A Unique Annkut Tradition in Pali Rajasthan

Last Updated:November 08, 2025, 14:16 IST
Pali News: पाली में 70 साल से ‘अन्नकूट’ परंपरा निभाई जा रही है, जिसमें भगवान को इम्यूनिटी बूस्टर प्रसाद चढ़ाया जाता है. मौसमी सब्जियों और अनाज से तैयार यह सात्विक प्रसाद भक्तों को स्वास्थ्य और भक्ति दोनों का संदेश देता है. यह परंपरा दक्षिण भारत से शुरू हुई थी और पाली के 50 से अधिक मंदिरों में आज भी जीवित है.
पाली। राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसी परंपरा पिछले सात दशकों से निभाई जा रही है, जिसने भोग को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक बना दिया है. यहाँ ‘अन्नकूट’ नामक प्रसाद को इम्यूनिटी बूस्टर कहा जाता है. इस परंपरा की शुरुआत करीब 70 साल पहले दक्षिण भारत से आए पुजारी वेंकटाचार्य ने पाली के वेंकटेश मंदिर में की थी. आज यह परंपरा शहर के 50 से अधिक मंदिरों में बड़े उत्साह के साथ निभाई जा रही है.
अन्नकूट में भगवान को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में मौसमी सब्जियों, दालों, अनाज, फलों और ड्राई फ्रूट्स का उपयोग किया जाता है. इसका उद्देश्य सभी स्वाद और पोषक तत्वों को एक साथ समाहित कर भक्तों तक पहुंचाना है. इस प्रसाद को खाने से शरीर को प्राकृतिक विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो संक्रमण के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाते हैं. यह भोग एक तरह से संपूर्ण आहार का प्रतिनिधित्व करता है.
परंपरा को निभा रहे हैं विशेषज्ञ हलवाईकरीब 14 साल से हलवाई कमल किशोर शर्मा इस विशेष प्रसाद को बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. वे बताते हैं कि इस अन्नकूट में लहसुन और प्याज का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि पूरी तरह सात्विक सामग्री से इसे तैयार किया जाता है. आज के समय में समाज और समितियां एक्सपर्ट हलवाई को ही यह जिम्मेदारी सौंपती हैं ताकि परंपरा और स्वाद दोनों बरकरार रहें. प्रसाद बनाने में सैकड़ों किलो सामग्री का उपयोग होता है और इसे बनाने में कई घंटे लगते हैं.
इम्यूनिटी बूस्टर का वैज्ञानिक कारणराजकीय जिला आयुर्वेद अस्पताल, पाली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिवकुमार शर्मा के अनुसार, कार्तिक माह में मौसम परिवर्तन के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में अन्नकूट में डाले गए मौसमी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत करते हैं. इसमें विभिन्न प्रकार की दालों और सब्जियों का मिश्रण होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और यह इम्यूनिटी बूस्टर की तरह कार्य करता है. यह प्राचीन भारतीय ज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान का एक अनूठा उदाहरण है.
संत प्रेमानंद जी के अनुसार, अन्नकूट महोत्सव की जड़ें श्रीमद्भागवत महापुराण से जुड़ी हैं. कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्व की पूजा करने के लिए प्रेरित किया था. इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों को बचाने के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया, इसी घटना की स्मृति में अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है, जो एकता, प्रकृति के सम्मान और सामुदायिक भोजन का संदेश देता है.
Location :
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
November 08, 2025, 12:58 IST
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पाली के मंदिरों में 70 साल से बन रहा है ऐसा प्रसाद, जो बढ़ाता है इम्यूनिटी….



