कोटा के रंगपुर में परिवार संग आए सारस का लगा जमावड़ा, जानिए क्यों तय करते है हर साल हजारों मिल का सफर

शक्ति सिंह/कोटा राजः कोटा के रंगपुर इलाके के खेतों में इन दिनों सारस देखने को मिल रहे है. गंगाईचा गांव के पास चंबल नदी में बसेरा बनाये है. यहा खेतों में सारस (क्रेन) की अठखेलियां पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. सुबह जल्दी खेतों में ये दाना चुगने आते है. उसके बाद गंगाईचा गांव के पास चंबल नदी पर चले जाते है. यहां इनकी संख्या लगभग चार दर्जन से अधिक है, जिनमें 2 बच्चे है. यहां पर पर्याप्त भोजन पानी की उपलब्धता और इस इलाके की समृद्ध जैव विविधता सारस के अनुकूल है. इसलिए यहां सारस आते रहते हैं, अप्रैल से जून तक यही रहते हैं. पिछले कई सालों से सारस की संख्या कम होती जा रही है.
नेचर प्रमोटर ए एच जैदी ने बताया कि कोटा में पिछले 25 वर्षों पूर्व कोटा के जलाशयों में जितने सारस दिखाई देते थे. अब नहीं दिखते. पिछले 32 वर्षों से अध्ययन व छायांकन करते आ है. पहेले के समय में कोटा व उसके आसपास के जलाशयों में इनके मेले लगे होते थे. युवा सारस अपने लिए जोड़े बनाते इनकी कोल और इनका डांस देखने को मिलता था. सारसों के पसन्द वाले जलाशयों में प्रमुख आलनिया डैम, बर्धा बांध, अभेदा, सीमलिया उम्मेदगंज, परवन नदी, काली सिंध नदी, चम्बल नदी व सोरसन इन जगहों पर पहले सरस के कई जोड़े देखे जाते थे.
ज़ैदी ने सारस की ली थी फोटोज़ैदी ने बताया कि आज भी मेरे फोटो में बड़ी संख्या में सारस को देखा जा सकता है. आलनिया में सन 2000 से पूर्व 92 सारस को पूरे तालाब में देखा गया. चम्बल के मानस गांव में पहले बीच में टापू था. जिस पर ककड़ी की खेती होती थी. उन्ही के बीच और दूसरे किनारे पर 2001 में 84 सारस को देखा गया. वाइल्ड लाइफ देहरादून के डॉ. वी सी चौधरी भी इतने सारस देख खुशी जाहिर की थी. उस समय डॉ. जतिंदर कोर इस पक्षी पर शोध कर रही थीं.
कम से कम 6 घोसले बनते थेहाडौती नेचुरल सोसाइटी के सदस्य पिछले 34 वर्षो से इस पक्षी पर अध्ययन कर रहे है. उम्मेदगंज जहां सूर सागर से उम्मेदगंज तक कम से कम 6 घोसले बनते थे. पिछले 5 वर्षों में एक भी नहीं बना. वर्तमान में वर्षा कम होने के कारण अधिकतर तालाब सुख गए है. गामछ के आसपास के खेतों में पम्प चल रहे है. वहां इस समय लगभग 40 से अधिक सारस का जमावड़ा देखा जा सकता है. पुर्व में 80 से 90 सारस दिखाई देते थे. मानस गांव व आलनिया इनके मुख्य जलाशय थे.
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FIRST PUBLISHED : May 8, 2024, 08:32 IST