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धूप से नहीं ठीक होता पीलिया, आरा से डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह, लापरवाही ले सकती है जान

Last Updated:November 05, 2026, 11:05 IST

आमतौर पर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि आजकल बच्चों को एक से बढ़कर एक बीमारी होने लगी हैं. वहीं कुछ लोगों का इस बारे में मानना है कि मेडिकल के क्षेत्र में विकास होने से आज की तारीख में बीमारियां पकड़ में आ जाती हैं. ऐसी ही पीलिया की बीमारी है जो कई बार नवजात को हो जाती है. अगर इसका समय पर सही उपचार नहीं किया गया तो बच्चे की सेहत के लिए खतरा हो सकता है.

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आरा: जन्म के बाद नवजात बच्चों में पीलिया की समस्या सामने आना कोई नई बात नहीं है. पहले भी बच्चों में यह समस्या होती थी, लेकिन जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में इसकी पहचान नहीं हो पाती थी. आज अस्पतालों में जांच और इलाज की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसके कारण जन्म के कुछ दिनों बाद ही बच्चों में पीलिया की पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया जा रहा है. इससे नवजात बच्चों को गंभीर परेशानियों से बचाने में मदद मिल रही है.

आरा सदर अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि नवजात शिशुओं में पीलिया होना काफी सामान्य है. किसी बच्चे में इसका प्रभाव कम होता है तो किसी में अधिक दिखाई देता है. जन्म के बाद शुरुआती दिनों से लेकर लगभग एक महीने तक पीलिया के लक्षणों में उतार-चढ़ाव हो सकता है. हालांकि, हर बच्चे की स्थिति अलग होती है और इसकी नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है.

डॉ. विकास कुमार ने बताया कि नवजात में पीलिया होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि समय पर पहचान होने पर इसका प्रभावी इलाज उपलब्ध है. अस्पतालों में फोटोथेरेपी यानी विशेष नीली रोशनी (ब्लू लाइट) के माध्यम से बच्चों का उपचार किया जाता है. इस तकनीक से बच्चे के शरीर में बढ़े बिलीरुबिन के स्तर को कम करने में मदद मिलती है. जरूरत के अनुसार डॉक्टर बच्चे की जांच कर उपचार की अवधि तय करते हैं.

धूप दिखाने से ठीक नहीं होता पीलियानवजात बच्चों में पीलिया होने पर सुबह की पहली किरण या हल्की धूप दिखाने की पुरानी घरेलू परंपरा को लेकर भी डॉ. विकास कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि धूप दिखाना पीलिया का प्रमाणित उपचार नहीं है. इससे बच्चे को कुछ मात्रा में विटामिन-डी मिल सकता है, लेकिन शरीर में बढ़े बिलीरुबिन को कम करने के लिए चिकित्सकीय उपचार जरूरी है.

घरेलू नुस्खों से बचें, डॉक्टर की सलाह लेंडॉक्टर ने अभिभावकों से अपील की कि नवजात बच्चे की आंखों या त्वचा में पीलापन दिखाई देने पर घरेलू उपचार और पुराने नुस्खों के भरोसे न रहें. बच्चे को बिना देरी नजदीकी शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं. डॉक्टर की सलाह पर बिलीरुबिन की जांच और जरूरी उपचार कराएं. विशेषकर जन्म के शुरुआती 24 घंटे में पीलापन दिखना गंभीर संकेत हो सकता है.

आज बेहतर मेडिकल सुविधाओं और चिकित्सकों की जागरूकता से नवजात बच्चों में पीलिया की पहचान और इलाज पहले की तुलना में आसान हुआ है. जरूरत बस इतनी है कि माता-पिता पुरानी धारणाओं के बजाय सही जानकारी और समय पर इलाज को प्राथमिकता दें. क्योंकि नवजात की सेहत के मामले में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.

About the AuthorRajneesh Singh

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November 05, 2026, 11:05 IST

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