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‘सभी छात्र हो सकते हैं सस्‍पेंड’, JNU प्रशासन ने अपनाया कड़ा रुख, मोदी-शाह की कब्र खोदने का लगाया था नारा

Last Updated:January 06, 2026, 21:10 IST

JNU Administration on Slogan Controversy: जेएनयू प्रशासन ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है. मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और दोषी छात्रों को तत्काल निष्कासन या निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय नवाचार के केंद्र हैं, जिन्हें नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा. अनुशासन और संवैधानिक गरिमा बनाए रखना अब प्राथमिकता है.'विवादित नारे लगाने वाले सभी छात्र होंगे सस्‍पेंड', JNU का कड़ा फैसलाजेएनयू प्रशासन का कड़ा फैसला.

जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदार कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित, निष्कासित या स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है. आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है.

प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है.

But any form of violence, unlawful conduct or anti-national activity will not be tolerated under any circumstances.Students involved in this incident will also face disciplinary measures including immediate suspension, expulsion and permanent debarment from the University.

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