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अजमेर को गुलामी के एक और प्रतीक से मिली मुक्ति, किंग एडवर्ड मेमोरियल का बदला नाम, जानें क्या मिली नई पहचान?

Agency: Rajasthan

Last Updated:February 13, 2025, 09:32 IST

Ajmer News : अजमेर शहर से गुलामी के निशान मिटाए जाने की कड़ी में अब 113 साल पुराने किंग एडवर्ड मेमोरियल का नाम बदलकर अब महर्षि दयानन्द विश्रांति गृह कर दिया गया है. इससे पहले होटल खादिम को अजयमेरु और फॉय सागर झ…और पढ़ेंगुलामी के एक और प्रतीक से मिली मुक्ति, किंग एडवर्ड मेमोरियल अजमेर का बदला नाम

अजमेर में इससे पहले होटल खादिम और फॉय सागर झील का नाम बदला जा चुका है.

हाइलाइट्स

अजमेर में किंग एडवर्ड मेमोरियल का नाम बदलकर महर्षि दयानन्द विश्रांति गृह हुआ।फॉय सागर झील का नाम बदलकर वरुण सागर कर दिया गया है।होटल खादिम का नाम बदलकर अजमेरु कर दिया गया है।

अशोक सिंह भाटी.

अजमेर. किसी समय राजस्थान में अंग्रेजों का अहम ठिकाना रहे अजमेर से गुलामी के निशान मिटाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. इसी कड़ी में अजमेर शहर में स्थित 113 साल पुराने किंग एडवर्ड मेमोरियल का नाम बदलकर अब महर्षि दयानन्द विश्रांति गृह कर दिया गया है. इससे पहले अजमेर में आरटीडीसी के होटल खादिम और फॉय सागर झील का नाम बदल दिया गया था. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर ये नाम बदले जा रहे हैं.

अजमेर के रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित ब्रिटिश कालीन किंग एडवर्ड्स मेमोरियल रेस्ट हाउस के नाम को बदलने वाला नोटिफिकेशन सहकारिता विभाग ने मंगलवार को जारी कर दिया है. किंग एडवर्ड्स मेमोरियल रेस्ट हाउस ब्रिटिश कालीन राजाओं को दर्शाता था. इसलिए इसे गुलामी का प्रतीक मानते हुए इसका नाम बदल दिया गया है. इसके नाम बदलने के बाद आर्य समाज और महर्षि दयानंद सरस्वती से जुड़े अनुयायियों में खुशी की लहर है. विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने पिछले दिनों महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयंती पर अजमेर में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में इसकी घोषणा की थी.

9 बीघा में फैला हुआ है एडवर्ड्स मेमोरियल रेस्ट हाउसअजमेर रेलवे स्टेशन रोड स्थित किंग एडवर्ड सप्तम मेमोरियल (रेस्ट हाऊस) सोसायटी अजमेर का भवन 113 वर्ष पूर्व सन् 1912-1913 में किया गया था. यह प्रमुख रूप से अजमेर आने वाले जायरीन और पुष्कर जाने वाले धार्मिक यात्रियों को सस्ती दर पर रहने की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था. सन् 1975 से रजिस्टर्ड किंग एडवर्ड सप्तम मेमोरियल (रेस्ट हाऊस) सोसायटी इसका संचालन रखरखाव कर रही थी. राज्य सरकार ने सितंबर 2014 के गजट नोटिफिकेशन से इस भवन को पुरा स्मारक घोषित किया था. यह लगभग 9 बीघा में फैला हुआ है.

ये सभी नाम गुलामी के प्रतीक हैंदेवनानी ने कहा कि अजमेर में ब्रिटिश कालीन इतिहास से जुड़ी इमारतों और फॉय सागर झील के नाम भी बदल दिए गए हैं. ये सभी गुलामी के प्रतीक हैं. इसलिए इनके नाम बदलने का निर्णय लिया गया है. वासुदेव देवनानी ने बताया कि 132 साल पहले ब्रिटिश काल में बने फॉय सागर झील का नाम अब वरुण सागर रखा गया है. 1891-92 के दौरान अकाल से बचने के लिए इस झील का निर्माण अंग्रेज इंजीनियर मिस्टर फॉय के नेतृत्व में हुआ था. इसके बाद यहां पानी की आवक हुई और अजमेर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की सप्लाई की गई.

फॉय सागर अब वरुण सागर के नाम से जाना जाएगाअजमेर की संस्कृति और विरासत को ध्यान में रखते हुए अब इसे वरुण सागर के नाम से जाना जाएगा. इस झील से आसपास के लोगों खासकर सिंधी समाज का खास लगाव है. यहां सिंधी समाज के आराध्य देव झूलेलाल की जयंती हर्षोल्लास से मनाई जाती है. जल की पूजा-अर्चना होती है. वरुण सागर झील के आसपास सौंदर्यीकरण का काम होगा और वहां वरुण देवता की मूर्ति भी लगाई जाएगी. साथ ही झील में पूजा-अर्चना के लिए एक घाट का निर्माण भी किया जाएगा ताकि इससे यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो.

होटल खादिम का नाम बदलकर अजमेरु कर दिया गया हैअजमेर के आरटीडीसी होटल खादिम का नाम बदलकर अजमेरु कर दिया गया है. यह नाम सभी के लिए सही है और अजमेर को दर्शाता है. अगर और भी कोई गुलामी के प्रतीक वाली इमारतें या स्थान होंगे तो उनके नाम भी बदले जाएंगे. वासुदेव देवनानी ने कहा कि अजमेर की एलिवेटेड रोड का नाम भी जल्द ही राम सेतु किया जाएगा. इसे लेकर कार्रवाई जारी है. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अजमेर के इतिहास की जानकारी होनी चाहिए और इसमें गुलामी का कोई भी प्रतीक नहीं होना चाहिए. अजमेर में लगातार विकास के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं.


Location :

Ajmer,Ajmer,Rajasthan

First Published :

February 13, 2025, 09:32 IST

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गुलामी के एक और प्रतीक से मिली मुक्ति, किंग एडवर्ड मेमोरियल अजमेर का बदला नाम

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