Ajay Rawat Message for Environment.

Last Updated:December 21, 2025, 06:06 IST
Aravali Conservation Sand Art Pushkar: अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने पुष्कर में 100 टन रेत से अरावली पर्वतमाला की कलाकृति बनाकर इसके संरक्षण का संदेश दिया है. उन्होंने केंद्र सरकार की उस नई परिभाषा का विरोध किया है जिसमें 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों को अरावली के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है. यह कलाकृति अरावली को राजस्थान की जीवनरेखा बताते हुए अवैध खनन और निर्माण कार्यों के खिलाफ एक मूक चेतावनी है.
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Aravali Conservation Sand Art Pushkar: राजस्थान की पवित्र तीर्थ नगरी पुष्कर के रेतीले धोरों में अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने अपनी कला के जरिए पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी मुहिम छेड़ी है. रावत ने लगभग 100 टन से अधिक बालू मिट्टी का उपयोग करके अरावली पर्वतमाला की एक विशाल और जीवंत कलाकृति तैयार की है. यह सैंड आर्ट न केवल देखने में भव्य है, बल्कि यह अरावली के अस्तित्व पर मंडराते खतरों और उसके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को भी सशक्त रूप से रेखांकित करती है.
इस कलाकृति के माध्यम से अजय रावत ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अरावली पर्वतमाला की नई वैज्ञानिक परिभाषा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. हाल ही में सरकार ने एक नया मानदंड प्रस्तुत किया है, जिसके तहत केवल उन्हीं पहाड़ियों को अरावली माना जाएगा जिनकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक हो. अजय रावत और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परिभाषा लागू हुई, तो अरावली का एक बहुत बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगा. इससे भू-माफियाओं और अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे पर्वतमाला का वजूद ही खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा.
पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है अरावलीसैंड आर्टिस्ट अजय रावत का कहना है कि अरावली पर्वतमाला महज पत्थर की पहाड़ियां नहीं, बल्कि राजस्थान के पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है. यह पर्वतमाला भूजल स्तर को बनाए रखने, वायु की गुणवत्ता सुधारने और थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में ढाल का काम करती है. यदि कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को संरक्षण से बाहर किया गया, तो वहां होने वाला खनन जल संकट को गहरा देगा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को पूरी तरह नष्ट कर देगा.
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और वर्तमान चिंतायह कलाकृति वर्ष 2018 के उस चर्चित सुप्रीम कोर्ट प्रकरण की भी याद दिलाती है, जिसमें न्यायालय ने अरावली में गायब होती पहाड़ियों और अवैध खनन पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. पुष्कर में बनाई गई यह सैंड आर्ट उसी कानूनी और पर्यावरणीय संघर्ष की निरंतरता है. रावत का यह प्रयास आमजन और सरकार को यह समझाने का है कि अरावली राजस्थान की जीवनदायिनी शक्ति है, जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए आत्मघाती साबित होगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Pushkar,Ajmer,Rajasthan
First Published :
December 21, 2025, 06:06 IST
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सैंड आर्ट से अरावली का संरक्षण संदेश: पुष्कर में अजय रावत ने 100 टन रेत….



