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Eye Care Tips I सर्दियों में आंखों को लेकर रहें अलर्ट, जरा-सी लापरवाही बढ़ा सकती है ड्राई आई की परेशानी

पाली. सर्दियों की सुहानी धूप, हल्की गुलाबी ठंड और सुहाना मौसम किसे पसंद नहीं होता? लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खूबसूरत मौसम अपने साथ हमारी आंखों के लिए कुछ बड़ी चुनौतियां भी लेकर आता है? सर्दियों की हवा में जब नमी कम होती है, तो हमारी आंखें सूखी पड़ने लगती हैं और जलन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इतना ही नहीं, डिजिटल दौर में हमारे मासूम बच्चों की आंखों पर मोबाइल और गैजेट्स का पहरा दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है, इसलिए इस मौसम में विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत होती है. जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौहान ने सर्दियों में आंखों की सेहत को लेकर कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. डॉ. चौहान के अनुसार, मौसम में बदलाव का सीधा असर हमारी आंखों पर पड़ता है, जिससे सर्दियों में विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत होती है.

डॉ. अरविंद चौहान बताते हैं कि सर्दियों के दिनों में हवा में नमी कम हो जाती है, जिसके कारण ड्राई आई (आंखों का सूखापन) के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होता है. इसके अलावा, बुजुर्गों और छोटे बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याएं आम दिनों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलती हैं. एक दिलचस्प बात यह भी है कि लोग अक्सर सर्दियों के मौसम को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए सबसे बेहतरीन मानते हैं, इसलिए इस दौरान सर्जरी कराने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है.

मासूमों की नजरों पर डिजिटल स्क्रीन का पहराआज के दौर में बच्चों का जीवन किताबों से निकलकर मोबाइल और गैजेट्स की स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है. डॉक्टर चौहान ने चिंता जताई है कि बच्चों द्वारा अत्यधिक मोबाइल चलाने, धूल-मिट्टी के संपर्क में रहने और स्क्रीन टाइम बढ़ने से उनकी नाजुक आंखों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है.

मोतियाबिंद के उन्नत ऑपरेशनकाला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) का समय पर इलाजडायबिटीज के मरीजों के आंखों के पर्दों (रेटिना) की विशेष जांचछोटे बच्चों में भेंगापन (स्क्विंट) की समस्या का सटीक समाधान

आंखों को स्वस्थ रखने के आसान और कारगर उपायपौष्टिक आहार लें: अपनी दैनिक डाइट में हरी सब्जियां, फल और विटामिन युक्त आहार को शामिल करें, जो आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद हैं.

धूल-मिट्टी से बचाव: सर्दियों की ठंडी हवा और धूल-मिट्टी से आंखों को बचाएं. बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें.

खुद न बनें डॉक्टर: बिना किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) की सलाह के मेडिकल स्टोर या काउंटर से सीधे जाकर कभी भी आंखों में डालने वाली दवा (आई ड्रॉप) न खरीदें.

सुरक्षित इलाज अपनाएं: हमेशा किसी प्रशिक्षित डॉक्टर को दिखाने के बाद ही आंखों में कोई भी दवा या ड्रॉप्स डालें, ताकि किसी भी बड़े नुकसान से बचा जा सके.

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