Rajasthan

Jhunjhunu News: अब खाद के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन, खरीदने से पहले पढ़ लें

झुंझुनूं. रबी सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है. इसके तहत अब जिलों में खाद का आवंटन कृषि विभाग तय करेगा. पिछले चार वर्षों की औसत बुवाई और खाद की खपत के आधार पर जिलेवार कोटा निर्धारित किया जाएगा. साथ ही सहकारी समितियों को खाद वितरण में प्राथमिकता मिलेगी. नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद की उपलब्धता में संतुलन बनाए रखना और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना है.

नई गाइडलाइन में निजी विक्रेताओं की ओर से खाद के साथ अन्य कृषि उत्पाद खरीदने की बाध्यता पर भी रोक लगाई गई है. अब दुकानदार किसानों को डीएपी या अन्य खाद के साथ बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स अथवा दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कंपनी, अधिकारी, वितरक या विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. दरअसल, रबी की बुवाई से पहले कई स्थानों पर सहकारी समितियों के केंद्रों पर डीएपी का स्टॉक खत्म होने और निजी दुकानों पर खाद के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने की शर्तें रखे जाने की शिकायतें सामने आई थीं. ऐसे में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है.

अब कंपनियां मनमाने ढंग से नहीं कर सकेंगी खाद का आवंटननई व्यवस्था के तहत खाद कंपनियां अपनी मर्जी से किसी जिले, सहकारी संस्था या डीलर को खाद का आवंटन घटा-बढ़ा नहीं सकेंगी. कंपनियों को कृषि विभाग की ओर से तैयार जिलेवार योजना के अनुसार ही खाद की आपूर्ति करनी होगी. आवंटन में बदलाव के लिए विभाग के सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी. इससे खाद की उपलब्धता को जिलों की वास्तविक जरूरत के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही किसी क्षेत्र में जरूरत से कम और किसी अन्य क्षेत्र में अधिक खाद पहुंचने जैसी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा.

सहकारी समितियों को प्राथमिकता, मांग के अनुसार होगा वितरणखाद आवंटन में प्राथमिक कृषि साख समितियों (पीएसीएस) और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (केवीएसएस) को प्राथमिकता दी जाएगी. इन संस्थाओं की वास्तविक मांग को ध्यान में रखते हुए खाद का आवंटन किया जाएगा. कृषि और सहकारिता विभाग मिलकर फसल चक्र, मौसमी जरूरत और जिलों से प्राप्त मांग के आधार पर खाद की उपलब्धता की योजना तैयार करेंगे. इस व्यवस्था से किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से सरकारी दरों पर खाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. साथ ही खाद की मांग और उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद मिलेगी.

स्टॉक से लेकर आपूर्ति तक होगी निगरानीनई गाइडलाइन के तहत खाद कंपनियों को खाद की रवानगी, रैक की आवाजाही, जिलेवार आपूर्ति, डीलर एवं संस्थानवार आवंटन और स्टॉक की स्थिति की जानकारी कृषि विभाग को समय पर देनी होगी. इससे विभाग को पता रहेगा कि किस जिले में कितना खाद उपलब्ध है और कहां अतिरिक्त आपूर्ति की जरूरत है. यदि किसी क्षेत्र में खाद की कमी या वितरण में असंतुलन सामने आता है तो समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे. निजी दुकानों के स्टॉक पर भी निगरानी रखी जाएगी, ताकि खाद की उपलब्धता और वितरण में पारदर्शिता बनी रहे.

खाद के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने की बाध्यता नहींनई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि खाद की बिक्री को किसी अन्य कृषि उत्पाद की खरीद से नहीं जोड़ा जा सकेगा. किसान अपनी जरूरत के अनुसार केवल खाद खरीद सकेंगे. उन्हें इसके साथ बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स या बायो प्रोडक्ट खरीदने के लिए बाध्य करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. इसके अलावा खाद की अनधिकृत आपूर्ति, आवंटन में मनमाना बदलाव, निर्धारित क्षेत्र के बजाय दूसरे क्षेत्र में खाद भेजने और चुनिंदा विक्रेताओं को अनुचित तरीके से आपूर्ति करने जैसे मामलों पर भी विभाग नजर रखेगा. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी.

निजी स्टॉक पर रहेगी कड़ी निगरानीखाद कंपनियों को अपने अधिकारियों, मार्केटिंग कर्मचारियों, वितरकों, थोक विक्रेताओं और अधिकृत डीलरों तक इन निर्देशों की जानकारी पहुंचाने के लिए भी कहा गया है. डॉ. मोहनलाल दादरवाल, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग ने बताया कि सरकार की नई गाइडलाइन के तहत खाद आवंटन में सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता मिलेगी. निजी दुकानों के स्टॉक पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. विक्रेता किसानों को खाद के साथ कीटनाशक, बीज या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे.

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