श्रीगंगानगर का बुड्ढा जोहड़ गुरुद्वारा, अपने में समेटे है 17वीं सदी का सिख संघर्ष और नादर शाह के खिलाफ हुआ युद्ध

श्रीगंगानगर. राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की रायसिंहनगर तहसील में डाबला गांव के पास करनीजी नहर के किनारे स्थित गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ सिख इतिहास और आस्था का प्रतीक है. यह गुरुद्वारा न केवल धार्मिक स्थल है बल्कि सामाजिक सेवा विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसका अस्पताल और ट्रस्ट समाज सेवा के लिए समर्पित हैं जो सिख धर्म के सेवा और समानता के सिद्धांतों को जीवंत करता है.
गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ का इतिहास 17वीं शताब्दी के मुगलकाल से जुड़ा है. 1740 में भाई सुखा सिंह और मेहताब सिंह ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में अपवित्रता करने वाले मस्सा रंगड़ का सिर काटकर इसे यहां एक जंड के पेड़ पर लटकाया था. उस समय यह क्षेत्र जंगल था और इस जोहड़ (पानी के गड्ढे) के पास सिखों ने डेरा डाला था. जत्थेदार बूढ़ा सिंह के नेतृत्व में सिखों ने यहां संगत की स्थापना की जिसके कारण इस स्थान का नाम बुड्ढा जोहड़ पड़ा. 1953 में संत फतह सिंह ने गुरुद्वारे की नींव रखी और 1956 में पक्की इमारत का निर्माण शुरू हुआ. यहां हर साल श्रावण मास की अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.
गुरुद्वारा परिसर में संचालित बुड्ढा जोहड़ अस्पताल जरूरतमंदों के लिए वरदान है. यह अस्पताल सिख धर्म के सेवा भाव को दिखाता है जहां गरीब और असहाय लोगों को मुफ्त या कम लागत में इलाज किया जाता है. अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, आपातकालीन सेवाएं और छोटी-मोटी सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं. यहां 24×7 कार्यरत आपातकालीन कक्ष और एम्बुलेंस सेवाएं भी हैं. एक एम्बुलेंस तो आईसीयू सुविधाओं से लैस है, जिसमें ऑक्सीजन और डिफाइब्रिलेटर जैसे उपकरण हैं. अस्पताल में 20 से अधिक बेड्स हैं और यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम समय-समय पर मरीजों का इलाज करती है.
अस्पताल की एक विशेषता यह है कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का स्वागत किया जाता है. यहां साल में दो रक्तदान शिविर, चार नेत्र शिविर और कई स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें मधुमेह, रक्तचाप, और हृदय रोगों की जांच मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर होती है. अस्पताल में एक फार्मेसी भी है जो मरीजों को मुफ्त दवाएं और परामर्श प्रदान करती है. यह अस्पताल स्थानीय समुदाय के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण स्रोत है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं.
गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ का प्रबंधन करने वाला ट्रस्ट सामाजिक कल्याण के लिए समर्पित है. यह ट्रस्ट गुरुद्वारे के धार्मिक और सामाजिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाता है. ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य सिख धर्म के सिद्धांतों-सेवा, समानता और शिक्षा को बढ़ावा देना है. ट्रस्ट की तरफ से लंगर सेवा चलाई जाती है जहां हर दिन सैकड़ों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है. यह सामुदायिक एकता का प्रतीक है. इसके अलावा ट्रस्ट शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय है. यहां गुरबानी संगीत और सिख इतिहास सीखने के लिए कक्षाएं आयोजित की जाती हैं जिनमें स्थानीय और बाहरी छात्र भाग लेते हैं.
ट्रस्ट की तरफ से पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए 140 कमरों की आवास सुविधा भी उपलब्ध है, जो गुरुद्वारे के पास ही स्थित है. ये कमरे साफ-सुथरे और किफायती हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु आराम से रुक सकें. ट्रस्ट पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कदम उठाता है जैसे वृक्षारोपण और जोहड़ के जल संरक्षण के प्रयास. यह ट्रस्ट स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर सामाजिक जागरूकता अभियान चलाता है, जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर दिया जाता है.
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ न केवल सिखों के लिए, बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र है. यहां की शांति और सेवा भावना हर आगंतुक को प्रभावित करती है. गुरुद्वारे में ऐतिहासिक चित्र और स्मारक हैं, जो सिख इतिहास के गौरवशाली पलों को दर्शाते हैं. यहां का जंड का पेड़, जो 2000 में गिर गया. वह अब कांच के केस में संरक्षित है. यह सिखों के बलिदान की याद दिलाता है.
गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़, इसका अस्पताल और ट्रस्ट सिख धर्म के मूल्यों-सेवा, समानता और भक्ति का जीवंत उदाहरण है. यह स्थान इतिहास, आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा का अनूठा संगम है. यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और ट्रस्ट की गतिविधियां समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. श्रीगंगानगर का यह गुरुद्वारा न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि एक ऐसा केंद्र है जो मानवता की सेवा में समर्पित है.



