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बैसाखी और ट्राइसाइकिल पर रेस! पाली में दिव्यांगों की अनोखी दौड़ देख सभी हैरान, देखने वालों की लगी भीड़

Agency: Rajasthan

Last Updated:February 25, 2025, 18:10 IST

पाली शहर में आयोजित हुई यह अनोखी दौड़ हर कहीं चर्चा का केन्द्र रही, जहां पर पहली बार इस तरह से दिव्यांग ट्राईसाइकिल और बैसाखी की मदद से रेस में दौड़ते हुए जीत की चाहत रखते दिखाई दिए.बैसाखी और ट्राइसाइकिल पर रेस! पाली में दिव्यांगों की अनोखी दौड़ देख सभी हैरान

पाली में बैसाखी दौड़ते नजर आए दिव्यांग

हाइलाइट्स

पाली में दिव्यांगों ने बैसाखी और ट्राइसाइकिल से दौड़ लगाई.रेस का उद्देश्य दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था.200 से अधिक प्रतिभागियों ने रेस में भाग लिया.

पाली:- पाली शहर में एक ऐसी अनोखी रेस फॉर 7 वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें बैसाखी और ट्राइसाइकिल से दिव्यांग दौडते हुए नजर आए. इस पहल का मुख्य उद्देश्य यही था कि ऐसे दुर्लभ रोगो के प्रति लोगों में जागरूकता को बढ़ाने से लेकर ऐसे प्रभावित मरीजों को किस तरह से सहयोग किया जा सकता है. उसको लेकर पूरा फोकस रहा. पाली शहर में आयोजित हुई यह अनोखी दौड़ हर कहीं चर्चा का केन्द्र रही, जहां पर पहली बार इस तरह से दिव्यांग ट्राईसाइकिल और बैसाखी की मदद से रेस में दौड़ते हुए जीत की चाहत रखते दिखाई दिए.

यह रहा इसका उद्देश्यऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज इंडिया और स्वावलंबन फाउंडेशन के सहयोग से रेस फॉर 7 वॉक पाली के बांगड़ स्कूल से रवाना हुई. सूरजपोल होते हुए वापस बांगड़ स्कूल पहुंच सम्पन्न हुई. इस पहल का उद्देश्य दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रभावित मरीजों को सहयोग देना था. देशभर में पाली शहर की यह दौड़ काफी चर्चाओं में रही, जहां इस तरह से दिव्यांग दौड़ में भाग लेते नजर आए. इस दौड़ का आयोजन ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज इंडिया का आयोजन किया गया.

200 से अधिक लोगों ने लिया भागफाउंडेशन के नितेश तोषावरा की मानें, तो इसमें 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों को टी-शर्ट, मेडल और ई-प्रमाण पत्र दिए गए. रेस में दिव्यांगजनों ने भी बैसाखी, ट्राइसाइकिल के ज़रिए भाग लिया. इस मौके पर भीलवाड़ा के विनोद जैन ने कहा कि दुर्लभ रोगों से जूझना आसान नहीं, लेकिन जागरूकता और सहयोग हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं. यह देखकर खुशी होती है कि समाज हमें समझने और स्वीकारने के लिए आगे आ रहा है.

दुर्लभ रोगियों को चिकित्सा के साथ मानसिक सहायता जरूरीअभाविप के प्रांत अध्यक्ष सहायक प्रोफेसर हीराराम बराड़ की मानें, तो दुर्लभ रोगियों को सिर्फ चिकित्सा सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग की भी जरूरत होती है. ऐसे आयोजनों से जागरूकता बढ़ेगी और जरूरी नीतिगत बदलाव संभव होंगे. रेस केवल शारीरिक भागीदारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है.


First Published :

February 25, 2025, 18:10 IST

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