Entertainment

बिजनेस वर्ल्ड छोड़कर बने एक्टर, फ्लॉप होने के बाद बन गए डायरेक्टर, पहली मूवी से छोड़ी गहरी छाप

Last Updated:December 06, 2025, 02:31 IST

शेखर कपूर ने फिल्म ‘मासूम’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘बैंडिट क्वीन’ और ‘एलिजाबेथ’ जैसी फिल्मों से दुनिया भर में पहचान बनाई. उन्हें भारत सरकार ने 2000 में सिनेमा में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया. हालांकि, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बिजनेस वर्ल्ड से की.बिजनेस वर्ल्ड छोड़कर बने एक्टर, फ्लॉप होने के बाद बन गए डायरेक्टरशेखर कपूर ने 1975 में फिल्म ‘जान हाजिर है’ में काम किया था. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: आमतौर पर लोग मानते हैं कि फिल्म निर्देशक बनने के लिए बचपन से ही सिनेमा में रुचि होनी चाहिए, लेकिन शेखर कपूर ने इस धारणा को बदल दिया. उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, हालांकि उनका बॉलीवुड से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का मन बनाया और एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नौकरी की.

शेखर ने नौकरी तो की, लेकिन उनकी किस्मत ने उन्हें ऐसे रास्ते पर डाल दिया जिससे उन्होंने न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में पहचान बनाई. शेखर कपूर का जन्म 6 दिसंबर 1945 को लाहौर में हुआ था. उनका परिवार पंजाबी हिंदू था. उनके माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन शेखर का रुझान हमेशा कला और अभिनय की ओर था. बचपन से ही उन्हें फिल्मों और कहानियों में रुचि थी.

मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नौकरी कीदिल्ली से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद शेखर ने इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंग्लैंड जाने का निर्णय लिया और 22 साल की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नौकरी की. उस समय शेखर का करियर पूरी तरह से बिजनेस और अकाउंटिंग में था, लेकिन फिल्मों का सपना उनके मन में हमेशा बना रहा.

पहली फिल्म से किया इंप्रेसआईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, शेखर कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1975 में फिल्म ‘जान हाजिर है’ से की. हालांकि, उन्हें अभिनय में वह सफलता नहीं मिली जो वे चाहते थे. इस बीच उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाने का फैसला किया. 1983 में उन्होंने फिल्म ‘मासूम’ का निर्देशन किया, जिसने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी. यह फिल्म एक छोटे लड़के की कहानी थी जो अपनी सौतेली मां से प्यार और स्वीकृति पाने की कोशिश करता है. इसके बाद 1987 में उन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’ बनाई, जो सुपरहिट साबित हुई और अनिल कपूर के करियर को नई ऊंचाई दी.

पद्मश्री से किया सम्मानित शेखर कपूर ने 1994 में ‘बैंडिट क्वीन’ बनाई, जो फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी. यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई और कई पुरस्कार जीते. फिर 1998 में उन्होंने ऐतिहासिक फिल्म ‘एलिजाबेथ’ बनाई, जो ब्रिटिश रानी एलिजाबेथ प्रथम के जीवन पर आधारित थी. इस फिल्म ने उन्हें बाफ्टा और गोल्डन ग्लोब जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाए. 2007 में उन्होंने ‘एलिजाबेथ: द गोल्डन एज’ बनाई, जो पहले भाग का सीक्वल थी. इसके अलावा, 2002 में उन्होंने ‘द फोर फेदर्स’ और 2022 में ब्रिटिश रोमांटिक कॉमेडी ‘व्हाट्स लव गॉट टू डू विद इट?’ का भी निर्देशन किया. शेखर कपूर ने न केवल बॉलीवुड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई. उनकी फिल्में कहानी कहने की कला और मजबूत किरदारों के लिए जानी जाती हैं. भारत सरकार ने उन्हें 2000 में पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी उनके नाम हैं.

About the AuthorAbhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

December 06, 2025, 02:31 IST

homeentertainment

बिजनेस वर्ल्ड छोड़कर बने एक्टर, फ्लॉप होने के बाद बन गए डायरेक्टर

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj