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सर्दियों में पशुओं की देखभाल और दूध बढ़ाने के तरीके | Winter Animal Care Tips for Milk Production

Last Updated:December 27, 2025, 09:14 IST

Winter Animal Care Tips: सर्दियों में पशुओं को ठंड से बचाने और दूध बढ़ाने के लिए गुड़. मेथी और सरसों का तेल उनके आहार में शामिल करना चाहिए. पशुओं को गुनगुना पानी पिलाने और रहने की जगह को गर्म रखने से वे बीमार नहीं पड़ते. संतुलित आहार और सही प्रबंधन से ठंड के मौसम में भी पशु अधिक दूध देते हैं.
ठंड और नमी से पशुओं में जुकाम,सर्दी, निमोनिया और परजीवियों की समस्या बढ़ जाती है

सर्दियों में गाय, भैंस और बकरी जैसे दुधारू पशुओं की देखभाल अनिवार्य है. गिरते तापमान में शरीर को गर्म रखने के लिए पशुओं की ऊर्जा अधिक खर्च होती है, जिससे दूध उत्पादन कम हो जाता है. साथ ही, ठंड और नमी के कारण उनमें निमोनिया, जुकाम और परजीवियों का खतरा बढ़ जाता है, जो उनकी सेहत को नुकसान पहुँचाता है. पशुपालकों को चाहिए कि वे ठंड से बचाव के लिए पशुओं को सुरक्षित व गर्म स्थान पर रखें. इसके अलावा, बेहतर दूध उत्पादन के लिए उन्हें पौष्टिक आहार और पीने के लिए गुनगुना पानी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें.

पशुओं के लिए पर्याप्त धूप और हवादार लेकिन गर्म जगह का इंतजाम करना लाभदायक होता है

पशु विशेषज्ञ डॉ. रावताराम भाखर के अनुसार, सर्दियों में पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर दूध उत्पादन के लिए उनका उचित प्रबंधन अनिवार्य है. डॉ. भाखर का कहना है कि ठंड के दिनों में पशुओं को हमेशा गुनगुना पानी ही पिलाना चाहिए, क्योंकि ठंडा पानी उनकी पाचन शक्ति और सेहत पर बुरा असर डाल सकता है. पशुओं के रहने के स्थान पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ नमी और ठंड का प्रभाव कम हो. यदि पशु लंबे समय तक गीली या ठंडी जमीन पर रहते हैं, तो उनकी सेहत बिगड़ने का खतरा रहता है, जिससे सीधे तौर पर दूध उत्पादन में गिरावट आती है. इसके अतिरिक्त, डॉ. भाखर ने सलाह दी है कि पशुपालकों को दिन के समय पशुओं के लिए पर्याप्त धूप और रात में हवादार लेकिन गर्म स्थान का प्रबंध करना चाहिए. ऐसा करने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है और वे मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं.

इसके अलावा गेंहू का दलिया, मक्का, जो, चना और मूंगफली का खल भी उपयोगी होता है

सर्दियों में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक दूध उत्पादन के लिए उनका आहार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. पशु विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में पशुओं को ऐसे खाद्य पदार्थ देने चाहिए जो उनके शरीर में गर्मी पैदा करें और ऊर्जा का स्तर बनाए रखें. सरसों की खल, गुड़ और चना जैसी चीजें पशुओं के शरीर को आंतरिक ताकत प्रदान करती हैं, जिससे न केवल उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है. गुड़ ऊर्जा का एक बेहतरीन स्रोत है जो ठंड के दौरान पशु के शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है. हरे चारे की बात करें तो बरसीम, लोबिया और नैपियर घास सर्दियों के लिए वरदान साबित होते हैं. ये प्रोटीन और आवश्यक खनिजों से भरपूर होते हैं, जो पशुओं को सक्रिय रखते हैं. इसके अलावा, संतुलित पोषण के लिए अनाज का मिश्रण देना भी बेहद उपयोगी है. गेहूं का दलिया, मक्का, जौ, बिनोला और मूंगफली या सरसों की खली का मिश्रण पशुओं को आवश्यक कार्बोहाइड्रेट और वसा प्रदान करता है, जिससे उनकी दूध देने की क्षमता पर ठंड का असर नहीं पड़ता.

