लकड़ी का एक टुकड़ा भी वेस्ट नहीं किया जाता उसका उपयोग किसी न किसी फर्नीचर में कर किया जाता हैं.
जयपुर में सबसे ज्यादा सहारनपुर फर्नीचर की डिमांडलोकल-18 से बात करते हैं हुए राहुल बताते हैं कि जयपुर के लोगों में सहारनपुर फर्नीचर की खूब डिमांड रहती हैं यहां लोग कीमत से कीमत फर्नीचर खरीदते हैं इसलिए हम 500 रूपए से लेकर 50 हजार रुपए तक के फर्नीचर लेकर व्यापारी जयपुर आते हैं ख़ासतौर दिपावली के पहले सहारनपुर फर्नीचर की सबसे ज्यादा डिमांड रहती हैं क्योंकि लोग दिपावली की साफ-सफाई के साथ घर नया फर्नीचर भी बसाते हैं इसलिए जयपुर में दिपावली से पहले सहारनपुर फर्नीचर की जमकर डिमांड रहती हैं. इन फर्नीचर में बड़े-बड़े झूले, टेबल-कुर्सिया, सुंदर ड्रेसिंग टेबल, सोफे, फ्लावर पोर्ट जैसे फर्नीचर की सबसे ज्यादा डिमांड रहती हैं, इसके अलावा लोग गिफ्ट आइटम के रूप में भी सहारनपुर फर्नीचर के प्रोडक्ट्स को खूब खरीदते हैं. क्योंकि हर जगह लोग सहारनपुर का फर्नीचर तैयार नहीं कर सकते क्योंकि इसके बनने वाली फर्नीचर की लकड़ियों से लेकर फिनिशिंग और बारिक डिजाइन का काम सहारनपुर में ही होता हैं क्योंकि वहां पीढ़ी दर पीढ़ी लोग वर्षों से सहारनपुर फर्नीचर माहिर कारीगर हैं. जिसके चलते ऐसा सहारनपुर जैसा फर्नीचर कही नहीं बनाया जा सकता.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
October 12, 2026, 13:51 IST



