गुजरात के बाद राजस्थान की बारी! जालोर बनेगा बायो-CNG का पहला मेगा हब, हरित ऊर्जा से होगा औद्योगिक बदलाव

Last Updated:December 11, 2025, 08:28 IST
जालोर न्यूज: जालोर के चांदराई क्षेत्र में राजस्थान की पहली मेगा बायो-CNG परियोजना आकार ले रही है. नेपियर घास, एग्री वेस्ट और गोबर से हरित ऊर्जा उत्पादन होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिलेगा. अनुबंध आधारित खेती से किसानों को स्थायी आय, रोजगार और जैविक खाद के स्रोत मिलेंगे. प्लांट निर्माण और संचालन से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा और क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया दौर शुरू होगा.
जालोर जिले के आहोर उपखंड के चांदराई कस्बे में सोमवार को 600 करोड़ की लागत वाली बायो-सीएनजी परियोजना की शुरुआत भूमि पूजन के साथ हुई. कार्यक्रम में ग्रामीणों, किसानों, स्थानीय संगठनों और समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया. भूमि पूजन के दौरान पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की गई और परियोजना के भविष्य को लेकर लोगों में उत्साह दिखा. कार्यक्रम स्थल पर प्लांट की रूपरेखा, संभावित फायदों और आने वाले औद्योगिक बदलाव को लेकर चर्चा भी हुई. ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया.

चांदराई क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 10 अत्याधुनिक बायो-CNG प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं. यह पूरी परियोजना सोमनाथ बायो गैस प्राइवेट लिमिटेड और सोमनाथ एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित होगी. प्लांटों को अलग-अलग स्थानों पर विकसित किया जाएगा, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़े और आस-पास के ग्रामीण इलाकों को अधिकतम लाभ मिल सके. प्रत्येक प्लांट में आधुनिक मशीनरी, गैस प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल होंगी.

बायो-CNG उत्पादन के लिए मुख्य कच्चे माल के रूप में नेपियर घास, गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा. इसी उद्देश्य से चांदराई और आस-पास के गांवों में लगभग 10 हजार बीघा भूमि पर बड़े पैमाने पर नेपियर घास की खेती की योजना बनाई गई है. इस खेती को पूरी तरह संगठित और अनुबंध आधारित मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें किसानों के साथ औपचारिक समझौते किए जाएंगे. अनुबंध खेती से किसानों को नियमित कटाई पर निश्चित दर पर घास बेचने की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें सालभर एक स्थायी, सुरक्षित और तय आय का स्रोत मिल सकेगा.
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नेपियर घास की तेज़ी से बढ़ने वाली प्रकृति और इसकी साल में कई बार कटाई होने की क्षमता इसे इस परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है. खेती, सिंचाई, कटाई और ढुलाई जैसे कार्यों में स्थानीय किसानों और मजदूरों को व्यापक रोजगार भी मिलेगा. इस तरह यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी. इसके साथ ही नेपियर की खेती से भूमि का उपयोग पूरे वर्ष भर बना रहेगा, जिससे किसानों को मौसम पर निर्भर रहने की बजाय नियमित आय प्राप्त होगी. परियोजना क्षेत्र में चारे और जैविक खाद के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित होंगे, जिससे पशुपालन को भी लाभ मिलेगा.

इस प्लांट के चलते स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होने जा रहे हैं. निर्माण चरण में साइट डेवलपमेंट, सिविल वर्क, मशीन इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल फिटिंग और पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्यों में श्रमिकों और तकनीशियनों की ज़रूरत होगी. वहीं प्लांट शुरू होने के बाद मशीन संचालन, कंट्रोल रूम, सुरक्षा व्यवस्था, गुणवत्ता परीक्षण, परिवहन, रख-रखाव, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स जैसे विभागों में स्थाई व अर्ध-स्थाई नौकरियां पैदा होंगी. स्थानीय युवाओं को इन पदों पर प्राथमिकता मिलने से क्षेत्र में रोजगार का नया आधार विकसित होगा और बड़े शहरों में मजदूरी के लिए होने वाला पलायन भी कम होगा.

गुजरात के बाद राजस्थान की यह पहली बड़ी परियोजना है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि गुजरात में सफलता के बाद राजस्थान में इस पैमाने की यह पहली और सबसे बड़ी बायो-CNG परियोजना स्थापित की जा रही है, जो राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी. इस परियोजना के शुरू होने से जालोर जिला स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा. प्लांटों में जैविक कचरा, नेपियर घास और कृषि अपशिष्ट को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली बायो-CNG तैयार की जाएगी, जिससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा.
First Published :
December 11, 2025, 08:28 IST
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जालोर बनेगा ग्रीन एनर्जी कैपिटल! बायो-CNG से नेपियर घास और गोबर होगा ‘सोना’



