Ramayana Movie: 4000 करोड़ की ‘रामायण’ टैक्स फ्री! सस्ती होती है टिकट तो किसको होगा फायदा, प्रोड्यूसर या दर्शक? समझिए पूरा हिसाब

निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. गजब के प्रमोशन, इतनी बड़ी स्टारकास्ट, रामायण जैसी कहानी का क्रेज और नितेश तिवारी के निर्देशन की वजह से इस फिल्म को लेकर काफी हाइप बनी हुई. आज ये फिल्म रिलीज हुई तो सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने रिएक्शन भी डालने शुरू कर दिए. सचिन तेंदुलकर हो या करण जौहर, कौन ऐसा है जिसने इस फिल्म की तारीफ नहीं की है. पर इस बड़े बजट की फिल्म पर बहुत कुछ दाव पर लगा है. इसी बीच पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने इस फिल्म को अपने स्टेट में ‘टैक्स फ्री’ कर दिया है. इ
ससे पहले भी कई फिल्में देश में ‘टैक्स फ्री’ की जाती रही हैं. पर सवाल ये है कि किसी फिल्म को ‘टैक्स फ्री’ करने से क्या होता है? क्या इसका फायदा दर्शकों तक पहुंचता है या ये ऐलान सिर्फ फिल्म के प्रोड्यूसर की तिजोरी में ही खुशखबरी लाता है? आखिर एक फिल्म पर कितना टैक्स लगता है? चलिए इस पूरे समीकरण को समझते हैं.
सचिन तेंदुलकर हो या करण जौहर, कौन ऐसा है जिसने इस फिल्म की तारीफ नहीं की है.
फिल्म को ‘टैक्स फ्री’ करने से क्या होता है?खबरें हैं कि प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की ‘रामायण’ को लगभग 4,000 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया है. यानी फिल्म पर काफी मोटी रकम खर्च की गई है. अब सवाल है कि ‘टैक्स फ्री’ करने से क्या होता है. तो किसी फिल्म का टैक्स फ्री होने का मतलब है कि उस राज्य की सरकार उस फिल्म के मूवी-टिकेट्स पर लगने वाला एंटरटेनमेंट टैक्स यानी मनोरंजन कर नहीं लेगी. क्योंकि मनोरंजन राज्य का विषय है और ऐसा फैसला राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है. पर एक राज्य में टैक्स फ्री फिल्म को बस उसी राज्य में ये छूट मिलती है, हर राज्य में नहीं.
अक्सर राज्य सरकारें ऐसी छूट उन फिल्मों को देती हैं जो देशभक्ति की भावना से जुड़ी हों, समाज में एक कोई संदेश देती हों य फिर ऐसे विषय पर हों जो समाज के लिए जरूरी हो. अंग्रेजों के समय से लिया जा रहा ये टैक्स पहले अलग से वसूल किया जाता था. लेकिन 1 जुलाई, 2017 से भारत में GST लागू होने के बाद ज्यादातर मामलों में सर्विस टैक्स और मनोरंजन टैक्स को जीएसटी में ही जोड़ दिया गया है. क्योंकि ये राज्यों का अधिकार है, इसलिए हर राज्य का ये टैक्स अलग-अलग होता है.
फिल्म के टैक्स फ्री होने का किसे मिलता है फायदा?
एंटरटेनमेंट टैक्स राज्य सरकार मूवी टिकट, स्पोर्ट्स इवेंट, कॉन्सर्ट, प्रदर्शनियों वगैरह पर लगाती है. एंटरटेनमेंट टैक्स कस्टमर द्वारा उठाए जाने वाले अलग-अलग खर्चों का एक हिस्सा है. यानी इसका असली बोझ दर्शक उठाते हैं. जैसे पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक, केरल जैसे राज्यों में यह टैक्स 30 प्रतिशत है, जबकि महाराष्ट्र में 45 प्रतिशत, बिहार में 50 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 60 प्रतिशत है. फिल्मों के टैक्स फ्री होने पर टिकटों का दाम घटता है, ताकि उस फिल्म तक ज्यादा से ज्यादा दर्शक पहुंचें.
एक राज्य में टैक्स फ्री फिल्म को बस उसी राज्य में ये छूट मिलती है, हर राज्य में नहीं.
नितेश तिवारी पर क्यों लगा है बड़ा दाव?पहले बात करें इस फिल्म की तो रामायण की कहानी पर पहले प्रभास, कृति सेनन और सैफ अली खान की ‘आदिपुरुष’ भी आई थी, लेकिन उसका हश्र बॉक्स ऑफिस पर क्या हुआ, सभी को याद है. तारीफ से ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ी. पर निर्देशक नितेश तिवारी ‘दंगल’ और ‘छिछोरे’ जैसी यादगार फिल्में बना चुके हैं. शायद यही वजह है कि ‘आदिपुरुष’ की आलोचना करने वाले आलोचक हों या फिर आम दर्शक, हर किसी को देखना है कि नितेश अपनी इस फिल्म में क्या कमाल कर पाते हैं.



