अलवर पर्यटन स्थलों पर प्रवेश शुल्क 2026

Last Updated:January 01, 2026, 09:31 IST
Alwar News: अलवर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर 1 जनवरी 2026 से प्रवेश शुल्क लागू कर दिया गया है. बाला किला, मूसी महारानी की छतरी और फतेहजंग गुम्बद देखने के लिए अब पर्यटकों को टिकट लेना होगा. बाला किला जाने वालों को सरिस्का और पुरातत्व विभाग दोनों को अलग-अलग शुल्क देना होगा.
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अलवर न्यूज़: बाला किला और मूसी महारानी की छतरी पर अब लगेगा टिकट
Alwar News: अलवर जिले में दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं. जिले में स्थित ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल सालभर पर्यटकों से गुलजार रहते हैं. हालांकि नए साल 2026 से अलवर घूमने आने वाले पर्यटकों को कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर प्रवेश के लिए शुल्क अदा करना होगा. अलवर में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां अब तक पर्यटक निशुल्क भ्रमण करते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था बदलने जा रही है.
शुल्क का नया ढांचापुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से 1 जनवरी 2026 से बाला किला, मूसी महारानी की छतरी और फतेहजंग गुम्बद देखने के लिए टिकट अनिवार्य कर दिया गया है. विभाग की क्यूरेटर रेणू ने बताया कि इस संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं और नए साल से यह नियम पूरी तरह लागू हो गया है.
मूसी महारानी की छतरी देखने के लिए भारतीय पर्यटकों से 20 रुपये, विद्यार्थियों से 10 रुपये, विदेशी पर्यटकों से 100 रुपये और विदेशी विद्यार्थियों से 50 रुपये शुल्क लिया जाएगा. इसी प्रकार फतेहजंग गुम्बद के लिए भी यही शुल्क निर्धारित किया गया है. वहीं बाला किला देखने के लिए पर्यटकों को दोगुना शुल्क देना होगा. बाला किला के लिए भारतीय पर्यटकों से 50 रुपये, विद्यार्थियों से 20 रुपये, विदेशी पर्यटकों से 200 रुपये और विदेशी विद्यार्थियों से 100 रुपये शुल्क वसूला जाएगा.
दोहरा शुल्क और भौगोलिक स्थितिअलवर शहर के समीप अरावली की पहाड़ियों पर स्थित बाला किला सरिस्का टाइगर रिजर्व की बफर रेंज में आता है. इस कारण यहां पहले से ही प्रतापबंध गेट पर सरिस्का प्रशासन की ओर से प्रवेश शुल्क लिया जाता है. अब 1 जनवरी से पुरातत्व विभाग द्वारा अलग से टिकट लागू किए जाने के बाद पर्यटकों को दोहरा शुल्क चुकाना पड़ रहा है.
ऐतिहासिक धरोहरों का महत्वबाला किला अलवर का प्रमुख ऐतिहासिक दुर्ग है, जिसे 18वीं शताब्दी में अलवर रियासत के संस्थापक महाराजा प्रताप सिंह ने अपने नियंत्रण में लेकर सामरिक रूप से मजबूत कराया था. यह किला समुद्र तल से लगभग 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पूरे अलवर शहर पर नजर रखी जा सकती थी.
मूसी महारानी की छतरी का निर्माण सन 1815 में तत्कालीन महाराजा विनय सिंह ने महाराजा बख्तावर सिंह और रानी मूसी की स्मृति में करवाया था. यह छतरी स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है और 80 बलुआ पत्थर के खंभों पर टिकी हुई है. वहीं फतेहजंग गुम्बद पांच मंजिला इमारत है, जिसकी बनावट में राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली की झलक मिलती है. इन ऐतिहासिक स्थलों को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक अलवर पहुंचते हैं और ये स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Alwar,Alwar,Rajasthan
First Published :
January 01, 2026, 09:31 IST
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अब ‘फ्री’ नहीं होगा पर्यटन स्थलों दीदार: 1 जनवरी से बाला किला और मूसी महारानी.



