जोधपुर के किसान का कमाल! खरपतवार से फसल बचाने के लिए अपनाया ये देसी जुगाड़, आप भी सीखें यह तकनीक

Last Updated:November 10, 2025, 12:12 IST
Innovation in Farming: जोधपुर जिले के मेड़ता सिटी के किसान सुखवीर गोलिया ने अपने देसी इनोवेशन से सबको चौंका दिया है. सौंफ की फसल को खरपतवार नाशक दवा से बचाने के लिए उन्होंने पौधों पर उल्टे गिलास रख दिए. इससे पौधे सुरक्षित रहे और खरपतवार खत्म हो गई. सोशल मीडिया पर यह जुगाड़ चर्चा में है और कृषि वैज्ञानिकों ने भी इसकी सराहना की है. छोटे किसानों के लिए यह कम लागत वाला कारगर उपाय साबित हो सकता है.
जोधपुर. कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है और इसे सच कर दिखाया है जोधपुर जिला अंतर्गत मेड़ता सिटी के खाकड़ी गांव के किसान सुखवीर गोलिया ने. जिनका इनोवेटिव जुगाड़ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. इस इनोवेटिव जुगाड़ने न केवल किसानों को चौंकाया है बल्कि कृषि वैज्ञानिकों का भी ध्यान खींचा है. दरअसल, सुखवीर गोलिया ने अपने खेत में (सौंफ) की फसल बोई थी.
फसल के बीच में खरपतवार इतनी तेजी से बढ़ गई कि खेत में खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना जरूरी हो गया. लेकिन समस्या यह थी कि अगर सीधे दवा छिड़की जाती, तो सौंफ के पौधे भी प्रभावित हो सकते थे और पूरी फसल को नुकसान पहुंचता.ऐसे में किसान सुखवीर ने एक अनोखी तरकीब अपनाई उन्होंने सौंफ के पौधों के ऊपर गिलास उल्टा कर रख दिया.
देसी जुगाड़ से की फसल की सुरक्षा
पौधों के ऊपर गिलास उल्टा कर रखने के बाद जब खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव किया गया, तो पौधे गिलास से ढके रहे और उन पर दवा का कोई असर नहीं हुआ. वहीं आस-पास की खरपतवार पूरी तरह खत्म हो गई. इस जुगाड़ से किसान ने न केवल अपनी फसल को नुकसान से बचाया, बल्कि दूसरों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया. सोशल मीडिया पर सुखवीर के इस नवाचार को किसानों द्वारा खूब सराहा जा रहा है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका छोटे स्तर पर बेहद उपयोगी है और सीमित क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलों के लिए कारगर साबित हो सकता है.
स्थानीय स्तर पर बनी बदलाव की मिसाल
किसान सुखवीर गोलिया की यह देसी सोच अब अन्य किसानों के लिए नई राह दिखा रही है कि थोड़ा सा समझदारी भरा प्रयोग भी बड़ी फसल बचा सकता है. सुखवीर के इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया है कि बड़े निवेश या आधुनिक तकनीक के बिना भी छोटे स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है. खाकड़ी गांव और आस-पास के किसान अब इस विधि को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, जिससे न केवल फसल की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण समुदाय में साझा ज्ञान और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
November 10, 2025, 12:12 IST
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जोधपुर के किसान का कमाल! इस जुगाड़ से खरपतवार पर पाया काबू, आप भी सीख लें तकनीक



