Mustard Farming Tips: क्या हैं रायड़े की बुवाई का सही समय और उन्नत किस्में, बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये कृषि तरीके

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रायड़े की बंपर पैदावार चाहिए तो बुवाई से पहले जान लें ये जरूरी कृषि टिप्स
Last Updated:October 23, 2026, 10:04 IST
Mustard farming and sowing time guide: राजस्थान के नागौर जिले में रबी सीजन के दौरान रायड़े (सरसों) की बुवाई का काम अक्टूबर महीने में प्रमुखता से किया जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रायड़े की बुवाई के लिए 10 से 25 अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. अच्छी पैदावार पाने के लिए किसानों को खेत की सही तैयारी, पर्याप्त नमी और आरएच-749, गिरिराज जैसी उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. कतार में बुवाई करने और समय पर सिंचाई व खाद प्रबंधन अपनाने से किसानों को बंपर मुनाफा मिल सकता है.
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नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में रबी सीजन के दौरान रायड़े (सरसों) की बुवाई का कार्य अक्टूबर महीने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रायड़े की बेहतरीन और बंपर पैदावार लेने के लिए किसानों को बुवाई के सही समय, उन्नत बीजों के चयन और खेत की उचित तैयारी पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि रायड़े की बुवाई के लिए 10 से 25 अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. हालांकि, बुवाई का सटीक समय स्थानीय मौसम, मिट्टी की नमी और चुनी जाने वाली किस्म पर भी निर्भर करता है.
रायड़े की स्वस्थ और मजबूत फसल के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करना बेहद जरूरी होता है. खेत को अच्छी तरह भुरभुरा बनाकर समतल कर लेना चाहिए, ताकि सिंचाई के दौरान खेत में पानी समान रूप से फैल सके. बुवाई के समय खेत की मिट्टी में पर्याप्त नमी होना अनिवार्य है. यदि मिट्टी में नमी की कमी रहती है, तो बीज का अंकुरण बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे खेत में पौधों की संख्या कम रह जाती है. किसानों को हमेशा बुवाई से पहले मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जांच कर खेत तैयार करना चाहिए और केवल प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का ही चयन करना चाहिए.
इन उन्नत किस्मों का कर सकते हैं चयनकृषि एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, नागौर जिले की स्थानीय जलवायु और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को रायड़े की उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. किसान भाई आरएच-749, गिरिराज और आरजीएन-73 जैसी बेहतरीन किस्मों पर विचार कर सकते हैं. इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां आरजीएन-298 जैसी किस्म के बारे में कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली जा सकती है. किसी भी किस्म का चयन करते समय उसकी क्षेत्रीय अनुकूलता, पकने की अवधि, सिंचाई की कुल आवश्यकता और रोगों के प्रति सहनशीलता को जरूर जांचना चाहिए. बीज खरीदते समय उसकी प्रामाणिकता और पैकेट पर दी गई जानकारियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए.
कतार में बुवाई और सिंचाई प्रबंधन के फायदेयुवा उन्नत किसान अर्जुन चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि रायड़े की फसल में उचित दूरी पर बुवाई करना भी बंपर पैदावार के लिए बहुत जरूरी है. सामान्य तौर पर कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखनी चाहिए और बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोना चाहिए. बहुत अधिक गहराई पर बीज डालने से उसका अंकुरण रुक सकता है. कतार में बुवाई करने से खेतों में पौधों की संख्या व्यवस्थित रहती है और निराई-गुड़ाई सहित फसल की देखभाल करना आसान हो जाता है. इसके अलावा, फसल में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करना आवश्यक है, विशेषकर फूल आने और फलियां बनते समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए. संतुलित खाद और उर्वरक प्रबंधन से पौधों की बढ़वार बेहतरीन होती है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद मिलती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 23, 2026, 10:04 IST



