दिनेश-रवीना ने खेलों में रचा इतिहास, बिश्नोई परिवार गौरवान्वित

Last Updated:November 15, 2025, 15:09 IST
रोटू गांव के चार भाई-बहनों की सफलता की कहानी सिर्फ खेलों में जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और समर्पण की मिसाल है. किसान रामेश्वर लाल बिश्नोई और उनकी पत्नी छोटी देवी ने अपने बच्चों को कठिन परिश्रम और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप उनके बच्चे—दिनेश, रवीना, सरिता और शर्मिला—ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम रोशन किया. इनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो छोटे से गांव की मिट्टी भी सोना उगा सकती है. 
राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील के छोटे से गांव रोटू ने अब सिर्फ खेती और ग्रामीण जीवन के लिए नहीं, बल्कि खेलों में भी कीर्तिमान स्थापित किया है. किसान रामेश्वर लाल बिश्नोई और उनकी पत्नी छोटी देवी ने अपने बच्चों को मेहनत, अनुशासन और लगन का पाठ पढ़ाया. इस कारण उनके चारों बच्चे—दिनेश, शर्मिला, सरिता और रवीना—खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. इनकी सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादे से किसी भी छोटे से गांव की मिट्टी भी सोना उगल सकती है.

दिनेश की तरह उनकी छोटी बहन रवीना बिश्नोई ने भी देश का मान बढ़ाया है. मात्र 18 वर्ष की उम्र में रवीना ने मंगोलिया में आयोजित वर्ल्ड जूनियर कुराश चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता. उनकी इस उपलब्धि से पूरा रोटू गांव गर्व से झूम उठा, रवीना बताती हैं कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होती. अब रवीना भारत की ओर से आगामी एशियाई टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की तैयारी में हैं.

इसी परिवार की बड़ी बेटी शर्मिला बिश्नोई, जो 22 वर्ष की हैं, ने भी खेलों में अपनी धाक जमाई है, उन्होंने 13वीं सीनियर स्टेट कुराश चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के साथ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार हासिल किया. शर्मिला ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गांव की छोटी-सी चौपाल से शुरू हुई उनकी यात्रा राज्य स्तर पर पहचान दिलाएगी. वे कहती हैं कि बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए परिवार का समर्थन और समाज का विश्वास दोनों जरूरी हैं.

इन चारों भाई-बहनों की सफलता की कहानी सिर्फ पदक जीतने की नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है कि मेहनत और जज्बे से सब कुछ संभव है. किसान पिता और गृहिणी मां ने कभी नहीं सोचा था कि उनके बच्चे एक दिन भारत का नाम रोशन करेंगे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को संघर्ष और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया, अब गांव रोटू का हर बच्चा इनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़ना चाहता है.
First Published :
November 15, 2025, 15:09 IST
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