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ठंड में बछड़े जल्दी बीमार पड़ सकते है इसलिए बैलेंस डाइट का इस्तेमाल करना चाहिए

पशु चिकित्सक डॉ. रावताराम भाखर के अनुसार, सर्दियों के मौसम में पशुओं की सेहत बनाए रखने के लिए डिवॉर्मिंग (कृमिनाशक दवा देना) एक अनिवार्य प्रक्रिया है. पशुओं के पेट में मौजूद कीड़े न केवल उनके पोषण को सोख लेते हैं, बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर कर देते हैं. नियमित अंतराल पर डिवॉर्मिंग कराना पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन, दोनों को बेहतर बनाए रखने के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित होता है. डॉ. भाखर ने विशेष रूप से छोटे बछड़ों की देखभाल पर जोर दिया है. सर्दियों में बछड़ों का इम्यून सिस्टम वयस्क पशुओं की तुलना में कमजोर होता है, जिससे वे बहुत जल्दी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए, उन्हें बीमारियों से बचाने के लिए बैलेंस डाइट (संतुलित आहार) के साथ-साथ समय पर कृमिनाशक दवा देना बेहद जरूरी है. समय पर की गई यह छोटी सी सावधानी पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है, क्योंकि स्वस्थ बछड़ा ही आगे चलकर एक उच्च दूध उत्पादक पशु बनता है.

60 फीसदी से अधिक पाचन क्षमता वाला चारा देना सबसे उपयुक्त माना जाता है

पशुओं को कड़ाके की ठंड से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पारंपरिक देसी नुस्खे अत्यंत प्रभावी साबित होते हैं. पशु विशेषज्ञों के अनुसार, गुड़, मेथी, अजवाइन, जीरा और कच्चा नारियल जैसे प्राकृतिक तत्वों को मिलाकर तैयार किया गया चारा पशुओं के शरीर को न केवल आंतरिक गर्मी देता है, बल्कि उन्हें शारीरिक ताकत भी प्रदान करता है. ये सामग्री औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं, जो सर्दियों में होने वाले संक्रमणों से पशु का बचाव करती हैं. सर्दियों के दौरान पशुओं की आहार प्रबंधन रणनीति में बदलाव करना भी आवश्यक है. ठंड के कारण शरीर की ऊर्जा जल्दी खत्म होती है, इसलिए सामान्य दिनों की तुलना में चारे की मात्रा थोड़ी बढ़ा देनी चाहिए. अतिरिक्त चारा पशु को पर्याप्त कैलोरी प्रदान करता है, जिससे उसका शरीर तापमान को नियंत्रित कर पाता है. पोषक तत्वों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में ऐसा चारा देना सबसे उपयुक्त होता है जिसकी पाचन क्षमता 60% से अधिक हो. सुपाच्य और ऊर्जा से भरपूर आहार यह सुनिश्चित करता है कि पशु का मेटाबॉलिज्म सही रहे और दूध उत्पादन के स्तर में किसी भी प्रकार की गिरावट न आए.

ठंड के मौसम में भी दूध की मात्रा और गुणवत्ता बनी रहेगी

पशुओं के संतुलित आहार में खनिज मिश्रण और ऊर्जा बढ़ाने वाले तत्वों को शामिल करना बेहद जरूरी है. इससे कड़ाके की ठंड में भी दूध उत्पादन में गिरावट नहीं आती है. जब पशु को आवश्यक मिनरल्स और पर्याप्त ऊर्जा मिलती है, तो उसका शरीर बाहरी तापमान से लड़ने के साथ-साथ अपनी उत्पादकता को भी स्थिर बनाए रखता है. यदि पशुपालक नियमित रूप से इन वैज्ञानिक तरीकों के साथ-साथ देसी और प्राकृतिक उपायों को अपनाते हैं, तो ठंड के मौसम में भी दूध की मात्रा और उसकी गुणवत्ता (फैट) दोनों बरकरार रहती है.

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December 27, 2025, 09:13 IST

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