पेरेंट्स सावधान! गर्दन पर कालापन सिर्फ मैल नहीं, इस खतरनाक बीमारी की हो सकती है शुरुआत, एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:December 08, 2025, 17:29 IST
Obesity in Children Risks: आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों और बड़ों की गर्दन पर मोटी और काली सिलवटें कोई साधारण त्वचा समस्या नहीं बल्कि डायबिटीज की शुरुआती संकेत हो सकती हैं.
आगरा: बदलती जीवनशैली और गलत खानपान का असर अब बच्चों और युवाओं की सेहत पर तेजी से दिखने लगा है. मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स में घंटों समय बिताने वाले बच्चों के शरीर में ऐसे बदलाव नजर आने लगे हैं जो कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं. इसी बीच आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसे माता-पिता और युवाओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है.
गर्दन पर मोटी और काली सिलवटें डायबटीज का संकेतसरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि गर्दन पर मोटी और काली सिलवटें दिखाई देना कोई साधारण गंदगी या त्वचा रोग नहीं है. इसे मेडिकल भाषा में एकैन्थोसिस नाइग्रिकेंस कहा जाता है और यह शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ने का संकेत देती है. यह स्थिति डायबटीज के शुरुआती लक्षणों में से एक है. डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह काला पन साबुन या क्लींजर से साफ नहीं होता और इसे नजरअंदाज करना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.
60 बच्चों पर स्टडी में मिले लक्षणडॉ. प्रभात अग्रवाल के अनुसार हाल ही में 60 बच्चों पर एक अध्ययन किया गया, जिसमें 4 बच्चों की गर्दन मोटी और काली पाई गई. हैरानी की बात यह है कि इन 4 में से 2 बच्चों को डायबटीज भी थी. ये बच्चे ज्यादातर समय घर में मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर ही बिताते थे और आउटडोर खेल या एक्सरसाइज नहीं करते थे. इससे उनकी शारीरिक गतिविधि कम हुई और मोटापा बढ़ा, जो धीरे-धीरे डायबटीज जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है.
गर्दन का काला पन क्यों होता हैडॉ. अग्रवाल ने बताया कि गर्दन पर काले निशान और मोटी सिलवटें तब बनती हैं जब शरीर में इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं करता. शरीर अधिक इंसुलिन बनाने लगता है और त्वचा पर काला पन दिखाई देता है. यह कोई त्वचा रोग नहीं बल्कि डायबटीज का शुरुआती संकेत है. इस लक्षण को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर ले जा सकता है.
एक्सपर्ट से जानिए बचाव के उपायडॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि इस स्थिति से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है कि बच्चे और युवा नियमित रूप से आउटडोर खेलों में भाग लें. बच्चों को साइकल चलाने, दौड़ने, तैराकी और मैदान में खेलों में शामिल होना चाहिए. यह गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखती हैं और मोटापे व डायबटीज के खतरे को कम करती हैं. उन्होंने कहा कि आज के समय बच्चे घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि कम होती है और मोटापा बढ़ता है, जो कई बीमारियों का कारण बन सकता है.
माता-पिता के लिए सुझावडॉ. अग्रवाल ने माता-पिता से अपील की कि अगर बच्चों की गर्दन पर काले निशान या मोटी सिलवटें दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. बच्चों को रोजाना कम से कम एक घंटे आउटडोर खेलने के लिए प्रेरित करें. घर में जंक फूड और मीठे पेय सीमित करें और नियमित रूटीन के साथ एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं. सही खानपान और नियमित एक्सरसाइज से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और डायबटीज के जोखिम को कम किया जा सकता है.
About the AuthorSeema Nath
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें
Location :
Agra,Uttar Pradesh
First Published :
December 08, 2025, 17:29 IST
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गर्दन पर कालापन सिर्फ मैल नहीं! इस खतरनाक बीमारी की हो सकती है शुरुआत



