अजब-गजब : जोधपुर की डिजाइनर ने बनाया 51 मीटर घेरा वाला लहंगा, लिम्का रिकॉर्ड के लिए किया दावा

Last Updated:January 02, 2026, 15:27 IST
Ajab Gajab : जोधपुर की फैशन डिजाइनर रश्मि चौहान ने घर की पुरानी साड़ियों से 51 मीटर घेरा वाला लहंगा बनाया. यह यूनिक लहंगा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए दावा किया गया है. परंपरा और आधुनिक सोच के मेल से तैयार यह लहंगा राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का प्रतीक बन गया है.
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जोधपुर : हुनर, परंपरा और सोच का मेल हो तो इतिहास रचा जा सकता है. जोधपुर की प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर रश्मि चौहान ने इसी सोच के साथ एक ऐसा प्रयोग किया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है. आमतौर पर घरों में लेन-देन या रोजमर्रा के काम में ली जाने वाली साधारण साड़ियों को उन्होंने अपनी कला का माध्यम बनाया और उनसे एक अनोखा प्रयोग किया. कुछ ऐसा ही किया है जोधपुर की डिजाइनर रश्मि चौहान ने वे मारवाड़ी और राजपूती पोशाक बनाने में माहिर हैं. उनकी बनाई पोशाकें विदेश भी जाती हैं. अब उन्होंने यूनिक लहंगा बनाया है, उन्होंने अपने घर पर पड़ी साड़ियों से ही कुछ अलग बनाने की ठानी और भारत का सबसे बड़ा लहंगा बना दिया. ये 51 मीटर घेर का है. रश्मि ने इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए दावा भी किया है.
रश्मि ने बताया कि मारवाड़ी लहंगों का घेर बड़ा होता है. कुछ अलग बनाने का सोचा, इसीलिए लहंगे के घेर के लिए साड़ियों का उपयोग किया. साड़ियों का संयोजन ऐसे किया है कि यह नजदीक से लहंगे की कलियों की तरह दिखती है. 51 मीटर के इस लहंगे में 9 साड़ियां लगी और इसका वजन करीब 25 किलो है. इसमें करीब डेढ़ से दो किलो गोटा लगा है. इसके अलावा कुछ जगह पर साड़ी में लगे स्टोन का प्रयोग ऐसे किया है, जैसे लहंगे के लिए ही स्टोन लगाए गए हैं.
लिम्का रिकॉर्ड के लिए 51 मीटर लहंगा तैयारलिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए किया दावा रश्मि ने बताया कि भारत में संभवतः यह पहला लहंगा है जो 51 मीटर के घेरे का है, इसीलिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अप्लाई भी किया है. इसके बाद इससे बड़े घेरे का लहंगा बनाने का प्लान है. यह लहंगा दो दिन में तैयार किया था. इसकी मेकिंग भी सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसे लोगों ने खूब सराहा है. इससे उन्हें भविष्य में और भी बड़े व अलग डिजाइन पर काम करने की प्रेरणा मिली है.
राजपूती पोशाक में संस्कृति की झलकरश्मि ने बताया कि यह लहंगा केवल परिधान नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. इसे तैयार करते समय उन्होंने परंपरा के साथ आधुनिक सोच को जोड़ने का प्रयास किया. इस लहंगे में केसरिया, हल्दी और नीले प्राकृतिक रंगों को मिक्स किया गया है, जो कभी फीके नहीं पड़ते. राजस्थानी राजपूती पोशाक का क्रेज लगातार बढ़ रहा है. इसकी वजह इसमें होने वाली कारीगरी है. उत्सव में लाखों लोग देखने के लिए आते हैं, इसीलिए ऐसा डिजाइन तैयार किया, जिसमें मारवाड़ की झलक भी मिले और यूनिक भी हो. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए यह लहंगा तैयार किया. उनका उद्देश्य राजस्थानी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और इसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
January 02, 2026, 15:27 IST
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जोधपुर की डिजाइनर ने रचा इतिहास, 51 मीटर घेरा वाला लहंगा किया तैयार



