Sirohi Garasia Tribe Tradition | Clothes Name Writing

Last Updated:October 30, 2026, 18:02 IST
Rajasthan Tripe Unique Tradition : राजस्थान के सिरोही जिले की गरासिया जनजाति में महिलाएं अपनी पारंपरिक पोशाक झुलकी और पोलका पर खुद का और परिवार के सदस्यों का नाम लिखवाती हैं. यह अनोखी परंपरा उनके पहनावे और संस्कृति को खास पहचान देती है. कई जगहों पर ऐसे दर्जी मिलते हैं, जिन्हें गरासिया समाज के पारंपरिक कपड़े सिलने और उन पर नाम बनाने का खासा अनुभव होता है. इस काम में समय और मेहनत लगती है, इसलिए कपड़ों की सिलाई और सजावट भी खास मानी जाती है.
राजस्थान के सिरोही और आसपास के जिलों में बसी गरासिया जनजाति में आज भी कई अनोखी परंपराएं निभाई जा रही है. इन्हीं में से एक परम्परा है महिलाओं की ओर से अपनी पारंपरिक पोशाक पर खुद का नाम और परिवार के सदस्यों का नाम लिखवाना. गरासिया समाज की महिलाएं अपनी खास ड्रेस झुलकी और पोलका पर नाम लिखवाती हैं. यह परंपरा उनके पहनावे को खास बनाती है और समाज की संस्कृति को भी दिखाती है.
गरासिया समाज के भावाराम गरासिया ने बताया कि समाज में कपड़ों पर नाम लिखवाने के पीछे परिवार के लिए प्यार और सम्मान की भावना जुड़ी हुई है. विवाहित महिलाएं अपनी झुलकी पर अपने नाम के साथ पति का नाम लिखवाना पसंद करती हैं. वहीं, अविवाहित युवतियां अपने नाम के साथ माता-पिता, भाई या परिवार के किसी दूसरे सदस्य का नाम भी लिखवाती हैं. वहीं कई महिलाएं अपनी सहेलियों का नाम भी लिखवाती है. इस तरह कपड़ों पर लिखे नाम सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के साथ उनके रिश्ते को भी दिखाते हैं.
गरासिया महिलाओं का पारंपरिक पहनावा भी काफी अनोखा होता है. इसमें झुलकी, पोलका, घेरदार घाघरा और रंगीन ओढ़नी शामिल हैं. इन कपड़ों को सुंदर बनाने के लिए रंग-बिरंगे धागों, कढ़ाई, मीनाकारी और सजावटी काम का इस्तेमाल किया जाता है. कपड़ों पर नाम लिखवाने के लिए भी खास मेहनत की जाती है. कपड़े सिलने के बाद इस पर नाम लिखने के लिए अलग से खास टेलर के पास कपड़े भेजे जाते है. कई महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार हिंदी या अंग्रेजी में नाम लिखवाती हैं, जिससे पारंपरिक पहनावे में नया फैशन भी देखने को मिलता है.
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इस काम में खास तरह की कढ़ाई और सजावट की जरूरत होती है. नाम को सामान्य तरीके से लिखने के बजाय धागों और कढ़ाई के जरिए कपड़े पर उकेरा जाता है. कई जगहों पर ऐसे दर्जी मिलते हैं, जिन्हें गरासिया समाज के पारंपरिक कपड़े सिलने और उन पर नाम बनाने का खासा अनुभव होता है. इस काम में समय और मेहनत लगती है, इसलिए कपड़ों की सिलाई और सजावट भी खास मानी जाती है. सामान्य कपड़ों के मुकाबले इनकी सिलाई पर खर्च भी ज्यादा आता है
गरासिया समाज के मेलों, त्योहारों और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों में महिलाओं का यह पहनावा खास आकर्षण का केंद्र रहता है. रंग-बिरंगी पोशाकों पर सुंदर कढ़ाई के साथ लिखे नाम उनकी अलग पहचान बनाते हैं. जिस जगह ये नाम लिखवाए जाते है उस कपड़े के हिस्से को झुलकी कहा जाता हैं. सबसे ज्यादा चमकीले रंग कपड़े में इसी भाग पर देखने को मिलते है. समय के साथ इस परंपरा में फैशन के नए रंग जुड़े हैं, लेकिन कपड़ों पर नाम लिखवाने का चलन आज भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचता
मॉडर्न जमाने में जहां पहनावे के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं, वहीं गरासिया जनजाति की महिलाएं अपनी पारंपरिक ड्रेस को आज भी खास महत्व देती हैं. कपड़ों पर अपना और परिवार के सदस्यों का नाम लिखवाने की यह परंपरा महिलाओं की पहचान को भी खास बनाती है. जनजाति महिलाओं का यह अनोखा पहनावा राजस्थान की जनजाति संस्कृति की खास पहचान के रूप में भी देखा जाता है.
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October 30, 2026, 18:02 IST



